जैनत्व की धरोहर हैं एचएनडी जमीन की प्रस्तावित बिक्री के गैर कानूनी सौदे के खिलाफ 2 अक्टूबर को HND बचाओ कृति समिति के तत्वाधान में होगा अनशन (लाक्षणिक उपोषण)

धर्म

जैनत्व की धरोहर हैं एचएनडी जमीन की प्रस्तावित बिक्री के गैर कानूनी सौदे के खिलाफ 2 अक्टूबर को HND बचाओ कृति समिति के तत्वाधान में होगा अनशन (लाक्षणिक उपोषण)
पुणे
जैनत्व के संरक्षण एवं धरोहर को संरक्षित रखना प्रत्येक जैन का दायित्व है लेकिन आज उन धरोहर को विक्रय किया जा रहा है।पिछले कुछ दिनों से पुणे की एक धरोहर सेठ हीराचंद नेमचंद स्मारक ट्रस्ट दिगंबर जैन मंदिर छात्रावास जहां पर जैन मंदिर भी स्थापित है। उस जमीन का कुछ भाग ट्रस्ट द्वारा किसी बिल्डर को बेचने का सौदा किया है। यह भूमि जैनत्व के लिए एक धरोहर है। जो जैन धर्मालंबियों के लिए धरोहर के साथ आस्था का केंद्र बिंदु भी है इसके साथी इस हॉस्टल में पढ़ने वाले कई बच्चों का भविष्य बना है जो आज उच्च पदों पर भी हैं और यदि इस हॉस्टल को बेचा जाता है तो न जाने कितने जैन परिवारों के बच्चे और जैन धरोहर को बहुत बड़ा आघात होगा।

 

 

इसको लेकर अहिंसा का प्रचार करने वाले अहिंसा के सिद्धांत का निर्बाध पालन करने वाले हमारे देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जन्म जयंती पर सेठ हीराचंद नेमचंद स्मारक ट्रस्ट गेट मॉडर्न कॉलोनी शिवाजी नगर में स्थित है वहां एक दिन का इस जमीन को बेचे जाने हॉस्टल की जमीन की प्रस्तावित बिक्री के गैर कानूनी सौदे के खिलाफ प्रस्तावित बिक्री के विरोध में एक दिन का अनशन (लाक्षणिक उपोषण) HND बचाओ कृति समिति के तत्वाधान में किया जा रहा है की ट्रस्टियों को सद्बुद्धि मिले एवं हमारी धरोहर बच सके इस मांग को लेकर किया जा रहा है। जमीन की बिक्री के सौदे के खिलाफ बैठे एवम न बेचे जाने के पक्ष के व्यक्तियों द्वारा पुरजोर विरोध करते हुए कहा है कि यदि यदि यह बिक्री को वापिस नहीं लिया तो यह अनशन आमरण किया जा सकता है और संपूर्ण भारतवर्ष में इसको लेकर अभियान भी चलाया जाएगा।

क्या वाकया
इस ट्रस्ट की भूमि के बारे में बताते हुए श्री पारस जैन लोहाडे ने बताया कि HND बोर्डिंग की सम्पूर्ण भूमि 12018 वर्ग मीटर यानी 129361 वर्ग फुट भूमि बिल्डर को बेची जा रही है और यह भूमि मेट्रो लाइन से 500 मीटर के अंतर्गत होने के कारण इस भूखंड को 4 FSI के कंस्ट्रक्शन की अनुमति मिलती है यानी भूमिक्षेत्र से चार गुना 517444 वर्ग फुट का कंस्ट्रक्शन हो सकता है और यहां नए फ्लैट का बाजारमूल्य लगभग 20000 रुपये प्रति वर्ग फुट का है (जो ज्यादा एमेनिटीज होने के कारण बढ़ भी सकता है) तो कुल कीमत 1034,88,80,000 (रुपये 1034 करोड़ अठासी लाख अस्सी हजार) आती है जिसे सिर्फ़ 230 करोड़ रुपये में बेचा जा रहा है और बदले में 10000 वर्ग फुट ज़मीन पर 40000 हज़ार वर्ग फुट के छात्रावास के इमारत का निर्माण बिल्डर की तरफ से मिलेगा।

