फिर पछताये होत क्या,जब चिड़िया चुग गई खेत?पुण्य”की जब तक प्रबलता है,कुछ अच्छे कार्य कर लो” -मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज

धर्म

फिर पछताये होत क्या,जब चिड़िया चुग गई खेत?पुण्य”की जब तक प्रबलता है,कुछ अच्छे कार्य कर लो” -मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज 

   भोपाल 

“पुण्य” से ही मनुष्य भव की अच्छी पर्याय,अच्छी बुद्धि, सुख सुविधाएं,घर परिवार,तथा धन संपत्ति किस लिए मिली? पाप में लगाने,विषयों में लीन होंने, तथा मजा मौज मस्ती करने के लिये? यदि पुण्य को पाप में लगाओगे तो यह पुण्य क्षींण होता चला जाएगा और जो दिख रहा है वह सब हाथ से निकल जाएगा। जिस निगोद नरक से यह यात्रा प्रारंभ हुई थी फिर वही चले जाओगे उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने विद्याप्रमाण गुरुकुलम् में व्यक्त किये।

 

 

 

 

उन्होंने”व्यामोह केबंधन में फंसा मनुष्य जीवन की सच्चाई को नहीं समझता,जब अंत समय निकट आता है,और वह अपनी सांसों को जाता हुआ देखता है,तो उसे पश्चाताप होता है,जिस धन संपत्ती के पीछे मेंने बहुमूल्य समय बिताया वह मेरे कोई काम नहीं आयी और अंत में उसके प्राण निकल जाते है, चीजें सब यही धरी की धरी रह जाती है” संत कहते है “पुण्य” के योग से जो मिला उसे पुण्य और धर्म में लगाओ जिससे तुम अपनी आत्मा का उद्धार कर सको यदि पुण्य की कमाई को पाप में लगाओगे तो फिर जिस नरक निगोद से निकर कर आये हो वहीं चले जाओगे” 

 

 

 

 

उन्होंने पंचतंत्र की प्रेरणादायक कहानी सुनाते हुये कहा कि एक चूहा संत के चरणों में पहुंचा गुरुदेव से बिल्ली से परेशान होंने की बात बताई संत पहुंचे हुये थे उनको वॉक सिद्धि थी उनको चुहे पर दया आई और उन्होंने उसे बिल्ली बना दिया लेकिन बिल्ली को भी संतुष्टि नहीं मिली वह फिर संत की शरण में आई उसने कहा में कुत्ते से बहुत परेशान हूं संत को फिर दया आई और उसे कुत्ता बना दिया,कुत्ता को भी अपना जीवन पसंद नहीं आया तो उसे हिरण बना दिया हिरण ने कहा कि मुझे शेर से डर लगता है तो संत ने उसे शेर बना दिया और वह शेर बनकर जंगल में राज्य कर निर्भय हो विचरण करने लगा अब उसके मन में लालच जागा कि कही यह संत मुझे फिर से चूहा न बना दे तो उसने संत को ही खत्म करने की योजना बनाकर आक्रमण करने संत के सामने पहुंचा कि संत उसकी कुटिल भावना को समझ गये और वह हमला कर पाता कि पुनः उसे मूषक भव कह दिया मुनि श्री ने कहा कि यह चुहा और कोई नहीं हम सब की यही कहानी है जिस “पुण्य” के योग से यह मनुष्य भव मिला, उस पुण्य को यदि पाप में लगाओगे तो नरक निगोद में ही जाओगे उन्होंने सभी को आंखें बंद कर एक प्रयोग कराया महसूस करें कि “मेरी काया जर्जर होंने को है, पूरा परिवार सामने है,उन्होंने सारे प्रयास कर लिये उनकी आंखों में बेबसी और लाचारी है,और मेरी आंखों के सामने मुझे मौत नजर आ रही है सब कुछ यहीं छूटता नजर आ रहा है,मेरी एक एक सांस बड़ी कठिनाई से चल रही है में चीजों को देख और समझ रहा हूं मेरे सामने मेरा पूरा जीवन चल चित्र के समान दिखाई दे रहा है ।

