जब सब कुछ मिलने का वक्त आता है..तब तक धैर्य का घड़ा फूट जाता है..! प्रसन्न सागर महाराज
भोगांव
परम पूज्य आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि जब सब कुछ मिलने का वक्त आता है..तब तक धैर्य का घड़ा फूट जाता है..!प्रेम-प्रार्थना और ध्यान का फल धैर्य रखने से मिलता है। इसलिए जल्दबाजी मत करो। बहुत बार जल्दबाजी से ही देर लग जाती है।
महाराज श्री ने कहा की जब तुम्हारी प्यास गहरी होगी तो परिणाम तो आयेगा ही आयेगा। बस धैर्य रखो और प्रतीक्षा करो। जितनी गहन प्रतीक्षा होगी, उतनी जल्दी फल मिलेगा।

तुमने बीज बो दिया है तो वृक्ष की घनी छांव में शान्ति से बैठकर इंतजार करो और देखो क्या होता है-? बीज फलेगा फूलेगा और फल आपो आप टूटेगा। लेकिन तुम उस प्रक्रिया को तेज नहीं कर सकते। क्या हर चीज के लिए समय नहीं चाहिए-?
तुम अपना कार्य करो और परिणाम परमात्मा पर छोड़ दो। जीवन में प्रेम-प्रार्थना और ध्यान पर हम आक्रमण नहीं कर सकते। इन्हें समर्पण और प्रतीक्षा से प्राप्त किया जा सकता है। प्रेम-प्रार्थना और ध्यान की दिशा में उठाए गए कदम फल को लेकर के ही आएंगे। महाराज श्री ने इस बात पर ध्यान दिलाया की कई बार हम अपना धैर्य खो बैठते हैं*। आप प्यास को बना के रखो, अधैर्य को जाने दो। अधैर्य को प्यास के साथ मत मिलाओ। प्रेम-प्रार्थना और ध्यान में उत्कंठा तो होगी परंतु संघर्ष नहीं होगा। अधैर्य में संघर्ष होता है, उत्कंठा नहीं होती। प्रेम-प्रार्थना और ध्यान का फल देर से मिलेगा। परंतु उसमें न जल्दबाजी होगी ना कोई मांग होगी। अधैर्य में मांग होती है, प्रतीक्षा नहीं।

प्यास में मौन, आंसू होते हैं और अधैर्य में मन की बेचैनी और संघर्ष होता है। लेकिन मन सदा परिणाम के लिए लालायित रहता है। मन के कार्य में कोई रस नहीं होता, सिर्फ परिणाम में ही रस होता है।

ध्यान, प्रार्थना और प्रेम उन्हीं लोगों के भीतर घटता है, जो परिणामोन्मुख नहीं होते। प्रेम-प्रार्थना और ध्यान परिणामोन्मुख न होने की दिशा है…!!!। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
