मुनि श्री पूज्य तीर्थ सागर महाराज का सल्लेखना पूर्वक समाधि मरण आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज के सानिध्य में मुनि श्री का संस्कारों पूर्वक अंतिम क्रिया संपन्न
उज्जैन।।
तपोभूमि पर आचार्य गुरुदेव श्री प्रज्ञा सागर जी महाराज के साथ संघ में 2005 से सम्मिलित क्षुल्लक पूज्य सागर जी को बुधवार के दोपहर में मुनि दीक्षा के उपरांत सल्लेखना प्रारंभ हो गई थी । मुनि दीक्षा उपरांत उन्हें आचार्य श्री द्वारा मुनि श्री 108 पूज्य तीर्थ सागर महाराज नाम दिया।
समाज सचिव मीडिया प्रभारी सचिन कासलीवाल ने बताया कि गुरुवार की रात को लगभग 2:30 पर पूज्य तीर्थ सागर जी महाराज ने अंतिम सांस ली और उनका समाधि पूर्वक मरण हो गया जैन धर्म में कहा जाता है कि जीने से ज्यादा मरना वह भी धार्मिक रीति रिवाज से महत्वपूर्ण माना गया है जीने के साथ-साथ जैन धर्म करने का भी सिद्धांत सीखना है और कहा जाता है कि अंतिम समय भगवान और गुरु के समक्ष इस प्रकार की सल्लेखना पूर्वक मरण सबसे सर्वश्रेष्ठ मरण माना गया है अपने पुण्य चेतना के साथ इस प्रकार का जो मरण होता है वही महत्वपूर्ण होता है।
समाधि पूर्वक मरण के संस्कारों में देश भर से लोग श्री महावीर तपोभूमि पर एकत्रित हुए और मुनि पूज्य तीर्थ सागर जी महाराज को डोले में बैठ कर 8 बजे से अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया चंदन घी औषधि नारियल गोले आदि से उनकी अंत्येष्टि का अंतिम संस्कार किया गया आगे आगे समाज जन उनके पिच्छि कमंडल लेकर चल रहे थे पीछे-पीछे संपूर्ण समाज जयकारों के नारों के साथ चल रहा था सारा तपोभूमि क्षेत्र जय कारों के नारों से गूंज उठा था


अंतिम समाधि के पूर्व उनका सर्वप्रथम जल से दूध घी दही केसर चंदन औषधि चूरण, कपूर आदि सामग्री से अभिषेक हुआ मंत्र उच्चारण के साथ आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी महाराज ने उनके संपूर्ण संस्कार कर सर्वप्रथम आचार्य श्री संघ ने उनकी परिक्रमा लगाई तत्पश्चात संपूर्ण सांसारिक परिवार ने उनकी परिक्रमा लगाई मुखाग्नि दी तत्पश्चात संपूर्ण समाज ने मुनिश्री108 पूज्यतीर्थ सागर जी महाराज की परिक्रमा लगाकर संपूर्ण संस्कार किया
संपूर्ण प्रक्रिया में दिगंबर जैन समाज के साथ-साथ देशभर से गुरु भक्त एवं ग्रामीण जन व वरिष्ठ एवं गणमान्य नागरिक के साथ-साथ संस्थापक अध्यक्ष अशोक जैन चायवाला,अध्यक्ष दिनेश जैन (सुपर फार्मा),सचिव संजय बड़जात्या,कोषाध्यक्ष,देवेन्द्र सिघंई,कार्याध्यक्ष इंदरमल जैन,उपाध्यक्ष धर्मेन्द्र सेठी, राजेंद्र लुहाड़िया,सहसचिव हितेष जैन,सह कोषाध्यक्ष गिरीश बिलाला,ग्रंथालय प्रभारी अनिल कासलीवाल,मंदिर व्यवस्था प्रभारी विमल जैन,अनिल जैन,संरक्षक कमल मोदी,पवन बोहरा सुनील जैन (ट्रांसपोर्ट) एवं प्रज्ञा कला मंच अध्यक्ष निशि जैन,सचिव रश्मि सेठी,प्रज्ञा युवा मंच अध्यक्ष पलाश लुहाड़िया, सचिव निखिल विनायक, प्रज्ञा पुष्प मंच अध्यक्ष अवनी जैन, सचिव तनिषा जैन प्रज्ञा बाल मंच अध्यक्ष काव्य सेठी, सचिव आराध्य जैन, व तपोभूमि परिवार आदि कई लोग उपस्थित थे एवं तपोभूमि पर अन्य कार्यक्रम में सम्मिलित होने का सभी ने आग्रह किया।



पूज्य सागर जी महाराज 2005 से मेरे साथ कदम से कदम मिलाकर चले हैं आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी महाराज
इस अवसर पर आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर महाराज ने कहा कि मुनि पूज्यसागर जी महाराज 2005 से मेरे साथ कदम से कदम मिलाकर हमेशा चले हैं एकदम शांत चित्र गुरु आज्ञा का निरंतर पालन करने वाले जो धर्म के मार्ग पर सिर्फ और सिर्फ धार्मिक क्रियो में ही अपना समय व्यतीत करते थे जैसा मैं बोल देता था वैसा ही करते थे उनकी हमेशा इच्छा थी यदि मेरी समाधि हो तो उज्जैन की पावन नगरी एवं आपके सानिध्य में और देखो आज हम लोगों का इस प्रकार का सौभाग्य बना कि हम इंदौर पट्टाचार्य महोत्सव में सम्मिलित होने आए जिसके कारण हमें उज्जैन भी रुकना पड़ा और इनका समाधि पूर्वक मरण जो सर्वश्रेष्ठ जैन धर्म में माना जाता है वह तपोभूमि पर ही हुआ नहीं तो हमारा चार-पांच साल यहां पर आने का कोई विषय ही नहीं बनता था और तो और उन्होंने छुल्लक महाराज रहते हुए बुधवार को मुनि दीक्षा देने का आग्रह किया और दोपहर ढाई बजे उनकी मुनि दीक्षा हुई जो पूरे होशो हवास में रहते हुए दीक्षा ग्रहण की और देखो गुरुवार की तरह उन्होंने मेरी ही शरण में अंतिम सांस ली।
सल्लेखनापूर्वक समाधि मरण हुआ इसीलिए उनके संपूर्ण संस्कार तपोभूमि पर ही हुए।
सचिन कासलीवाल 9425195544 से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312




