आधुनिकता की अंधी दौड़ ने हमारे कुलाचार पर गहरा कुठाराघात किया है प्रमाण सागर महाराज

धर्म

आधुनिकता की अंधी दौड़ ने हमारे कुलाचार पर गहरा कुठाराघात किया है प्रमाण सागर महाराज
इंदौर
पश्चिमी सभ्यता” हमारे ऊपर हावी है उसने हमारी भाषा-भूषा- भोजन और भावनाओं को बदल कर रख दिया है, मात्र एक ढांचा ही शेष है जिसके अंदर का सारा सत्व खो गया है” उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के चतुर्थ दिवस वृषभ सागर महाराज के दीक्षा कल्याणक पर प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किये।

 

 

मुनि श्री ने कुलाचार, दुराचार, धर्माचार,सदाचार पर चर्चा करते हुये कहा कि आधुनिकता की अंधी दौड़ ने हमारे कुलाचार पर गहरा कुठाराघात किया है, आजकल आए दिन दुराचार की खबरे सामने आती है उसका मुख्य कारण है कुलाचार की उपेक्षा और आधुनिकता के नाम पर अपनी मौलिकता को खोना।

मुनि श्री ने कहा कि अभी पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव चल रहा है, धर्म का वातावरण है चारों ओर “केसरिया” नजर आ रहा है उसके बाद क्या होगा? मुनि श्री ने कहा अहिंसा के प्रति प्रतिबद्धता ही कुलाचार के प्रति-प्रतिबद्धता है।उन्होंने इंदौर शहर की एक पुरानी घटना सुनाते हुये कहा कि एक मां ने अपनी समस्त जमा पूंजी से बेटे को ट्रक दिलाया एक दिन मां जब ट्रक देखने को गई तो उसे वहा एक पर्ची मिली जिसमें बकरियाँ और भेड़ों को किसी कत्लखानों में छोड़कर आना लिखा था। मां ने जब उस पर्ची को देखा तो वह अंदर से हिल गई उसने बेटे से कहा कि बेटा यह क्या कर रहा है? बेटे ने मां को कहा कि हमारा काम तो इधर से उधर सामान पहुंचाने का होता है,और उसी से हमारी कमाई होती है, तो मां ने जबाव दिया बेटा हमें भूखे रहना पसंद है रुखी सूखी खाकर अपना पेट भर लेंगे लेकिन हिंसा की कमाई से कभी भी पेट भरना स्वीकार नहीं” और उन्होंने बेटा को आदेश दिया कि तू इस गाड़ी को ही बेच दे जब तक तू गाड़़ी नहीं बेचेगा तब तक मेरे अन्न जल का त्याग” धन्य है वो “मां” और धन्य है वह “बेटा” जिसके अंदर कुलाचार के प्रति इतनी प्रतिबद्धता है कि उसने मां के चरणों में अपना शीश रखते हुये क्षमा याचना की और तुरंत उस गाड़ी को बेच दिया।

मुनि श्री ने कहा कि घर परिवार में मां ही गुरु होती है, ऐसा वातावरण बनाओ कि आपको चिल्ला चोंट करना ही न पड़े और एक उच्च आदर्श प्रस्तुत हो,उन्होंने कहा यदि तुम्हारे अंदर धर्माचार्य होगा तो ही तुम सदाचार की प्रेरणा देकर प्रेरक बनोगे।

हम लोग बातें तो बहूत बड़ी बड़ी करते है,लेकिन आचरण में कमजोर नजर आते है,भूमी की उर्वरकता का पता फसल से ही लगता है ऐसे ही मनुष्य के कुल का पता उसके आचरण से लगता है। उन्होंने कहा आजकल अनुष्ठानों में भीड़ तो भारी भरकम नजर आती है लेकिन कुलाचार के मामले में सबके सब खोखले नजर आ रहे है, आजकल जो दुराचार बड़ रहा है उसका कारण है कुलाचार के पालन में कमी उन्होंने कहा “जो लोग अपने आपको धर्मी समझते है वह तो कम से कम अपने कुलाचार का पालन करें, जिससे धर्माचार खंडित न होवे।

