इन्द्रध्वज महामण्डल विधान का भव्य संमापन ” पहला सुख निरोगी काया ” शाश्वत सागर जी महाराज

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इन्द्रध्वज महामण्डल विधान का भव्य संमापन ” पहला सुख निरोगी काया ” शाश्वत सागर जी महाराज

कोटा :
दिनाक : 15 नवम्बर अष्टानिका महापर्व व श्री इन्द्रध्वज महामण्डल विधान के आठवे दिन नसिया जी जैन मंदिर दादाबाड़ी कोटा में पूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के शिष्य चतुर्थ कालीन चर्या धारक मुनि श्री 108 शाश्वत सागर जी महाराज का आज पूर्णिमा के अवसर पर प्रवचन में कहा कि संसार में सभी जीव जो कार्य करते है सुखी रहने के लिए करते है चाहे त्यागी हो या रागी हो सभी इन्द्रिय सुख को चाहते है पहला सुख इन्द्रिय सुख है जो शरीर निरोगी रहने पर ही मिलेगा और शरीर निरोगी रखने के लिए शक्ति की आवश्यकता होती है शक्ति का स्त्रोत ब्रहम्चर्य है जब भी शरीर रोगी हो ब्रह्मचर्य व्रत ले लेना चाहिए कर्मों के कारण जीव जन्म

मरण के दुखों को भोग रहा है इन्द्रिय सुख पाप का ही कारण बनता है भगवान के समान बनना है तो इन्द्रियों के सुखों को त्यागना पड़ेगा, संयम ग्रहण करना पड़ेगा अल्प आरम्भ एवं कम परिग्रह रखने के कारण ये मनुष्य भव मिला है लेकिन वर्तमान में अधिक परिग्रह रख रहे हो तो ये परिग्रह नरक गति का कारण बनेगा आपको यदि नरक गति का बंध हो गया है तो आप को धर्म करने का भाव नहीं होगा संयम लेने का भाव नहीं होगा, जिस जीव को सम्यक दर्शन होगा वो जीव चारित्र की ओर ही जाएगा मुनि महाराज भी संसार में रहते है पर संसार से विरक्त रहते है संसार में रचते पचते नहीं है संसार में रहते है तो अपने कर्तव्य भी पालना आना जरूरी है पुत्र की पुत्रवत पालना एवं पुत्री को पुत्रीवत पालना आना चाहिए लेकिन वर्तमान में ऐसा देखने में नहीं आ रहा है स्त्री का जीवन पुण्यमय है यदि वो कुलाचार का पालन करते हुए अपनी सन्तानो के प्रति कर्तव्य का पालना करती है, महिलाए कतर्व्य का पालन करे तो संतान को परमात्मा तक बना सकती है देवी बनकर अपने पति को धर्म में लगाकर पुण्य कमा सकती है सुख हमेशा पुण्य से ही मिलेगा अतः पुण्य कमाओं
अध्यक्ष जम्बू जैन सर्राफ ने बताया कि कि इस अवसर पर शान्तिधारा महावीर सिद्धार्थ मित्तल परिवार राजेन्द्र ज हुकम काका परिवार, विवेक ठोरा परिवार सुशील ठग बेगलोर द्वारा की गई भक्तामर विधान शालिनी लव्यांश गर्ग के जन्म दिवस पर की गई।
निदेशक हुकम जैन काका ने बताया कि आज 108 इन्द्र-इंद्राणियों के द्वारा श्री इंद्रध्वज महामंडल, विधान में कुण्डल गिरी एवं रुचकवरगिरि के 8 जिनालयो संबंधी की पूजा के माध्यम से इंद्र परिवारों द्वारा 8 आकर्षक ध्वजाये जिन चैत्यालयों पर चढ़ाई गई
महाराज श्री के कर कमलों में अर्चना दुगेरिया द्वारा शास्त्र भेट किया गया।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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