 

 

मुनि श्री ने कहा जिस पुण्य के योग से तुम आज यहा तक पहुंचे हो उसी पुण्य को यदि भोग में लगाओगे तो वापिस नरक निगोद के पात्र तो बनना ही पड़ेगा चलो नरक निगोद नहीं पहुंचे और मनुष्य ही बने लेकिन भिखारी के रुप में जन्म लिया तो क्या आपको अच्छा लगेगा? नहीं न!

 

 

 

 

 यदि भिखारी नही सम्राट बनना चाहते हो तो सम्राट जैसे काम करो” निर्णय करो कि मैं अपने जीवन में प्राप्त संसाधनों का उपभोग मजा मौज मस्ती में नहीं, पुण्य, धर्म तथा आत्मा के उद्धार में लगाऊंगा”इसे अपने जीवन का मूलमंत्र बना लो मुनि श्री कहा कि “जीवन का कोई ठिकाना नहीं कब टपक जाओ” आजकल तो जो घटनाएं सामने आ रही है उसमें जवान जवान ही जाने लगे है, कब किसकी बारी आ जाए पता नहीं? अपने लेखा जोखा को याद करो सभी कि बेलेन्स सीट तैयार है।

 

 

 

 

“वही भोगोगे जो तुमने अपने जीवन में किया है,और वही पाओगे जैसा जीवन तुमने जिआ है” सभी को इसका हिसाब चुकाना पड़ेगा” इस सच्चाई को समझीए जो जीवन मिला है,वह दोबारा कब मिले इसका कोई ठिकाना नहीं” मौका हाथ से निकल जाये इसके पहले संभल जाओ,

कहावत है कि “फिर पछताये होत क्या,जब चिड़िया चुग गई खेत? पल पल यह उम्र रूपी चिड़िया जीवन को चुग रही है,जीवन समाप्त हो उसके पहले इस चेतना को जगा लो, जब जागो तभी सवेरा आगे बढ़ो”कुछ लिख कर सो गये,कुछ पढ़कर सो गये, जिस जगह से जागो सवेरे उस जगह से बढ़कर सो, और एक सीढ़ी चढ़कर सो” तभी आपके जीवन का पथ प्रशस्त होगा उन्होंने सभी को आशीर्वाद देते हुये कहा कि आज की यह प्रेरणा आपके जीवन में सच्चा धर्मानुराग जगाये, आप सभी संयमी बने इसी में आपके जीवन की सार्थकता है और अब ज्यादा समय नहीं बचा है उल्टी गिनती प्रारंभ हो चुकी है,कब दीपावली आ जाएगी और चातुर्मास निष्ठापन हो जाएगा पता ही नहीं लगेगा इसके पूर्व पुण्य अर्जन करने का एक और मौका श्री सिद्धचक्र महामहामंडल विधान जो कि संस्कृत के बीजाक्षरों से मंडित है आपके सामने आने वाला है उसका लाभ पूरे भोपाल वासी उठायें। उपरोक्त जानकारी देते हुये प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया 14 सितंबर रविवार को दोपहर 1:30 बजे से क्षमावाणी का वृहद आयोजन मुख्य अतिथी भारत के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं स्थानीय सांसद आलोक शर्मा के मुख्य आतिथ्य में संपन्न होंने जा रहा है जिसमें भोपाल शहर में विराजमान सभी साधु साध्वियों को भी आमंत्रित किया गया है विद्याप्रमाण गुरुकुलम् तथा सकल जैन समाज भोपाल ने सभी समाज बंधुओं तथा सभी विशिष्ट नागरिकों से तथा आसपास के जिलों के समाज बंधुओं से इस कार्यक्रम में पधारने की अपील की है सभी के सांयकालीन भोजन की व्यवस्था कार्यक्रम स्थल पर की गयी है।

       संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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