प्रासंगिक इन दिनों चर्चा में…बहुत मुश्किल है सपना-मनीष गोधा जैसा होना*धर्म को जानना, समझना उसे व्यवहार में लाना गोधा दम्पत् से सीखा जा सकता है ।*राजेन्द्र जैन महावीर सनावद
प्रासंगिक इन दिनों चर्चा में…बहुत मुश्किल है सपना-मनीष गोधा जैसा होना धर्म को जानना समझना उसे व्यवहार में लाना गोधा दम्पत्ति से सीखा जा सकता है ।राजेन्द्र जैन महावीर सनावद।
संसार में बहुत सारे धनी व्यक्ति है, वे धन प्राप्त करने के लिए जीते हैं, खूब धन प्राप्त करते है और धन के बीच ही मृत्यु को प्राप्त होते है। जीवन और मृत्यु के बीच यह धन सबका निधन कराता है और निधन के बाद समझ आता है कि अरिहंत नाम सत्य है।
इन दिनों विगत एक वर्ष से जैन समाज में एक नाम यदि सर्वाधिक चर्चा में है तो वह सपना-मनीष गोधा सुमति धाम इन्दौर का है। जब इन्दौर में इन्होंने सुमतिनाथ जिनालय बनाया और 1008 सुमतिनाथ भगवान की प्रतिमा का पंच कल्याणक मार्च 2024 में कराया, तब मनीष भैया मोनू व सपना जी का एक साक्षात्कार लेने का मन हुआ, तब देखा कि धनपति होने के बाद विनम्रता, विनय सम्पन्नता, अंहकार मुक्त बर्ताव, सबके प्रति सद्भाव, समाज के प्रति समर्पण, जैन धर्म का गहरा अध्ययन, समय की उपयोगिता, तकनीक आधुनिकता का संगम, गुणीजनों के प्रति अनुराग भाव, कुछ ऐसा कर गुजरने का भाव जिससे, जैन धर्म का झण्डा ऊँचा हो, जन-जन में जैन धर्म का प्रसार हो।
तब मुझे गोधा दम्पत्ति के साथ तीन घण्टे बैठने का अवसर मिला मेरी कलम से निकला ‘न बोली होगी, न चंदा होगा, समय के हर पल का सदुपयोग होगा’ और वह सब कुछ देखने को मिला अद्भुद, अविश्वसनीय, अकल्पनीय सुमतिधाम पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में ।

मनीष-सपना ने एक ऐसा मंदिर बनाया जो अत्यंत ही अल्प समय में सबका आकर्षण बन गया। देवाधिदेव सुमतिनाथ भगवान की मनमोहक प्रतिमा ने इन्दौर आने वाले हर शख्स को सुमति धाम आने को जागृत कर दिया। जो भी सुमतिधाम जाता है वह अपने आपको सेल्फी लेने से नहीं रोक पाता है और सोशल मीडिया पर डली फोटो पूछती है यह कहा है, तो जो देखता वह सुमति धाम पहुँच जाता है। किसी दम्पत्ति ने, किसी धनपति ने, किसी मंदिर ने, किसी प्रतिमा ने, किसी स्थान ने, मात्र एक वर्ष में जो लोकप्रियता पाई वह सुमतिधाम, सुमतिनाथ जिनालय व मनीष-सपना गोधा है।


*पट्टाचार्य महोत्सव, 400 संत, लाखों की भीड़*
पंचकल्याणक प्रतिष्ठा को पाँच माह पूरे हुए होगें कि आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के गुरु गणाचार्य श्री विरागसागर जी महाराज की अद्भुद समाधि या सर्वोत्कृष्ट समाधि 4 जुलाई 2024 को हुई। वे अपना पद आचार्य विशुद्धसागर जी महाराज को देने का एक विडियो संदेश में कहकर गए।
मनीष-सपना गोधा जो गुरु चरणों के चंचरीक बन गए थे। अक्टूबर-नवम्बर में नांदणी चातुर्मास में यह घोषणा मनीष-सपना गोधा ने की कि आचार्य श्री विशुद्धसागरजी महाराज का पट्टाचार्य महोत्सव सुमति धाम इन्दौर में होगा ,तब किसी ने नहीं सोचा होगा कि ये श्रमण परम्परा का महाकुंभ होगा, लेकिन सपना-मनीष गोधा ने तो यह सब सोचकर ही बोला होगा। समय आ गया, समयसार का पालन करने वाले गुरुदेव आ गये, दुनिया ने देखा क्या कैसे हुआ। आइये जानते है संक्षिप्त में “पट्टाचार्य महोत्सव-न भूतो न भविष्यति” यह वाक्य सुमतिधाम आने वाल लिए एक टेग वाक्य बन गया। श्रावक श्रेष्ठ दम्पत्ति, समन्वय सद्भावना के प्रतीक, जैन धर्म का गौरव बढ़ाने वाले, धर्मप्रेमी, गुरु भक्त मनीष-सपना गोधा के प्रयासों से इन्दौर व जैन जगत को पहली बार क्या मिला आईये जानते है
