परम पूज्य भारत गौरव गणिनी आर्यिका रत्न 105 विज्ञा श्री माताजी स संघ का बीलवा से शिवदासपुरा के लिए हुआ भव्य मंगल विहार
ज्यादा तर्क जीवन को नरक बना देता है विज्ञाश्री
जयपुर/

परम पूज्य भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 विज्ञा स संघ का आज विमल परिसर बीलवा से शिवदासपुरा के लिए भव्य मंगल विहार हुआ, परिसर में प्रातः अभिषेक शांति धारा तथा अष्टद्रव्यों से पूजा के बाद आर्यिका श्री ने अपने मंगलमय प्रवचन में श्रावकों को संबोधित करते हुए बताया कि एक बार एक दृष्टिहीन व्यक्ति एक भोज में पहुचा वहा खीर बनी थी उसने कहा गया था की उसे आज बहुत लजीज खाना मिलेगा उसने मेजवान से पूछा क्या बना है ? मेजवान ने बताया की खीर बनी है उस व्यक्ति ने अपने पूरे जीवन में पहले कभी खीर नही खाई थी उसने पूछा की खीर क्या होती हैं ? मेजवान ने कहा की खीर दूध की बनती है और बहुत स्वादिष्ट होती है व्यक्ति ने फिर पूछा दूध कैसा होता है ? तो जवाब मिला दूध सफेद होता है उसने फिर पूछा सफेद कैसा होता है ? मेजवान ने कहा सफेद बगुले की तरह होता है दृष्टिहीन होने के कारण उसने बगुला नही देखा था वह वापस पूछता है बगुला कैसा होता हैं ? तो मेजवान ने अपने हाथ द्वारा बगुला का आकार बनाया फिर उस व्यक्ति ने अपने हाथ से मेजवान के बगुला आकार वाले हाथो को छूकर देखा और कहा अच्छा बगुला ऐसा होता है ये तो टेड़ा है इसका मतलब तो खीर भी टेढी़ होती है इसलिए में नही खाऊंगा दृष्टि ने होने के कारण उस व्यक्ति को खीर के रंग का ज्ञान करना बहुत मुश्किल था बेहतर होता है की पहले ही उसके मुंह में खीर डाल देते तो उसे बताने ,की जरूरत नहीं पड़ती इस प्रकार जब जब आम लोगो को आत्मा जैसे तत्व के बारे में समझाया जाता है तो उनके लिए खीर टेढी़ हो जाती है लेकिन जो तर्क और वितर्क में उलझकर सीधे खीर के आस्वादन् में लग जाते हैं उनके लिए उस खीर का स्वाद अमृत के समान होता है इसलिए कहते हैं ज्यादा तर्क जीवन को नरक बना देते हैं|उक्त जानकारी जैन महासभा मीडिया प्रवक्ता राजाबाबू गोधा ने दी है।
*राजाबाबू गोधा जैन महासभा मीडिया प्रवक्ता राजस्थान*
