संसार सागर से पार लगाती है मां जिनवाणी* मुनि श्री दुर्लभ सागर जी
आरोन*
। इस संसार में अनंतानंत भवों से एक पर्याय से दूसरी पर्याय को बदलते हुए परिभ्रमण करता रहता है जीव जीव के कर्म उसे एक पर्याय से दूसरी पर्याय में भ्रमण कराते रहते हैं। यदि जीव को इन पर्यायों से मुक्त होकर मुक्ति को प्राप्त करना है तो मां जिनवाणी की शरण में आना ही होगा। उक्त सारगर्भित धर्मदेशना जैन मुनि श्री दुर्लभ सागर जी महाराज ने जैन समाज आरोन द्वारा नियम सागर भवन में हो रहे 32 दिवसीय सोलह कारण संवेग वैराग शिविर के दौरान आयोजित धर्म सभा में प्रवचन भक्ति के संदर्भ में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए दिए।
मुनि श्री ने कहा कि मां जिनवाणी उस घाट के समान है जो हमें संसार सागर से पार लगाने का उपकार करती है। लेकिन प्रवचन भक्ति को भी वहीं स्वीकार करता है जो स्वाध्याय करता है।स्वाध्याय न करने वाला प्रवचन भक्ति को स्वीकार नहीं कर सकता है। उन्होंने श्रावकों से स्वाध्याय की ओर ध्यान देने पर जोर देते हुए कहा कि जितना हो सके जिनवाणी का श्रवण करो और जिनवाणी के श्रवण के साथ साथ उसका चिंतन करो मनन करो।

अरिहंत परमेष्ठि और गुरुओं पर जितना श्रद्धान रखते हो उतना ही जिनवाणी पर भी श्रद्धान रखो। देव शास्त्र एवं गुरु तीनों पर अपने श्रद्धान को प्रगाढ़ करो। प्रवचन से पूर्व आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की सामूहिक पूजन करने का सौभाग्य जिनेश चंद नवनीत जैन जम्मू जैन झंडा परिवार को प्राप्त हुआ एवं गुरु उपासक पुण्यानुभुति पुण्यार्जक बनने का सौभाग्य जैन समाज अध्यक्ष विजय जैन डोडिया परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर श्री मिंटूलाल जैन,शिखर कलेशिया,सुरेन्द्र भूमरिया, अशोक चबूतरा,संजीव रामपुर भी उपस्थित थे।उक्त जानकारी चातुर्मास कमेटी के प्रचार मंत्री सुनील झंडा ने दी।
सुनील जैन झंडा आरोन से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
