पूज्य मुनिश्री 108 विराटसागर महाराज के चरणो में भावाभिव्यक्ति
जिनका जन्म नाम अमित
आगे बढ़ चले इंद्रिय को जीत
विजय हेमलता की बगिया के है यह अनमोल मोती
हाटपीपलिया नगर की गौरव ज्योति
आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से दीक्षा ले बन गए साक्षात दिगंबर मूर्ति
19 मई 1974 को हाटपिपलिया की धरा पर जन्म लिया
विजय हेमलता को धन्य किया
शिक्षा बीकॉम कर संसार से विरक्ति की ओर अपने को अग्रसर किया
2 जून 2000 को अमरकंटक में आचार्य श्री से ब्रह्मचर्य व्रत लिया
सचमुच संसार से विरक्ति की ओर कदम बढ़ा दिया
21 अगस्त 2000 शनिवार की बेला मानव देह को धन्य कर आचार्य श्री से दीक्षा ले मुनि श्री 108 विराट सागर नाम पाया
मुनि प्रमाण सागर महाराज के चरणों में रहकर धर्म ध्वजा का रसपान कराया
जिन शासन की प्रभावना को एक नया जीवन दिया
ऐसे गुरु को पाकर जन-जन धन्य हुआ।
यथा नाम तथा गुण के धारी
विराट हृदय के विराट सागर आप हैं धारी
आपकी है महिमा न्यारी
शत शत नमोस्तु हमारी
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
