ओंकार की साधना एवं “स्वयं को छोटा मान लेना” सबसे बड़ा मंत्र : आचार्य विद्यासागर महाराज चंद्रगिरी डोंगरगढ़ में 15नवंबर को पिच्छिका परिवर्तन समारोह संपन्न
चंद्रगिरी डोंगरगढ़
(आचार्य श्री विद्यासागर जी महा मुनिराज के ससंघ चातुर्मास के समापन बेला में पिच्छिका परिवर्तन समारोह संपन्न हुआ ।
इस अवसर पर अपने मंगल प्रवचन करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि आज लोग साधने के लिए छोटा मंत्र मांगते हैं जिसे वह साध सकें । आपने कहा कि अपने को छोटा मान लो यही सबसे बड़ा मंत्र है । जो स्वयं को बडा माने और छोटा मंत्र चाहे तब उद्धार कैसे होगा ।
आचार्य श्री ने कहा कि ओंकार में पांच परमेष्ठी निहित है एवं द्वादशांग का समावेश है इसमें जिनवाणी का ज्ञेय तत्व है जिससे कि योग्य गुरुओं के प्रसाद से समझ सकते हैं । ओंकार का महत्व सभी धर्म में स्वीकार भी किया गया है एवम सभी जगह इसकी पूजा होती है ।

चातुर्मास समापन की बेला पर आचार्य श्री ने कहा कि सहयोग करने वाले कार्यकर्ता पदाधिकारी अपने घर पर कम रहे लेकिन इस क्षेत्र देवघर में रहकर उन्होंने सेवाएं दी ।
पिच्छिका की विशेषता पर प्रकाश डालते हुए आचार्य श्री ने कहा कि मयूर पंख अहिंसा परक उत्पाद है और मोर द्वारा स्वत त्याग दिया जाता है तथा किसी प्रकार की हिंसा का प्रतीक नहीं है । आपने कहा कि लगातार प्रयोग के कारण 1 वर्ष में मयूर पंख कुछ कठोर हो जाते हैं अतः अहिंसा व्रत संचालन के लिए इसका परिवर्तन कर नवीन पिक्षी का प्राप्त की जाती है।



डोंगरगढ़ में विशाल लाल पीले पाषाण से निर्मित होने वाले विशाल मंदिर के निर्माण में देश भर के भक्तजनों द्वारा सहयोग प्रदान किया जा रहा है । इस कार्य को और तीव्र गति से कराकर पंचकल्याणक का कार्यक्रम शीघ्र संपन्न कराया जा सकता है ऐसा संकेत आचार्य श्री ने प्रदान किया ।
इससे पूर्व प्रतिभास्थली की दीदियो प्रतिभास्थली से गाजे बाजे के साथ पिच्छिकाओं को सजाकर समारोह पंडाल स्थित स्थल पर उपस्थित हुई । जहां जयकारों के साथ आचार्य श्री का ससंघ का पिच्छिका परिवर्तन संपन्न हुआ ।

आचार्य श्री ने सभी नवीन पिच्छिका प्रदाता एवं पुराने पिच्छिका ग्रहण करता श्रावकों को आशीर्वाद प्रदान किया ।
आचार्य भगवान श्री विद्यासागर जी महामुनिराज को नवीन पिच्छिका प्रदान करने एवं पुरानी पिच्छिका ग्रहण करने का सौभाग्य क्षेत्र के महामंत्री श्री चंद्रकांत जैन श्रीमती अनीता, रिशु जैन, रेनू जैन (पूर्णायु) श्री शशिकांत श्री रविकांत जैन एवं परिवार जनों को प्राप्त हुआ।
निर्यापक मुनिराज श्री प्रसाद सागर जी महाराज को नवीन पिच्छिका प्रदान करने का सौभाग्य वरिष्ठ समाज सेवी छत्तीसगढ़ के भामाशाह श्री हनुमान प्रसाद विनोद जैन श्रीमती संजना जैन बडजात्या रायपुर एवं श्री प्रदीप, मीना, प्रियेश सिल्की प्रसंग प्रतीक्षा जैन दैनिक विश्व परिवार को प्राप्त हुआ। मुनिश्री की पुरानी पिच्छिका नागपुर निवासी श्री प्रमोद श्रीमती अंजू जैन गुडलक परिवार को प्राप्त हुई ।
मुनि श्री चंद्र प्रभ सागर जी महाराज को नवीन पिच्छिका श्री पारस श्रीमती दीपा जैन समाधिस्थ रचना दीदी सागर परिवार को प्रदान करने प्राप्त हुआ । पुरानी पिच्छिका श्री नितिन श्रीमती नमिता जैन डोंगरगढ को प्राप्त हुई । मुनिश्री निरामय सागर जी को नवीन पिच्छिका का प्रदान करने का सौभाग्य श्री नवीन श्रीमती आशा दुर्ग श्री प्रदीप श्रीमती रीता ललितपुर को प्राप्त हुआ । पुरानी पिच्छिका श्री आशीष श्रीमती प्रियंका टीकमगढ़ को प्राप्त हुई को प्राप्त हुई ।
पिच्छिका परिवर्तन में देश भर से आए सैकड़ो श्रद्धालु जनों ने उत्साह से भाग लेकर समारोह की अनुमोदना की । इस अवसर पर आचार्य श्री की पूजन संपन्न हुई। मंगलाचरण प्रतिभास्थली की दीदी द्वारा किया गया ।
परिवर्तन समारोह का संचालन निर्यापक मुनि श्री प्रसाद सागर जी द्वारा किया गया ।
कार्यक्रम का संचालन क्षेत्र के महामंत्री श्री चंद्रकांत जैन द्वारा किया गया ।क्षेत्र के अध्यक्ष श्री किशोर जैन एवं कार्य अध्यक्ष श्री विनोद जैन बडजात्या द्वारा सभी का आभार प्रदर्शन किया गया ।
आचार्य श्री दोपहर 1:30 बजे खैरागढ़ की और ससंघ विहार कर गए । संभावना है कि आगामी दिसंबर माह में 9 से 15 तारीख तक तिल्दा नेवरा में संपन्न होने वाले पंचकल्याणक महोत्सव में आचार्य श्री का आशीर्वाद प्राप्त होगा ।
— प्रियेश जैन दैनिक विश्व परिवार से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
