संसारी प्राणी दुख में सुख की खोज करता है जो की अज्ञानता है आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज

धर्म

संसारी प्राणी दुख में सुख की खोज करता है जो की अज्ञानता है आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज
बिजोलिया

25 वर्षों में रजत जयंती मनाई जाती है हमारे द्वारा 27 वर्ष पूर्व बिजोलिया में पंचकल्याणक हुआ था देखा जाए तो इस पंचकल्याणक महोत्सव की भी रजत जयंती हो चुकी है प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान से 23 वे तीर्थंकर पारसनाथ भगवान महावीर स्वामी तक पर अनेक उपसर्ग हुए हैं भगवान पार्श्वनाथ पर सगे भाई कमठ ने अनेक भवों में उपसर्ग किया जिन्हें उन्होंने समता से सहन किया। सारा संसार कष्ट में है संसारी प्राणी दुख में सुख की खोज करता है जो की अज्ञानता है ।

 

भगवान आदिनाथ का जन्म भोगभूमि के बाद कर्मभूमि में हुआ था कर्मभूमि में कर्म की प्रधानता होती है जनता को दुखी कष्ट में देखकर राजा ऋषभदेव ने प्रजा को असि,मसी ,कृषि शिल्प ,कला वाणिज्य का ज्ञान दिया जिससे प्रजा का कष्ट दूर हुआ ।तीर्थंकर भगवान संसार के प्राणियों की सुख की मंगल कामना करते हैं इसी कारण उन्हें तीर्थंकर नाम कर्म प्रकृति का बंध होता है। यह मंगल देशना वात्सल्य वारिधि पंचम आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने श्री आदिनाथ जिन बिंब पंच कल्याणक प्रतिष्ठा के गर्भकल्याणक दिवस पर धर्म सभा में प्रकट की।राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि धर्म में शक्ति और सामर्थ है, धर्म का सहारा लेने से जीवन में मंगल और पुण्य की प्राप्ति होती है। धर्म के दो भेद में श्रावक धर्म और मुनि धर्म होता है। आत्म कल्याण और शाश्वत सुख के लिए मुनि धर्म अपनाना जरूरी है। भगवान गर्भ में अवतरित होते हैं तो वह कल्याणक हो जाता है इसलिए उनका गर्भकल्याणक मनाया जाता है क्योंकि भगवान गर्भ में अवतरित होने से 9 माह से जन्म होने के 6 माह बाद प्रतिदिन 14 करोड़ रत्नों की वृष्टि 15 माह तक होती है। पुण्यशाली व्यक्ति पंचकल्याणक कराते हैं, इससे उन्हें महान पुण्य की प्राप्ति होती है।
इसके पूर्व प्रातः महिला द्वारा मंगल भावना हेतु घट यात्रा निकाली गई आचार्य वर्तमान सागर जी घाट यात्रा में संघ सहित सम्मिलित हुए ध्वजारोहण प्रमोद कुमार सुरेश कुमार सिद्धार्थ कुमार जैन बाबरिया  दोतडावाले परिवार रामगंजमंडी द्वारा किया गया इसके साथ ही उनके परिवार को आचार्य श्री के पद प्रक्षालन का अवसर भी प्राप्त हुआ उनके परिवार का यह प्रथम अवसर था जब गुरुदेव का पद प्रक्षालन करने का अवसर प्राप्त हुआ। पंडाल उद्घाटन नाथूलाल अशोक संजय परिवार कोटा द्वारा किया गया। प्रतिष्ठाचार्य पंडित विशाल धरियावद तथा पंडित कीर्तिश पारसोला के निर्देशन में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा के सोधर्म इन्द्र सहित सभी पात्रों ने धार्मिक अनुष्ठान किया।रात्रि को श्री जी ओर आचार्य श्री की आरती के बाद 16 सपने दिखाए गए। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी को नगर नगर पधारने हेतु अतिशय क्षेत्र जहाजपुर, चकवाड़ा तथा अन्य नगरों से श्रीफल भेंट कर निवेदन किया जा रहा हैं।
राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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