पहली बार दिगम्बर पिच्छीधारी लगभग 400 एक मंच पर जिनमें आचार्य, उपाध्याय, साधू, आर्यिका माताज ऐलक, क्षुल्लक, क्षुल्लिका, भट्टारक स्वामीजी ।
पहली बार ऐतिहासिक प्रवेश जो महावीर बाग से सुमति धाम तक अद्वितीय ।पहली बार 360 चौके एक साथ, एक स्थान सुमति धाम में ।
दूसरी बार सबका प्रवेश रजिस्ट्रेशन के साथ ।
पहली बार एक लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन ।
पहली बार जैन जगत के किसी आयोजन में लाखों लोग मात्र छह दिन में आए ।
सबके लिए सब कुछ सुमति धाम परिसर में सब कुछ निःशुल्क ।
25 हजार की क्षमता वाला वातानुकुलित भव्यातिभव्य पाण्डाल ।
विशाल राजमहल जैसा लुक, लाखों लाइट के माध्यम से भव्य सजावट ।
विशाल मंच पर सभी आचार्यों के बैठने की व्यवस्था एक जैसे सिहांसन पर बीच में।
एक और दिगम्बर मुनि, उपाध्याय, ऐलक, क्षुल्लक महाराज ।
एक और गणिनी आर्यिका , आर्यिका, क्षुल्लिका माताजी ।
बीच में ब्रहमचारी भैया दीदी, विद्वानों के बैठने हेतु पर्याप्त व्यवस्था ।
भगवान के समवशरण जैसा नजारा ।
एक साथ एक लाख समाजजनों की सुस्वादु शानदार व्यंजनों के साथ भोजन व्यवस्था ।
आहार हेतु सुन्दर सर्वसुविधा युक्त चौके जो तीन कक्ष, चौका, चेजिंग रूम, आहार देने का कक्ष, पीछे वाश एरिया । प्राकृतिक प्रकाश, हवा समुचित रूप से रहे इस हेतु पूर्ण प्रयास ।
प्रोजेक्शन मैपिंग, ड्रोन शो, लेजर शो आदिनाथ गाथा का शानदार मंचन ।
लाइट, साउंड, ड्रेस, राजमहल की व्यवस्था अकल्पनीय ।
विरागोदय तीर्थ, स्वाध्याय मण्डप, सम्यकदर्शन, स्वर्ग, नर्क, तीर्थ यात्रा, सिद्धलोक का जिनागम में वर्णित वर्णन
एलईडी फिल्म द्वारा पहली बार।
बच्चों के लिए आधुनिकतम धार्मिक खेल गतिविधियाँ ।
स्वस्ति मेहुल की भजन संध्या का अभूतपूर्व आयोजन ।
पहली बार 2000 ड्रोन आकाश में पहुंचाकर जैन धर्म की जय-जयकार ।
यह सब तो बहुत कम लिखा है जो पहुँचा सुमतिधाम वह कह उठा है बहुत मुश्किल है, सपना-मनीष
गोधा जैसा होना ।
इतना ही नहीं, जब मनीष-सपना समाजजनों को मिले हर कोई उनके साथ सेल्फी लेने को आतुर दिखा । सपना-मनीषजी गोधा 24×7 अपनी टीम के साथ लगे रहे। हर जगह उनकी उपस्थिति, हर स्थान पर एक-एक वस्तु की व्यवस्था, चेहरे पर थकान मुक्त होकर हर कार्यक्रम में सपरिवार पूर्ण उपस्थिति, बच्चों को संस्कारित करने
का कोई अवसर नहीं छोड़ा। संपूर्ण आयोजन में उनके चेहरे पर अभूतपूर्व उत्साह व मुस्कान हमेशा बनी रही । ऐसे दम्पत्ति जो धर्म को बखूबी जानते है, उसे समझते है और उसे व्यवहार में लाते हैं। सुमतिधाम जैसा आयोजन भूतो न भविष्यति तो हुआ ही है। अब भविष्य में फिर देखना है कौन सा स्वप्न, सपना जी ने युवा मनीषी भाई मनीष गोधा के साथ देखा है। हमें गर्व है कि हमने इन्दौर में एक स्वर्णिम इतिहास बनते देखा जिसे लिखकर हमारी कलम भी धन्य हुई।
श्रावक श्रेष्ठ दंपत्ति सपना मनीष जी गोधा जयवंत हो। इन्ही मंगल कामनाओं के साथ…
राजेन्द्र जैन ‘महावीर’
पूर्णाश्रय 217, सोलंकी कॉलोनी, सनावद
जिला खरगोन (म.प्र.) 451 111
मो. 9407492577
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