5 oct 2016 के बच्चो को संस्कार की ओषधी देते रहे आचार्य श्री हबीबगंज स्थित जैन मंदिर में आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के प्रवचन
भोपाल जिस तरह अंतर्मन को बाहरी प्रदूषण से बचाने के लिए अंतर्मुखी होना पड़ता है उसी तरह अपने बच्चों को भौतिकतावाद के प्रदूषण से मुक्त रखने के लिए अभिभावकों को उनके प्रति जिम्मेदार और गंभीर होना पड़ेगा बाहरी विकारों से बचाने के लिए बच्चों के मन को समझने की जरूरत है इस मामले में आपकी भूमिका एक चिकित्सक की भांति होना चाहिए।यह सद्विचार आचार्य विद्यासागर महाराज ने बुधवार 5 oct 2016को धर्म सभा में व्यक्त किए आचार्यश्री हबीबगंज स्थित जैन मंदिर में ससंघ चातुर्मास कर रहे हैं शुरुआत में 1100 क्वार्टर जैन समाज के भक्तों ने अष्ट द्रव्यों से गुरुवर का पूजन किया।
आचार्यश्री ने कहा कि अंतर्मन में प्रवेश करने के लिए द्वार को खोलना पड़ता है जिस तरह अपने मकान के कक्ष में प्रवेश करने हेतु द्वार पर लगे ताले को खोलना होता है आपके अंतर्मन में यदि ज्ञान रूपी ताला लगा हो, तो कोई भी बाहरी विकार अंदर प्रवेश ही नहीं कर सकता भीतरी वातावरण को यदि स्वच्छ रखना है, तो बाहरी आवरण को प्रदूषण मुक्त रखना होगा।

आचार्यश्री ने कहा कि जिस तरह चिकित्सक आपकी जांच कर उपचार करते हैं और यह भी बताते हैं कि ठीक होने के लिए कौन सी औषधि कितनी मात्रा में लेना है ठीक इसी प्रकार एक चिकित्सक की भांति आप अपने बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी का परीक्षण कर उन्हें सही रास्ते पर चलने संस्कार रूपी औषधि दीजिए।

, ताकि वह जमाने की गंदी हवा से रोग ग्रस्त न हो पाए आप यदि कमाई के चक्कर में भाग रहे हो, तो आपकी खुद की पूंजी जो आपके बच्चे हैं, वे असुरक्षित हो जाएंगे
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी 9929747312

