तरुण सागर महाराज कड़वे प्रवचन में से आज समाज और देश कुंभकरण की भांति गहरी नींद में सोया हुआ है।
परम पूज्य क्रांतिकारी संत 108 तरुण सागर महाराज के कड़वे प्रवचन हर व्यक्ति को झकझोर कर रख देते हैं। और सोचने पर मजबूर कर देते हैं।
उनके कड़वे प्रवचन में कुछ अंश आप तक प्रस्तुत कर रहे हैं मुनिश्री ने अपने कड़वे प्रवचन का एक विचार आजकल मैंने मीठा बोलना बंद कर दिया है, कारण है कि मैं मीठा बोलता हूं तो लोगों को लगता है कि जैसे मैं इन्हें सुलाने के लिए लोरी गा रहा हूं।

उन्होंने कहा आज समाज और देश कुंभकरण की भांति गहरी नींद में सोया हुआ है और सोते समाज व देश को जगाने के लिए लोरी काम नहीं आती इसके लिए तो शेर हाथी जैसी दहाड़ और चिंघाड़ चाहिए।
इसीलिए मैं दहाड़ता हूं और चिंघाड़ता हूं। वह कहते थे कि कड़वा बोलना मेरी प्रकृति नहीं ड्यूटी है। अगर वैध, संत और सचिव मीठा बोलने लगे तो समझना सेहत, समाज और देश का सत्यानाश होने वाला है।
संकलित अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312





