ऐसा कुछ करों कि आपका नाम भी इतिहास में दर्ज हो – -अक्षयसागरजी
सबसे पहले देश और उसकी सभ्यता का सम्मान करें
युवा सम्मेलन में युवाओं से आह्वान किया मुनिश्री ने
अशोक नगर–
धर्म सभी को सुखी बनाता है, हमारा परम सौभाग्य है कि जिस वसुंधरा पर महान आत्माओ ने जन्म लिया, वहां हमें रहने का मौका मिला है। इसे अवसर मानते हुए कुछ ऐसा करें जिससे देश समाज का गौरव बड़े। आपका नाम भी इतिहास के पन्नों में सुरक्षित हो जाये। देश के लिए संस्कृति के लिए धर्म के लिए कुछ करना होगा। इतना भी ना कर सको तो इतना अवश्य करना कि ये देश समाज और परिवार आपके कारण कभी लज्जित ना हो,और कर सको तो किसी गरीब बेसहरा की मदद जरूर कर देना। क्योंकि यह मानव जन्म मिला है ,तो इसको सार्थक करने की जिम्मेदारी भी आप की है। उक्त उद्गार सुभाष गंज में युवा सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए मुनि श्री अक्षय सागरजी महाराज ने व्यक्त किए।
संस्कृति के प्रति कर्तव्य का निर्वाह कर सकें
इसके पहले सम्मेलन का उद्देश्य बताते हुए मध्यप्रदेश महासभा के संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि परम पूज्य संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के पचासवें आचार्य पदारोहण वर्ष में युवाओं का देश समाज और संस्कृति के प्रति क्या कर्तव्य है,इस विषय को लेकर मुनि श्री अक्षय सागरजी महाराज ने युवा सम्मेलन का आव्हान किया। हमारे समाज देश सभ्यता व संस्कृति के प्रति जिम्मेदारी का पालन कर सकें, ऐसी सीख हम सब को लेनी है। इस हेतु एक विशेष टेली फिल्म भी दिखाई गई।सम्मेलन के पहले जगत कल्याण की कामना के लिए शान्ति धारा की गई इसके बाद युवा वर्ग के संरक्षक शैलेन्द्र श्रागर ने मंगल गान किया।
*पद और पैसे की पूजा में उन्नति पर विराम लग जाता है*
मुनिश्री ने कहा कि जिस समाज में पद और पैसे की पूजा होती है वह समाज पतन की ओर जा रहा है। उसकी उन्नति पर विराम लग गया है।समाज की प्रगति चाहते हो तो, समाज में पारदर्शिता के साथ व्यवस्थाओं में बदलाव होता रहना चाहिए।पद और पैसे की पूजा पर विराम लगाते हुए समाज को तरीके से सामूहिक रूप से कदम उठाए जाते रहना चाहिए।
सुख की परिभाषा भी पता नहीं है
उन्होंने कहा कि प्रत्येक जीव के जीवन का अंतिम लक्ष्य क्या होना चाहिए, हर व्यक्ति सुख चाहता है। लेकिन सुख की परिभाषा पता नहीं है। सुख का साधन धर्म ही है, वुद्धिमान लोग सत्य को पहचान कर धर्म की राह पकड़कर आगे बढ़ते चलें जातें हैं।धर्म हमें दुखो से उठा कर सुखों में पहुंच देता है। ऐसे धर्म को प्राप्त करने के बाद हमारा लक्ष्य क्या होना चाहिए, आत्म तत्व की प्राप्ति।

आचार्य श्री जुड़ा संस्मरण सुनाया
पूज्य मुनि श्री ने आचार्य श्री से जुड़ा संस्मरण सुनाया।उन्होनें बताया एक बार आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज मूलाधार पड़ते हुए कह रहे थे हम कितने सौभाग्यवान हैं कि हमें निर्दोष देव मिलें हैं, आर्य क्षेत्र मिला। प्रत्येक व्यक्ति कार्य कुशलता से करता है। फिर भी धन नहीं मिलता क्यो? पुरुषार्थ करने के बाद भी धन की प्राप्ति नहीं होती। पुण्य का उदय होगा तो थोड़े काम करने पर धन की प्राप्ति हो जाती है। हमारे पुण्य के उदय में सारी अनुकूलताये मिलती चलीं जाती है। इसलिए सच्चा धर्म करों जो तुम्हें देगा। सुख की खान है धर्म ।
धन वैभव शाश्वत नहीं है
उन्होंने कहा कि धन वैभव शाश्वत नहीं है। कर्तव्य करना चाहिए। आपने पसीना बहा बहा कर जो धन संग्रह किया था, वह सरकार के एक निर्णय से रुपया मूल्य हीन हो गया। और जो संग्रह आपने किया अब उसे कोई स्वीकार नहीं कर रहा। इस दौरान ब्रह्मचारी प्रधुम्न भय्या, विक्की भय्या, मनीष भय्या व समाज के प्रमुख रमेश चौधरी, मनीष एम पी, शैलेन्द्र श्रंगार विपिन सिंघई,अमित, लालू,राकेश जैन, संजीव जैन, आनंद कटपीस, पवन पंसारी सहित अन्य लोग मौजूद थे।समारोह का संचालन विजय धुर्रा ने किया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