उदाहरण देते हुये कहा कि कुछ लोग अपने आपको जैन नहीं बल्कि मार्डन जैन कहते है, उनके घर परिवार में जाकर देखो तो बाप बेटा दौनों एक साथ बैठकर शराब पी रहे है,यंहा तक कि अंडा आदि अभक्ष्य पदार्थों का सेवन चल रहा है क्या
ऐसे लोग जैन कहलाने के हकदार है? कुछ लोग पूरी तरह से दिखते तो धार्मिक है और अभक्ष्य भक्षण भी नहीं करते, पूजा पाठ करते शोध का भोजन करते है, लेकिन डंडी मारना, मिलावट करना, अमानत में खयानत करना, चोरी चमारी करना अनैतिक सम्बन्धों में संलग्न रहना क्या इनको आप सदाचारी कहोगे या दुराचारी?

 

मुनि श्री ने चेतावनी देते हुये कहा कि आधुनिकता के नाम पर अपनी मौलिकता को खंडित मत करो, कुलाचार अपनाओगे तभी आप धर्मी कहलाने के सच्चे हकदार कहलाओगे। इस अवसर पर मुनि श्री निर्वेगसागर महाराज, मुनि श्री संधान सागर महाराज सहित मुनि श्री निस्वार्थ सागर जी,मुनि श्री निसर्ग सागर जी महाराज दीक्षा कल्याणक के अवसर पर उपस्थित हुये।इस अवसर पर क्षु.श्री आदर सागर जी,क्षु.श्री समादर सागर जी क्षु.श्री चिद्रूप सागर जी,क्षु.श्री स्वरुप सागर जी,क्षु.श्री सुभग सागर जी महाराज मंचासीन थे।उपरोक्त जानकारी धर्म प्रभावना समिति के प्रवक्ता अविनाश जैन ने देते हुये बताया दौपहर में राजा नाभिराय का दरबार लगा युवराज आदिकुमार का राज्याभिषेक हुआ राज्य का संचालन तथा षट्कर्म,न्याय व्यवस्था को दर्शाया गया विभिन्न राजसी परिवेश में नवरत्नों एवं धर्मप्रभावना समिति के पदाधिकारयो ने राजदरबार में भेंट को दिया ब्राह्मी तथा सुंदरी के माध्यम से बेटियों को शिक्षा दे ने का मार्ग प्रशस्त किया वही नीलांजना नृत्य के माध्यम से वैराग्य को दर्शाते हुये छोटे भाई भरत तथा बाहुबली को राज्य सोंप दीक्षा लेकर वन की ओर प्रस्थान किया।पालकी उठाने के लिये देवताओं तथा मनुष्यों में होड़ लगी लेकिन अवसर मनुष्यों को मिला। प्रतिष्ठाचार्य अभय भैया और नितिन भैया के निर्देशन में सभी बाल ब्र. सारांश और रूपेश भैया के साथ उदासीन आश्रम के अनिल भैया, सुनील भैया, मुकेश भैया,विमल भैया सहित उदासीन आश्रम के भैयाजी को मिला तत्पशचात मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने प्रथम आदि तीर्थंकर प्रभु की दीक्षा विधी संपन्न की, मुनि आदि कुमार को पिच्छिका तथा कमंडल प्रदान किया गया। मुनि श्री निर्वेग सागर महाराज एवं मुनि श्री संधान सागर महाराज ने अपना सम्बोधन दिया।

प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया 6 दिसम्बर शुक्रवार को मुनि वृषभसागर महाराज की आहार विधि संपन्न होगी कल भगवान आदिनाथ का समवसरण लगेगा एवं केवलज्ञान संपन्न होगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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