सुखी रहने का सबसे बड़ा सूत्र है – मन के पात्र पर सन्तोष की पेंदी लगाओ और सूकून का जीवन जीओ प्रसन्न सागर महाराज
मैनपुरी उत्तरप्रदेश
आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर महाराज ने मंगल प्रवचन में कहा कि आज के आदमी का सबसे बड़ा भ्रम है कि..दु:ख दूर होने पर मन प्रसन्न होगा
लेकिन सच तो यह है कि..मन प्रसन्न होने से दु:ख आपो आप दूर हो जायेंगे..!
एक कहानी के माध्यम से महाराज श्री ने समझाया
एक सन्त सम्राट के द्वार पर गया। भिक्षा मांगी, संयोग कहो कि सम्राट भी द्वार पर खड़ा था। सम्राट ने पूछा – क्या चाहिए-?* सन्त ने कहा – आप मेरे भिक्षा पात्र भर दें। सम्राट – बस इतना ही। संत – बस इससे ज्यादा कुछ नहीं चाहिए*। सम्राट ने अपने खजांची से कहा – जाओ सन्त को अपने खजाने में ले जाकर इसका भिक्षा पात्र पूरा भर दो। सन्त को लेकर खजांची गया – सन्त के पात्र में सम्पूर्ण हीरे जेवरात, सोना, चांदी, रूपये, पैसे जो भी डाले सन्त का पात्र खाली का खाली। सम्पूर्ण खजाना डालने के बाद भी सन्त का भिक्षा भरा नहीं।

खजांची परेशान होकर सम्राट के पास आया – बोला राजन! पूरा खजाना खाली हो गया लेकिन सन्त का भिक्षा पात्र नहीं भर सका। सम्राट हैरान परेशान होकर सन्त के चरणों में गिर पड़ा* और कहता है कि मुझे माफ करो। मैं आपका पात्र नहीं भर सका। तब सम्राट पूछता है कि आपका पात्र किससे बना है-?सन्त ने कहा – सम्राट यह पात्र इन्सान की खोपड़ी का बना है। इसमें आप तीन लोक की सम्पदा भी डाल दोगे तब भी यह भरने वाला नहीं है। *

महाराज श्री ने कहा आज का इन्सान कितना ही रूपया पैसा कमा ले परन्तु मन की तृप्ति मिलने वाली नहीं है*। जैसे – कितना ही आप सो लें, मगर नींद पूरी होने वाली नहीं है। कितना ही भोजन कर लो, पेट भरने वाला नहीं है। कितना भी पानी पी लो, कभी प्यास बुझने वाली नहीं है।
सुखी रहने का सूत्र बताया
महाराज श्री ने सुखी रहने का सूत्र बताया और कहा कि सुखी रहने का सबसे बड़ा सूत्र है – मन के पात्र पर सन्तोष की पेंदी लगाओ और सूकून का जीवन जीओ…!!!
नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
