न तेरा न मेरा” जग चिड़िया रैन बसेरा सुवह शाम का डेरा”* -मुनि श्री प्रमाण सागर* 

धर्म

न तेरा न मेरा” जग चिड़िया रैन बसेरा सुवह शाम का डेरा”* -मुनि श्री प्रमाण सागर* 

 भोपाल (अवधपुरी)जिस शरीर को तुमने अपना माना वह भी एक कर्म जन्य संयोग है” यह शरीर भी एक सेकंड में कब चला जाएगा पता ही नहीं पड़ेगा? जिस धन को जिस संपत्ति को तुमने अपना मान रखा है वह धन संपत्ति भी कब चली जाएगी पता नहीं प्रकृति कब तुम्हारे साथ कौनसा खेल खेल दे पता नहीं?जब यह सब छूट जाने वाला है फिर दंभ किस बात का ? मेरा कुछ भी नहीं इस अनूभूति से ही “आकिंचन धर्म” प्रगट होता है” उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने प्रकट किये उन्होंने चार बातें- मेरा,तेरा, मेरा तेरा,न मेरा न तेरा, कहते हुये कहा कि पूरा जीवन मेरा तेरा करते ही बीत जाता है? यह दुकान यह घर,यह फैक्ट्री यह कार,मेरी यंहा तक कि यह सारा संसार ही मेरा हो जाये जब यह शरीर ही तेरा नहीं,तो किस सोच में अपने आपको उलझाते हो?

 

 

 

मुनि श्री ने कहा कि यदि सच्चे मायनों में उत्तम आकिंचन धर्म को समझ लिया तो आपके सारे दुःख समाप्त हो जाएगे, मुनि श्री ने उदाहरण देते हुये कहा कि एक व्यक्ती के मकान में आग लगी फायर बिग्रेड आ गयी और उस मकान की आग को बुझाने का सब प्रयास कर रहे है लेकिन मकान मालिक रोये जा रहा है,इतने में उसका बेटा आया और उसने कहा कि पिताजी यह मकान अपना नहीं है कल शाम को ही में इस मकान को बेच चुका हुं और इसका पूरा रुपया भी आ गया है, इतना सुनना था कि वह व्यक्ति जो कुछ देर पहले विलाप कर रहा था अब हंसने लगा? मकान अब भी जल रहा है, मकान पहले भी जल रहा था किसने उसे रुलाया और किसने उसे हंसाया?

 

 

 

 यह अनुभव की बात है,”जहा मेरा और मेरापन जुड़ता है’वही दुःख होगा” उसी प्रकार यह शरीर है इसको मेरा कहोगे तो शरीर जन्य संवेदनायें तुम्हें दुःखी करेंगी,तथा संपत्ति को अपना मानोगे तो संपत्ति जन्य संवेदनायें आपको सुखी दुःखी करेंगी मुनि श्री ने कहा कि “क्या है मेरा? इस सत्य को पहचानो” कल तक जिस मकान को तुम अपना कह रहे हो वह मकान मुस्कुराते हुये कहता है कल तक यह तुम्हारे बाप का था वह कहता था यह मकान मेरा है,लेकिन अब उसकी केवल एक तस्वीर टंगी है और उस पर एक माला है, जिसे कब छोटी सी दीमक चट कर जाएगी और यह तस्वीर भी मिट जाएगी आज तू इस मकान को अपना कह रहा है? मकान क्या जगत की एक एक चीजें मनुष्य की नादानी पर हंसती है जिसे वह मेरी मेरी कहता है मुनि श्री ने कहा कि जब एक श्वांस पर भी तेरा अधिकार नहीं, कब चली जाए यह पता नहीं तो यह तो चीजें है अभी तुम्हारे पास हो सकती है,पर यह भी तुम्हारी नहीं, यह मात्र एक संयोग है, इस सत्य को पहचान लोगे तो जीवन की दिशा और दशा बदल जाएगी।

 

 

मुनि श्री ने कहा कि यह जानो कि “में एक शाश्वत ज्ञान दर्शन लक्षण वाली आत्मा हूं, मेरे पास जो कुछ भी है वह मात्र एक संयोग है,एक परमाणु भी मेरा नहीं है” जैसे बेंक का रोकड़िया के पास रोजाना करोड़ों रुपया आते है, तथा जाते है, उसे कोई सुःख दुःख नहीं होता क्यु कि वह जानता है कि जो कुछ भी है वह मेरे पास है वह मेरा नहीं है, यह एक मात्र एक जिम्मेदारी है संत कहते हे कि इसी प्रकार संसार में अपना जीवन कर्तव्य बुद्धि से जिओ एवं कर्तित्व की भावना से ऊपर उठो!

 

 

“कोई नहीं किसी का साथी,सारी यात्रा एकाकी है” उस एकत्व को पहचानो *”न मेरा न तेरा जग चिड़िया रैन बसेरा, सुबह शाम का डेरा”* मुनि श्री ने कहा कि क्या भरोसा कब चिड़िया उड़ जाए सब जानते हो कि एक दिन कहानी खत्म हो जाएगी फिर भी मेरा मेरा रटते रटते पूरी जिंदगी बिता देता है,उन्होंने कहा कि घर परिवार की बात तो छोड़ो आजकल तो लोग मेरे भगवान,मेरा मंदिर, मेरी बेदी मेरी धर्मशाला उसमें भी मेरा लग गया है, मेंने दान किया यह भाव भी अहंकार और ममत्व को बढ़ाने वाले है, उन्होंने कहा कि “जब तक मनुष्य के अंदर अहंकार और ममकार पलता रहेगा तब तक वह अपने आत्मधर्म को प्राप्त नहीं कर सकता” इस अवसर पर मुनि श्री संधान सागर महाराज एवं समस्त क्षुल्लक मंचासीन थे कार्यक्रम का संचालन। शिविर निर्देशक बाल ब्र. अशोक भैया ने किया संघ के प्रवक्ता अविनाशजैन विद्यावाणी ने बताया दशलक्षण पर्व के आखरी दिवस उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के साथ अनंत चतुर्दशी को प्रातः5:45 से कार्यक्रम का शुभारंभ भावनायोग से होगा तत्पश्चात पूजन एवं एवं हवन मुख्य पात्रों के द्वारा किया जाएगा तथ्पश्चात बत्तीस तथा सोलह तथा दशलक्षण पर्व के दस सात पांच उपवास करने वालों की पारणा होगी तथा उनका सत्कार किया जाएगा प्रातः 8:30 से प्रवचन होंगे दौपहर 2 बजे तत्वार्थसूत्र के दसवे अध्याय की विवेचना होगी तत्पशचात 2:30 बजे से भगवान की शोभा यात्रा मुनिसंघ के सानिध्य में गुरुकुलम् से निकाली जायेगी जो कि शहर के मुख्यमार्ग से होकर वापिस गुरुकुलम् में आयेगी एवं यंहा पर अभिषेक होगा तथा वार्षिक प्रतिक्रमण किया जायेगा इसी क्रम में रविवार को पूर्णिमा है, उपरोक्त दिवस प्रातः 55 मिनट की वृहद शांतिधारा मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज के मुखारविंद से होगी एवं सभी शिवारार्थिओं तथा कार्यकर्ताओं का सम्मान किया जाएगा।

    संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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