आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज का संघ सहित भवानी मंडी की और मंगल विहार जैन धर्म में पाप और पुण्य की महिमा: आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज
पिड़ावा:-श्री सांवलिया पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र बड़ा मंदिर में आचार्य श्री 108विनिश्चय सागर महाराज ने पाप और पुण्य का महत्व बताया।
जैन समाज प्रवक्ता मुकेश जैन चेलावत ने बताया कि परम पूज्य आचार्य गुरूवर 108श्री विनिश्चय सागर महाराज जी का सोमवार को मंगल प्रवेश हुआ था और गुरूवार को आचार्य श्री ने अपने प्रवचन में बताया कि जैन धर्म में पुण्य और पाप कर्मों के दो मुख्य प्रकार है। अच्छे कर्मों को पुण्य माना जाता है जो सुख और आनंद लाते हैं जबकि बुरे कर्मों को पाप माना जाता है जो दुख और पीड़ा लाते हैं दोनों कर्मों का प्रभाव जीव पर पड़ता है और उनके अनुसार ही जन्म मरण के चक्र में गति होती है।

आचार्य श्री ने बताया कि पुण्य और पाप क्या है पुण्य तब अर्जित होता है जब हमारे कर्म अच्छे होते हैं जबकि पाप तब अर्जित होता है जब हमारे कर्म बुरे होते हैं। जब पुण्य परिपक्व होता है या अपना फल देता है तो यह खुशी और आराम लाता है और जब पाप परिपक्व होता है या अपना फल देता है तो यह दु:ख के अलावा कुछ नहीं लाता है इसलिए हमें देव, शास्त्र, गुरु, के प्रति सच्ची श्रद्धा भक्ति से सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चरित्र को प्राप्त कर अपनी आत्मा का कल्याण करना चाहिए।


दोपहर में स्वाध्याय के बाद आचार्य श्री ससंघ ने भवानीमण्डी की और विहार किया। आचार्य श्री का चातुर्मास रामगंजमंडी में होगा।आचार्य श्री के मंगल विहार में रामगंज मंडी नगर के भक्त पूरे उत्साह के साथ पैदल बिहार में सम्मिलित हैं। मंगल विहार में रामगंजमंडी नगर ऋषभ जैन, भूपेंद्र जैन, अर्व चेलावत, संयम काला, नयांश बाबरिया, नितिन जैन सबदरा सम्मिलित रहे। महाराज श्री का 22 जून को भवानीमंडी प्रवेश की संभावना है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
