तपस्वियों के सम्मान के साथ आचार्य श्री के सानिध्य में सभी ने की परस्पर क्षमा याचना
रामगंजमंडी
श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर परिसर में परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज सानिध्य में क्षमावाणी पर्व पर मनाया गया इस कड़ी में 65 सेअधिक तपस्वियों का आचार्य श्री के सानिध्य में तपस्वीयो की अनुमोदना करते हुए उनका समाज की और से उनका सम्मान किया गया
इस आयोजन की शुरुआत के क्रम में सर्वप्रथम बाहर से आए धर्म प्रेमी बंधुओ एवं तप आराधकों द्वारा आचार्य श्री 108 विराग सागर महाराज चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन किया गया। साथ ही सभी तपस्वियों ने आचार्य श्री के चरणों का पद प्रक्षालन किया एवं शास्त्र भेंट किया पद प्रक्षालन उपरांत सभी तपस्वियों का सम्मान किया गया इसी क्रम में संरक्षक अजीत सेठी का समाज की और उनकी अभिनंदन किया गया एवम उन्हें अभिनंदन पत्र प्रदान किया गया इस अवसर पर अध्यक्ष दिलीप विनायका ने श्री सेठी के मार्गदर्शन को अनुकरणीय माना एवम उन्होंने समाज की और से आचार्य श्री से एवम समाजबंधुओं से क्षमायाचना की आयोजन के क्रम में क्षुल्लक श्री ने सभी को क्षमा को महत्व बताते हुए आचार्य श्री से एवम समस्त संघ से क्षमायाचना की इस कड़ी में स्वामी जयेंद्र कीर्ति जी का भी सम्मान किया गया।
इस अवसर पर समस्त संघ ने अपने भाव प्रकट किए बोलते हुए मुनि श्री 108 प्रत्यक्ष सागर महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि क्षमा धर्म होता है यह पर्व हृदय का पर्व होता है जो झुकता है वह बड़ा होता है जो जितना झुकता जाता है वह उतना बड़ा होगा। भगवान शांति नाथ ने हमें क्षमा करना सिखाया है। आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज एवम समस्त संघ से क्षमायाचना करते हुए आचार्य श्री के विषय में कहा कि गुरु का हृदय विशाल होता है वह कितनी भी गलती हो हमें क्षमा कर देते हैं उन्होंने कहा गुरुवर अगर आपको भूल से भी मैंने विकल्प दिया हो कष्ट पहुंचा हो तो मुझे क्षमा करे।
इस अवसर प्रांजल सागर जी महाराज ने कहा कि आप रोज गलती करते हैं क्षमा मांग रहे हैं लेकिन गलती बार-बार करता है जानबूझकर करता है तो उसके लिए क्षमा नहीं है लेकिन भूल से अगर गलती हुई है तो उसके लिए क्षमा है। भाव विहल शब्दों समस्त संघ से क्षमायाचना करते हुए आचार्य श्री के लिए कहा कि आप भी मुझे क्षमा करें और आपकी चरण रज मुझे प्राप्त होती रहे आपका साथ मुझे जन्म जन्म तक मिलता रहे। इस अवसर पर क्षुल्लक श्री एवम मुनि श्री 108 प्रवीर सागर महाराज ने भी क्षमा धर्म पर प्रकाश डाला 


इस अवसर पर आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने कहा हमे एक दूसरे के साथ मैत्री भाव रखना चाहिए एवम क्षमा के विषय में प्रकाश डाला उन्होंने कहा आश्चर्य इस बात का है कि हम बैर क्यों बांधते हैं मरघट पर जाना सबका निश्चित है पर्याय परिवर्तन सब का निश्चित है हम थोड़े से कारण घर मकान धन दौलत पके लिए हम बैर बांध लेते हैं झगड़ा करते हैं। 

जैन दर्शन दुनिया के मस्तिष्क पर खटकता है
आचार्य श्री ने जैन दर्शन के विषय में कहा कि हमारा जैन दर्शन दुनिया के मस्तिष्क पर खटकता है इस पर बोलते हुए गुरुदेव ने कहाकी दुनिया के लोग जैन दर्शन को समझने की कोशिश करते हैं उनका दिमाग खराब हो जाता है। जैन दर्शन व्यवस्थित दर्शन हे। जिसमें कहा गया है कष्ट देने वालों को भी क्षमा करो कष्ट देने वाले को पहले क्षमा करो क्षमा धर्म वह धर्म है जो आत्मा की अंतर चेतना में विराजमान होता है।
जब बाहर आता है तो हमें बहुत कुछ देकर जाता है। वास्तविक क्षमा वह है आप पहले उसके घर द्वार जाए जिससे आपने अप शब्द कहे हो। जिसके प्रति आपको विकल्प है और आपके प्रति उसको विकल्प है। यही क्षमा है। आपका मन तैयार है तो उदार हृदय से से क्षमा मांगो।

क्षमावाणी पर्व पर यह कहता है 365 दिन में क्या क्या अपराध हुए हैं उनके लिए क्षमा मांगने का आज दिन है। इसी कड़ी में श्रीजी का अभिषेक एवं शांति धारा संपन्न हुई माला की बोली का सौभाग्य शांतिलाल गौतम कुमार नीरज कुमार जैन खानपुर वाले रामगंज मंडी को प्राप्त हुआ पाठशाला का मंगल कलश श्रीमान ओम प्रकाश जी अग्रवाल अंबे ट्रेडिंग कंपनी को प्राप्त हुआ। इसके बाद सभी ने परस्पर आलोचना पाठ करते हुए भगवान से क्षमायाचना की
सभी ने बैर भाव भुलकर एक दूसरे से क्षमा मांगी।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312







