निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर महाराज ससंसंघ की भव्य मंगल अगवानी झारखंड की धर्मनगरी हजारीबाग में हुई*

धर्म

*निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर महाराज ससंसंघ की भव्य मंगल अगवानी झारखंड की धर्मनगरी हजारीबाग में हुई*
हजारीबाग (झारखंड)
निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108समतासागर महाराज,मुनि श्री पवित्रसागर महाराज ऐलक श्री निश्चय सागर, ऐलक श्री निजानंद सागर क्षु.श्री संयमसागर महाराज ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश धूमधाम और गाजेबाजे के साथ प्रातःकालीन बेला में श्री सकल दि. जैन समाज हजारीबाग के साथ महिला मंडल युवावर्ग एवं पाठशालाओं की बच्चों ने विशेष परिधान के साथ पक्तिवद्ध होकर जयघोष के साथ किया।

इस अवसर पर स्थान स्थान पर धर्म ध्वज लेकर श्रावक श्राविकाओं ने मुनिसंघ का पाद प्रक्षालन कर मंगल आरती उतारी एवं मुनि संघ की शोभायात्रा में सम्मिलित हुये। धर्म प्रभावना समिति के प्रवक्ता आविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया शोभायात्रा श्रीपारसनाथ दि. जैन मंदिर बड़ा बाजार की वंदना करते हुये आगे बड़ी एवं श्री श्री महावीर दि. जैन मंदिर की वंदना की शोभायात्रा में सकल दि. जैन समाज हजारीबाग एवं समस्त महिला मंडल अपने विशेष परिधान में उपस्थित थे साथ में आगे आगे पाठशाला के बच्चे तथा युवावर्ग जयघोष के साथ मंगलअगवानी करा रहे थे। हजारीबाग में जब मुनिसंघ का आगमन हुआ तो धर्मनगरी हजारीबाग उत्साह से झूम उठी इस अवसर पर समाज की ओर पदाधिकारियों ने श्रीफल अर्पित करते हुये मुनि संघ से रूकने का आग्रह किया।

धर्म सभा में निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर महाराज ने संबोधित करते हुये कहा यह नगरी कोई सामान्य नगरी नहीं है,बल्कि हमारे लिये विशेष नगरी इसलिये है कि इस नगरी के रत्न अनुज मुनिवर प्रमाणसागर जी और हमारा धर्म प्रभावना के क्षेत्र में बहुत लंबा प्रवास रहा मध्यप्रदेश उत्तर प्रदेश आदि के विभिन्न नगरों में चातुर्मास करते हुये लगातार 14 वर्ष तक आचार्य श्री की छत्रछाया में साथ साथ धर्म प्रभावना की। ये नगरी इसलिये भी धन्य है कि इस नगरी के नगर गौरव मुनिवर प्रमाण सागर जी इस नगरी के ही नहीं बल्कि आचार्य गुरुदेव विद्यासागरजी महामुनिराज के विशेष रत्नों में से एक है,जिन्होंने संपूर्ण भारत में विशेष रुप से धर्म की प्रभावना की है मुनि श्री ने कहा आज हमें इस धर्म नगरी हजारी बाग में आकर विशेष हर्ष का अनुभव हो रहा है,उन्होंने समाज के सभी वर्गों से कहा कि जीवन में देव शास्त्र गुरु की भक्ती करते हुये सदैव कुलाचार सदाचार तथा श्रावकाचार का पालन करते हुये धर्म की इस परंपरा को आगे बढ़ाए।

उन्होंने कहा कि आप लोग खूब धन संपत्ति को अर्जित करें आपका धन पैसा व्यसन और बुराइयों में न लगे आपका अर्थ व्यर्थ न होकर परमार्थ में लगे वह कभी भी अनर्थ का कारण न बने। आप लोगों ने यहा रुकने का अनुरोध किया लेकिन अभी हमारा लक्ष्य श्री सम्मेदशिखर जी तीर्थराज की वंदना की ओर है उन्होंने सभी को मंगल आशीर्वाद दिया।

इस अवसर पर मुनि श्री पवित्रसागर महाराज ने कहा यह सम्मान जो जैन समाज को मिल रहा है यह उनके पूर्वजों की कमाई है आगे अब उनको अपनी पहचान खुद बनाकर के अपने संस्कारों को आगे बढ़ाना है कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री के चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्जवलन के साथ हुआ। पाद प्रक्षालन पंचायत कमेटी के समस्त पदाधिकारियों ने किया एवं महिला मंडल ने शास्त्र भेंट किये।

विशेष सौभाग्य

मुनि द्वय का युगल पड़गाहन मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज के ग्रहस्थ जीवन के भाई श्री अनिल सेठी एवं श्रीमति बिंदु सेठी परिवार को प्राप्त हुआ

अविनाश जैन विद्यावाणी से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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