कमला नगर डी ब्लॉक जैन मंदिर से वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज का कर्मयोगी एनक्लेव जैन मंदिर में हुआ आगमन

धर्म

कमला नगर डी ब्लॉक जैन मंदिर से वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज का कर्मयोगी एनक्लेव जैन मंदिर में हुआ आगमन

आगरा
वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भयसागर महाराज ससंघ का 16 फरवरी को आगरा के कमलानगर स्थित श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर से प्रातः 7:00 बजे मंगल विहार कर श्री नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर कर्मयोगी एन्क्लेव कमला नगर पहुंचे| जहां कर्मयोगी एनक्लेव सकल जैन समाज ने आचार्यसंघ का पाद‌ प्रक्षालन कर भव्य अगवानी की। मंदिर में हुए मंगल प्रवेश के बाद आचार्यश्री ससंघ ने मूलनायक भगवान नेमिनाथ की प्रतिमा एवं सभी प्रतिमाओं के दर्शन किए और फिर मंदिर प्रांगण में धर्मसभा का आयोजन हुआ| जिसमें आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज ने भक्तों को धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि कर्मयोगी में आज एक योगी का आगमन हुआ है। एक श्रावक पाप रूपी कर्म करता है और साधक पुण्य रूपी धर्म करता है। इसलिए कर्मयोगी नहीं धर्मयोगी बनो। संसार के सभी प्राणी कर्म कर रहे हैं और यह जीव भी अनादिकाल से कर्म की खेती कर रहा है। आचार्यश्री ने कहा कर्म की खेती करने वालों को पाप रूपी खर पतवार ही मिलती है पर धर्म की खेती करने वालों को अरिहंत और सिद्ध रूपी फसल मिलती है। उन्होंने कर्म की व्याख्या करते हुए कहा कर्म एक पुरा कर्म, विधाता, भाग्य प्रवृत्ति ये एकार्थवाची शब्द है। कर्मभूमि में ही कर्म किये जाते है भोग भूमि में नहीं इसलिए ही कर्म करके ही भोजन करना चाहिए। बिना कर्म किये भोजन करने वाले अस्वस्थ होते है। मन्दिर और गुरु की संगति पाप धोने और पुण्य का संचय करने के लिए होती है। कर्म दुष्कर्म और सत्कर्म की अपेक्षा से दो प्रकार का भी कहा है। योगी श्रावक को दुष्कर्म से छुडा़कर सत्कर्म में लगाते है। जो पाप कर्म घर में किया जाता है वह कर्म मन्दिर में भक्ति आराधना करने से धुल जाता है।

 

पाप कर्म छोड़कर कृति कर्म, चितीकर्म पूतीकर्म और विनय कर्म करना चाहिए।

 

 

 

 

भगवान के सामने हाथ जोडना,सिर झुकाना और बैठकर नमन करना कृति कर्म कहलाता है। बुरे विचारों को छोड़कर चित्त में निर्मल विचारों को लाना चितीकर्म कहलाता है।

जल चंदन आदि से भगवान की पूजा करना पूतीकर्म कहलाता है और गुरु के आने पर खड़े होना पीछे चलना, हाथ जोडना विनय कर्म कहलाता है। जो व्यक्ति दान और पूजा की क्रिया कटे फटे वस्त्रों से नहीं करना चाहिए जो इनसे करता है उनके परिवार में अशांति होती है और समाज में कलह होती है गंदे वस्त्रों को पहनकर पूजा दान आदि करने से रोग उत्पन्न होते है और जीड छीड वस्त्र पहनकर अभिषेक पूजा करने से दरिद्रता आती है। 

 

आचार्यश्री ससंघ के आगमन पर नगरवासी बड़ी संख्या में कर्मयोगी एनक्लेव स्थित जैन मंदिर पहुंचे और सौभाग्यशाली भक्तों ने आचार्यश्री के समक्ष श्रीफल और शास्त्रभेंट कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया|। 

जानकारी देते हुए लवली जैन ने बताया की कर्मयोगी एनक्लेव जैन मंदिर में मंगल प्रवेश से पूर्व आचार्यश्री के ससंघ सानिध्य में डी ब्लॉक कमला नगर के श्री महावीर दिगम्बर जैन मन्दिर में अभिषेक एवं शांतिधारा एवं आचार्यश्री का मंगल उद्बोधन हुआ। श्रीजी की शांतिधारा करने का सौभाग्य प्रदीप जैन पीएनसी,नवीन जैन पीएनसी,प्रमोद जैन आरसीएम को प्राप्त हुआ। मंच संचालन मनोज जैन बाकलीवाल ने किया।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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