उनका कहना है कि धर्मादाय आयुक्त द्वारा यह रकम FD में रखने के निर्देश दिए गए हैं और उनकी अनुमति के बिना यह FD को तोड़ नहीं सकते लेकिन उसका ब्याज ट्रस्ट के कार्यों के लिए कर सकते हैं। अब एक और गणित लगाए कि 230 करोड़ पर 7 टके FD ब्याज दर के अनुसार 16 करोड़ 10 लाख का ब्याज प्रतिवर्ष मिलेगा। क्या छात्रावास का इतना खर्चा होता है जो इतने रकम की आवश्यकता प्रतिवर्ष पड़े❓इतना पैसा आएगा तो उसके व्यय सही जगह हो रहा है या निजी स्वार्थ के लिए हो रहा है इसपर कौन ध्यान रखेगा ❓ऊपर से इतने पैसों पर कितना TDS कटेगा ❓ये सब विचारणीय प्रश्न है।

एक दानी व्यक्ति ने यह भूमि वर्ष 1958 में एक सार्वजनिक ट्रस्ट के ज़रिए छात्रावास, धर्मशाला आदि धार्मिक कार्यों के लिए समाज को दान कर दी थी। जिसे धर्मादाय आयुक्त ने एक फ़र्ज़ी, झूठी ऑर्डर तैयार करके एक बेहद मज़बूत पत्थर से बनी होस्टल की इमारत को जर्जर बताते हुए उसे तोड़ने और सम्पूर्ण भूमि बिल्डर को बेचने की अनुमति दे दी और बिल्डर इस भूमि पर 15 मंजिले अनेक टॉवर बनाएगा जो ट्रस्ट के मूल उद्देश्यों के विपरीत है।

सबसे बड़ी बात
सबसे बड़ी बात यह है कि उक्त भूमि पर 1008श्री वर्धमान भगवान का जिनालय बना हुआ है जो छात्रावास के साथ ही बनाया गया था। मूल बात तो ये है कि ट्रस्ट और बिल्डर के बीच जो करारनामा हुआ है उसमें मंदिर का उल्लेख न करके उसे prayer hall ये संज्ञा दी गई है यानी भविष्य में prayer hall हटाना तो बहुत आसान है मंदिर लिखते तो हटाना कठिन हो जाता विगत कुछ दिनों पूर्व इस मंदिर का कायाकल्प भी हुआ है जिसमें कई दानदाताओं ने अपना सहयोग प्रदान किया है वह भी किए जा रहे कार्यों का विरोध कर रहे हैं।

आपको बता दें छात्रावास, धर्मशाला आदि के उद्देश्य से बना हुए ट्रस्ट की भूमि का उपयोग केवल ट्रस्ट के उद्देश्यों के लिए होना चाहिए। ट्रस्ट डीड में कही भी ट्रस्ट की भूमि बेचने का अधिकार ट्रस्टी को नहीं दिया गया।

बिल्डर द्वारा षड्यंत्र तो ये किया गया है कि पहले ट्रस्ट की पूरी भूमि खरीद लेगा और बाद मे ट्रस्ट को 10000 वर्ग फुट जमीन पेरपेचुअल लीज तत्व पर देगा यानी ट्रस्ट भूमि के मालिक से किरायदार बन जाएगा और बिल्डर को प्रतिमाह या प्रतिवर्ष लीज रेंट देना पड़ेगा। फिर यदि लीज डीड के किसी प्रावधान का भंग ट्रस्ट द्वारा होता है तो लीज डीड निरस्त भी किया जा सकता है यानी ट्रस्ट को भूमि विहीन किया जा सकता है। निजी स्वार्थों को साधने के लिए 129361 वर्ग फुट भूमि के मालिक से 10000 वर्ग फुट भूमि का किरायदार बनना यह मायाचारी की पराकाष्ठा है लेकिन कर्मों के हिसाब में कभी गलती नहीं होती। अतः समय रहते सावधान होना होगा।

उन्होंने कहा कि हमेशा सत्य की जीत होती है और धर्म की रक्षा के लिए हम कुछ भी करने को तैयार हैं इसके लिए हमारे प्राण भी चले जाएं। उन्होंने संपूर्ण भारतवर्ष की जैन समाज से अपील किया कि हमारी इस मुहिम में हमारा साथ दें।

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