भावनायोग कोई चमत्कार नहीं,यह भीतर से उठता एक संस्कार है”- मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज 

धर्म

“भावनायोग कोई चमत्कार नहीं,यह भीतर से उठता एक संस्कार है”- मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज 

भोपाल(अवधपुरी) भावनायोग” एक ऐसी साधना है,जो हमारे तन मन और चेतन तीनों को पवित्र बनाती है,जो हमें शारिरिक,और मानसिक स्तर पर परिष्कृत कर जीवन को निर्मल बनाने का रास्ता प्रदान करती है।मुनि श्री ने कहा “भावनायोग” कोई जादू की छड़ी या कोई क्रिया नही है,और नहीं कोई चमत्कार! यदि आप इसका वांक्षित फल पाना चाहते हो तो इसको साधो, और प्रयोग करो तभी आपको सिद्धी और साधना का फल मिलेगा उन्होंने भावनाओं का चेतना पर धर्मशास्त्र,कर्मशास्त्र,और मनोविज्ञान तथा विज्ञान की दृष्टि से पड़ने वाले विशेष प्रभाव पर कहा “जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन वेसी” “भावना” भव नाशनी होती है! जंहा आध्यात्म शास्त्र हर पल एक ही भावना पर जोर देता है, कि “मैं शुद्ध आत्मा हूँ” शुद्धोहं, शुद्धोहं, सोहं,सोहं! वही कर्म शास्त्र कहता है कि जैसी भावना वैसे संस्कार हमारी चेतना में जम जाते है, उसी अनुसार व्यक्तित्व का निर्धारण होता है। कर्म सिद्धांत कहता है कि जैसी भावना वैसे विचार, जैसी वाणी वैसी प्रवृति, जैसा कर्म वैसा फल आपको मिलता है, वही मनोविज्ञान कहता है कि हम अपने चेतन मन से जैसा देखते सुनते समझते तथा महसूस करते है वही सब संस्कार हमारे अवचेतन मन में पड़ जाते है,और कालांतर में चेतन मन उन्ही संस्कारों को उदघाटित करता है,तथा जैसा हम सोचते है,और विचार करते है वह सब हमारे जीवन में वैसा घटित होता है। 

 

 

 

मुनि श्री ने कहा कि हमारे विचारों का संबंध हमारी चित्तवृत्ति से है,हमारे शरीर में रहने वाले मस्तिष्क की पूरी तंत्रिका प्रणाली हमारी आंतरिक ऊर्जा से जुड़ी हुई है,हमारे जैसे भाव होते है वैसे रसायन हमारे शरीर में उत्पन्न होते है,उसकाअंतस पर अच्छा एवं बुरा प्रभाव पड़ता है, मुनि श्री ने भावनायोग के माध्यम से चार चरण में सबसे पहले “प्रार्थना” में भगवान के प्रति समर्पण का भाव उत्पन्न होता है,वही प्रतिक्रमण में अतीत के दोषों को पहचान कर चित्त का शुद्धीकरण करता है।

“प्रत्यख्यान” में अपने भावी जीवन को पवित्र एवं सकारात्मक बनाने के लिये संकल्पित होंना तथा अंत में चित्त की शुद्धि के साथ सामायिक समता,शांति और आत्म जागरूकता के साथ करना चाहिये जिससे आत्मा के सहज स्वभाव का अनुभव कर सको।

 

 

 

जो अपनी सामायिक में स्थिर होता है वही अपनी आत्मा में डूब सकता है।

प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया इस अवसर पर उड़ीसा से सराक जैन बंधु परिवार सहित पधारे उनका धर्म प्रभावना समिति ने आत्मीय स्वागत किया श्री जैन ने बताया गुरुवार को प्रातः8:30 बजे से 9:30 तक प्रवचन क्षमा धर्म पर होगा तत्पश्चात निर्वाणलाड़ू समर्पित किया जाएगा।

         संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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