मनुष्य ही है जो नर से नारायण बन सकता है प्रमाण सागर महाराज
इंदौर
मनुष्य ही है जो नर से नारायण बन सकता है प्रबल पुण्य के योग से,नर पर्याय मिली अपने पुरुषार्थ और साधना के बल पर इसअवसर का लाभ उठालो… इस पार तो तुम्हें सुख मिल गया है उस पार भी तुम्हें सुख मिल जाएगा प्रमाद में आकर इसे भोगा तो यह काल रुपी मगरमच्छ तुम्हें हजम कर जाएगा उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कालानी नगर इंदौर में मंगल प्रवेश अवसर पर प्रातःकालीन धर्म सभा में व्यक्त किये।
मुनि श्री ने चार बातों के माध्यम से कहा कि मनुष्य जीवन में पुण्य,पुरुषार्थ, प्रमाद और साधना ये चार बातें मिलती है उन्होंने कहा कि जब कभी भी अच्छा अवसर मिलता है तो मन आनंद से भर जाता है आज आप लोग बहूत खुश नजर आ रहे हो उसका कारण है जिस अवसर की आपको प्रतीक्षा थी वह अवसर आज मिल ही गया उन्होंने पूछा कि यह अवसर आपको आज ही मिला है क्या?यदि अपने अतीत की ओर झांककर देखोगे तो आप पाओगे कि अनेकों बार ऐसे अवसर मिले, लेकिन उन अवसरों का लाभ नहीं उठा पाए, मुनि श्री ने अवसर के संदर्भ में चार बातें कही अवसर पाना,अवसर खोजना, अवसर खोना,तथा अवसर का लाभ उठाना, उन्होंने कहा कि प्रायः हम अच्छे अवसर की तलाश में रहते है और वह अवसर हमें कही बार मिलते है लेकिन प्रमादवश उन अवसरों को खो देते है।

मुनि श्री ने कहा कि आज आप लोग एक कागज पैन लेकर बैठिये और अपने अतीत के अंदर झांककर देखिये कि आपके जीवन में लोक और लोकोत्तर क्षेत्र के कितने अवसर आए? सबसे महत्वपूर्ण अवसर तो यह मनुष्य जीवन मिला उन्होंने कहा “बड़े भाग मानुष तन पावा,सुर दुर्लभ सब ग्रंथई गावा” जिस मनुष्य तन को पाने के लिये देवता भी तरसते है ऐसा श्रैष्ठ मानव तन पाया और ऐसे परिवार में जन्म लिये जहा तुम्हारे डी.एन ए. में पीढ़ियों से अहिंसा के संस्कार चले आए है जंहा पर हिंसा और क्रूरता का कोई स्थान नहीं बोलो आप लोग सबसे अधिक भाग्यशाली हो कि नहीं?और बजाओ अपने लिये ताली और सराहो अपने भाग्य को कि अच्छा परिवार मिला,धन संपन्नता मिली,अच्छी बुद्धि मिली,अच्छा शरीर मिला, स्वस्थ्य हो, मस्त हो, मुस्कुराते हुये, बुन्देलखण्डी में कहा कि और का -का गिनायें? इत्तो सब कछु मिल गयो पर तुमने करौ का…. इतनी उपलब्धि और इतनी अनुकूलताओं का लाभ उठाया तब तो जिंदगी का कुछ अर्थ है और नहीं तो सब कुछ व्यर्थ है। मै मानता हुं कि घर परिवार यह सब कुछ आपको पुण्य से मिला है, धन वैभव यश कीर्ति आपने अपने पुरुषार्थ से जुटाया है, आपने परमार्थ के क्षेत्र में भी बहूत उन्नति की है और इतना भव्य भगवान का मंदिरों बनाया लेकिन ऐसे कितने लोग है जो इन पुण्यशाली अवसरों का लाभ उठा रहे है?

अक्सर प्रमाद के कारण हम इन अवसरों का लाभ भी नही उठाते और इन पुण्य के अवसरों को भी खो देते है। मुनि श्री ने कहा कि दुनियादारी की बातों में तो आपका मन जल्दी चला जाता हैऔर अच्छे कार्यों के लिये मन बनाना पड़ता है।और मन बन जाए तो उसको भी हम टाल देते है। उन्होंने कहा कि अपनी प्राथमिकताओं को बदलो अभी तो आपका मन धंधे में लगा हुआ है। मुनि श्री ने कहा कि “धंधा करो,अंधा धंधा मत करो और अंधाधुंध भी मत करो”उन्होंने एक कहानी सुनाते हुये कहा कि यह नर भव किसी पारसमणि से कम नहीं है इससे आप अपने जीवन को सोना भी बना सकते हो समय पर इसका उपयोग नहीं किया तो इस पारसमणि को खो भी सकते हो, अपने जीवन को सार्थक बनाने के लिये पुरुषार्थ और साधना के बल पर आगे बढ़ो, तथा कर्मशील बनकर चेतना का रुपांतरण करो अपने पुण्य का भरोसा मत करना पुण्य कब क्षींण हो जाये इसका कोई ठिकाना नहीं कब किसकी लुटिया डूब जाएगी,ठिकाना नहीं।

अवसर मिलना पुण्य का योग है,अवसर खोजना पुरुषार्थ है, अवसर खोना प्रमाद है,अवसर का लाभ उठाना साधना है। हमें ऐसा लक्ष्य बनाना चाहिये जिससे मानव जीवन सफल हो सके। उपरोक्त जानकारी देते हुये धर्म प्रभावना समिति के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी एवं महामंत्री हर्ष जैन ने बताया प्रातःकाल मुनि श्री प्रमाणसागर
महाराज मुनि श्री निर्वेगसागर महाराज मुनि श्री संधान सागर महाराज ससंघ का जब कालानी नगर में मंगल प्रवेश हुआ तो सभी लोग उत्साहित नजर आये कालानी के प्रवेश द्वार से ही श्रद्धालुओं ने बाजे गाजे के साथ मुनिसंघ की भव्य मंगल अगवानी की स्थान स्थान पर तोरण द्वार बनाये एवं रांगोली से चौक पूराकर पाद प्रक्षालन कर मंगल आरती की।एवं धर्म सभा आयोजित की गई जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

कार्यक्रम के शुभारंभ में धर्म प्रभावना समिति के अध्यक्ष अशोक रानी डोसी, सहित कालानी नगर के प्रमुखों ने आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के चित्र पर दीपप्रज्वलन किया
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
