समाज के प्रत्येक प्राणी को संगठित रहना चाहिए – आर्यिका विशुद्धमति माताजी बरसात में भी बढ़ते कदम सवाई माधोपुर की ओर
निवाई – सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में शुक्रवार को भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 विशुद्ध मति माताजी एवं पट्ट गणिनी आर्यिका 105 विज्ञमति माताजी का निवाई से बरोनी के लिए मंगल विहार हुआ आर्यिका माताजी के मंगल विहार में अनेक गणमान्य लोग मौजूद थे।
जैन समाज के प्रवक्ता विमल जौंला ने बताया कि आर्यिका माताजी संध सहित निवाई से सुबह श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर से रवाना होकर इन्द्रा कालोनी विस्तार, वैयरहाऊस पहाड़ी चुंगी नाका होते हुए गांव बरोनी पहुंचे जहां अरविन्द ककोड़, नवरत्न टोंग्या, बंटी कठमाणा, अर्पित लटुरिया, विमल पाटनी, अशोक सिरस, नेहरू बड़ागांव, राहुल लटुरिया, सुशील गिन्दोडी़, त्रिलोक रजवास, विमल कठमाणा, मुकेश बनेठा, मनोज पाटनी, अनिल जैन, हर्षित संधी, मनीष जैन, सहित समाज के लोगों द्वारा बरोनी में स्थित कमल मोटर्स पर पाद प्रक्षालन करके अगुवानी की।

जौंला ने बताया कि आर्यिका माताजी बरोनी से पराणा शिवाड़ होते हुए सवाई माधोपुर पहुंचेंगे। इस अवसर पर आयोजित भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105विशुद्ध मति एवं पट्ट गणिनी आर्यिका 105 विज्ञमति माताजी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि हमें अपने जीवन में सफलता प्राप्त करने बहुमुखी व्यक्तित्व का विकास करने एवं परिवार समाज राष्ट्र एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षित बनने के लिए संगठन की परम आवश्यकता है एवं समाज के प्रत्येक प्राणी को संगठित रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस ब्रह्माण्ड का प्रत्येक प्रदेश प्रत्येक क्षेत्र प्रवाहित होती हुई सरिताएं तथा लहलहाते वृक्ष हमें संगठन की सम्मिलिन की एकता के सूत्र में बंधने की प्रेम की और वात्सल्य की शिक्षा दे रहे हैं। फिर भी हम निरन्तर विषमताओं के विद्वेष के पार्टी पालिटिक्स के पंथ के और पक्षपात के धेरे में बंधकर मेत्री भावना का हनन कर रहे हैं। आर्यिका माताजी ने कहा कि धर्म एवं कर्म दोनों ही क्षेत्रों में समुचे विश्व का नैतिक समाज एक वात्सल्य के सूत्र में बंधकर सत्य अहिंसा मय वीतराग धर्म के केसरिया ध्वज को तीनों लोकों में फहराते हुए आत्म गुणों को संगठित करें। संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
