गणिनी आर्यिका 105 सुपार्श्वमति माताजी के 10 वे समाधि दिवस पर भाव भीना नमन

धर्म

गणिनी आर्यिका 105 सुपार्श्वमति माताजी के 10 वे समाधि दिवस पर भाव भीना नमन
श्री शांति वीर शिव धर्माजीत वर्द्धमान सुर्रिभ्यो नमः
प्रथम पट्टाधिश आचार्य श्री108 वीर सागर जी की अंतिम शिष्या गणिनी आर्यिका 105 सुपार्श्वमति माताजी के 10 वे समाधि दिवस वैशाख कृष्णा 8 अष्टमी 13 अप्रैल 2012 पर जीवन
परिचय
बड़के बालाजी जयपुर में गणिनी आर्यिका रत्न 105 सुपार्श्वमति माताजी का 10 समाधि दिवस उत्साह एवम श्रद्धा पूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर देश के अनेक राज्यो से भक्तों ने समाधि स्थल दर्शन पूजन किया।
क्षुल्लिका 105 श्री पदममति माताजी सानिध्य में विधान हुआ। विधान पश्चात पूज्य आर्यिका माताजी का गुणानुवाद कर वक्ताओं ने भावभीनी विनयांजलि प्रस्तुत की


एक परिचय गुरु माँ का
1 नाम। श्री भवरी बाई
2 पिता श्री हरक चंद जी
3 माता श्रीमती अणची देवी
4 जन्म स्थान मेंनसर नागौर
5 जन्म फागुन सुदी नवमी वि सं 1985 सन 1928
7 वैराग्य बीजारोपण
जब आपने 8 वर्ष की उम्र में आचार्य कल्प श्री चंद्र सागर जी के दर्शन मेनसर में किये व संवत 2005 में आर्यिका श्री इंदुमती जी के दर्शन से वैराग्य बीजारोपण हुआ। आपने व्रत प्रतिमा संवत 2005 मेनसर में आर्यिका 105 श्री इंदु मति जी से शूद्र जल त्याग व 7 प्रतिमा के व्रत नियम के साथ आजीवन नमक का त्याग किया।
आपने शिक्षा ब्रह्मचारी श्री राजमल जी ग्रहण की आपकी आर्यिका दीक्षा
भाद्र पक्ष शुक्ला पर्युषण पर्व व मार्दव धर्म व 1008 श्री सुपार्श्वनाथ
भगवान के गर्भ कल्याणक के दिन स्वाति नक्षत्र पर आचार्य श्री वीर सागर जी के कर कमलों से
आचार्य श्री महावीर कीर्ति जी ससंघ सानिध्य में सम्पन्न हुई।
अनूठा संयोग
इसे अनूठा संयोग की कहा जाएगा1008 श्री सुपार्श्व नाथ भगवान के गर्भ कल्याणक दिवस पर दीक्षा होने से आपका नाम आर्यिका श्री सुपार्श्व मति जी नामकरण हुआ।
चातुर्मास
आपके हुए वर्षायोग विवरण
 संवत स्थान
1 2014 जयपुर
2 2015 नागौर
3 2016 लाडनूं
4 2017 सुजानगढ़
5 2018 सीकर
6 2019 लाडनूं
7 2020 अजमेर
8 2021 चाम्पा नेरी
9 2022 सनावद m p
10 2023 औरंगाबाद
11 2024 कुम्भोज
12 2025 अकलुज
13 2026 बारामती
14 2027 कारंजा
15 2028 शिखर जी
16 2029 कोलकत्ता
17 2030 धूलियांन
18 2031 किशनगज
19 2032 गौहाटी
20 2033 डीमापुर
21 2034 विजय नगर
22 2035 कानकी
23 2036 भागलपुर
24 2037 शिखर जी
25 2038 गिरीडीह
26 2039 शिखर जी

27 2040 शिखर जी
28 2041 शिखर जी
28 2042 गिरीडीह
29 2043 बारसोई
30 2044 गुहाटी
31 2045 तिनसुखिया
32 2046 डीमापुर
33 2047 गुहाटी
34 2048 विजय नगर आसाम
35 2049 बालवाड़ी
36 2050 गौरीपुर
37 2051 शिखर जी
38 2052 शिखर जी
39 2053 कोकलत्ता
40 2054 कोलकत्ता हावड़ा
41 2055 श्री महावीरजी
42 2056 जयपुर
43 2057 नागौर
44 2058 सीकर
45 2059 उदयपुर
46 2060 पारसोला
47 2061 पारसोला
48 2062 निम्बाहेड़ा
49 2063 भीलवाड़ा
50 2064 जयपुर नेमिनगर
51 2065 जयपुर खनिया जी
52 2066 जयपुर जौहरी
53 2067 जयपुर श्यामनगर
54 2068 जयपुर बड़के
गणिनी माताजी ज्योतिष की बहुत जानकर थी जिसका प्रमाण इस बात से मिलता है आपने सन 1990 में आपने आदरणीय श्री निर्मल जी सेठी से कहा था की मेरे ज्योतिष ज्ञान अनुसार मुनि श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज आचार्य जरूर बनेंगे। इसी
प्रकार एक और उदाहरण पढ़ने में आता है कि, आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी जी जब ग्रहस्थवस्था में सुलोचना थी। तब उन्होंने 8 या 9 वर्ष की उम्र में माताजी के दर्शन किये थे। तब माताजी ने कहा था कि यह बालिका जिस दिन मुनिराज को देखेगी धर को छोड़कर संन्यास
मार्ग पर निकल जावेगी। इस कारण उन्हें बाहर नही निकलने देते थे पर होनी को कोई रोक नही सकता है।
संयोग बना की उपाध्याय श्री ज्ञान सागर जी का जैसे ही श्री सुलोचना ने दर्शन किये धर छोड़ दिया। ऐसे अनेक उदाहरण है जो इसका प्रमाण देते है।
वात्सलय वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज संघ सानिध्य में 9 जनवरी 1999 को श्री महावीर जी मे आर्यिका श्री सुपार्श्व मति जी ने आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी संघ की आगवानी की थी। व जुलाई 1999 जयपुर श्री भट्टारकजी की नसिया में चातुर्मास साथ मे किया।
उपरान्त सीकर चातुर्मास कर आर्यिका श्री सुपार्श्व मति जी 2001 मे नंदन वन धरियावद मे पहुँच कर आचार्य श्री के दर्शन किये। इसके बाद
पारसोला, भींडर, उदयपुर आदि अन्य नगरो में भी माताजी आचार्य संघ सानिध्य में कार्यक्रम में शामिल हुई।
समाधी
आपकी समाधी13 अप्रैल 2012 को बड़के बालाजी जयपुर में हुई।
आपकी इच्छा
आपकी बहुत इच्छा थी कि आपकी सल्लेखना पंचम पट्टाधिश आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी के सानिध्य में हो।
आचार्य श्री ने तेज गति से विहार भी किया किन्तु जयपुर नही पहुँच सके। उस समय बड़के बालाजी में आचार्य श्री चैत्य सागर जी महाराज संघ, मुनि श्री अनेकांत सागर जी तथा संघ साधुओ के सानिध्य में समाधि हुई
राजेश पंचोलिया इंदौर
वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी
संकलित अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी

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