आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सानिध्य में श्रावक श्राविकाओं का संस्कार शिविर का शुभारंभ। राग द्वेष मोह से मुक्त होने पर ही सच्चा सुख मिलेगामुनि श्री हितेंद्र सागर जी

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आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सानिध्य में श्रावक श्राविकाओं का संस्कार शिविर का शुभारंभ। राग द्वेष मोह से मुक्त होने पर ही सच्चा सुख मिलेगामुनि श्री हितेंद्र सागर जी

टोंक वात्सल्य वारिधी पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित टोंकके उपनगर आदर्श नगर में 34 साधु सहित विराजित है ।श्री मुनिसुब्रतनाथ नवग्रह जिनालय में नगर के बालक बालिकाओं का संस्कार शिविर का शुभारंभ आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में हुआ ।संस्कार शिविर अंतर्गत सभी को देव दर्शन की विधि, अभिषेक की क्रियाएं ,तथा पूजन के बारे में जानकारी देकर सभी से अभिषेक पूजन कराया गया।संस्कार शिविर में सभी उम्र के अनेक बालक बालिकाएं उत्साह से भाग ले रही है सभी शिविरार्थियों को कीट का वितरण किया गया।इसअवसर परमुनिश्री हितेंद्र सागर जी महाराज ने कर्मबंध पर विवेचना कर उपदेश में बताया कि कर्मबंध मोह , राग ,द्वेष के कारण होता है। इसलिए कर्मबंध से बचना चाहिए ।भगवान श्री पार्श्वनाथ की प्रतिमा यही संदेश देती है कि सभी को इंद्रिय संयम रखना चाहिए घर पर भी आप रहे तो यही चिंतन रखें सुख प्राप्त करने की राह में मोह राग द्वेष हमारे शत्रु हैं इनके बंधन से मुक्त होने पर ही हमें सच्चा सुख प्राप्त होगा ।राजेश पंचोलिया एवं समाज प्रवक्ता गजराज लोकेश ने बताया कि मुनि श्री ने अपने प्रवचन में श्री पार्श्वनाथ भगवान की पूर्व पर्याय मरुभूति ओर कमठ के माध्यम से बताया कि एक भाई के उपसर्गों को समता से सहन कर दूसरा भाई भगवान बन गया। आदर्श नगर के भगवान श्री पार्श्वनाथ आदर्श तीर्थंकर थे।उनकी प्रतिमा अत्यंत ही मनमोहक है। भगवान की प्रतिमा दर्पण हैं उनकी प्रतिमा यही संदेश देती हैं कि जिसने स्वयं को जान लिया वहीं दूसरे को जान सकता हैआदर्श नगर समाज के अध्यक्ष पारसमल फुलेता, मंत्री संजय संघी तथा कोषाध्यक्ष अध्यक्ष महावीर ने बताया कि आचार्य श्री की प्रेरणा उपदेश से प्रभावित होकर श्री गजराज लोकेश ने आजीवन शुद्ध जल ग्रहण करने का नियम लिया आचार्य श्री की आहार चर्या का सौभाग्य दिव्यांश मुकेश मनोज कलई परिवार को प्राप्त हुआ

 

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