जीवन का असली मजा तो वही ले पाता है,जो व्यस्त रहते हुये भी मस्त रहता है प्रमाण सागर महाराज
भोपाल
“राग द्वेष और मोह यह तीन हमारे संसार को बढ़ाने बाले है इसलिये यह त्याग करने योग्य है” उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने विद्या प्रमाण गुरुकुलम् के तीन छात्रो के एक प्रश्न “तीन तिगाड़ा काम बिगाड़ा” के उत्तर में दिये। उन्होंने कहा तीन का अंक काम बिगाड़ते ही नहीं है काम बनाते भी है अब आप ही देख लो आप लोग भी तीन हो और आपका नंबर लग गया उसी प्रकार सम्यक दर्शन सम्यक ज्ञान एवं सम्यक चारित्र जिसके जीवन में यह तीन रत्न आ जाते है उनका जीवन संभल जाता है,तो हम कह सकते है कि “तीन तिगाड़ा काम बिगाड़ा ही नहीं,तीन बनाये काम हमारा” और इस और सभी बच्चों को ही नहीं बड़ो को भी पुरुषार्थ करना चाहिये।
मुनि श्री ने आगम ग्रंथ के संदर्भ में कहा कि जो ग्रंथ भगवान जिनेन्द्र देव की वाणी से निकले आचार्य प्रणीत ग्रंथ है उन्ही को आगम कहा जाता है और वही जिनवाणी कहलाती है अन्य सभी पूजा की किताब है वह आगम प्रणीत ग्रंथ जिनवाणी की श्रैणी में नहीं आते।

इसी क्रम में भोपाल के जैन प्रोफेसर एसोसिएशन ने गुरु चरणों में नमोस्तु करते हुये प्रश्न किया कि आपके द्वारा किया जा रहा शंकासमाधान से हम सभी लोगों की कही शंकाओं का समाधान घर बैठे मिल जाता है,आपने शिक्षा के क्षेत्र में जो अलख जगाई है उसमें हम प्रोफेसर कैसे सहयोग प्रदान कर सकते है उसका जबाब देते हुये मुनि श्री ने कहा कि समाज की अंतिम श्रेणी में खड़ा कोई भी युवक शिक्षा से वंचित न रहे उसे भी वही शिक्षा मिलना चाहिये जो प्रथम पक्ती में खड़े युवक को मिल रही है यह प्रयास आप सभी लोगों होंना चाहिये दूसरा जैसा मेंने पिछले दिनों कहा था कि जैन बनाओ, जैन बढ़ाओ, अर्थात प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में “अहिंसा” की अलख जगना चाहिये और हम सभी को अहिंसाधर्म के प्रचार प्रसार में लगना चाहिये तभी इस संसार में लोगों का विश्वास जैन धर्म के प्रति बढ़ेगा और चारों ओर खुशहाली आयेगी।



प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया मुनि श्री के प्रवचन भावना योग का विज्ञान (फील टू हील) पर प्रतिदिन 8:30 बजे से विद्या प्रमाण गुरुकुलम् अवधपुरी में चल रहे है।तथा सांयकाल 6ः20 से आप अपनी शंकाओं का समाधान प्राप्त कर सकते है उक्त सभा में जैन ही नहीं जैनेत्तर बंधु भी पधारकर धर्म लाभ ले रहे है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

