दुःख के उन क्षणों में एक मात्र सहारा भगवान का ही होता है जो संकट की उस घड़ी में आपको सहन शक्ति प्रदान करता है।” प्रमाण सागर महाराज
इंदौर
संकटों का आना सहज स्वभाव है, लेकिन कष्ट और संकट की उस घड़ी में “भगवान” का नाम स्मरण आपके संकट को टालेगा। दुःख के उन क्षणों में “भक्तामर स्त्रोत्र” को कंठस्थ करना चाहिये, दुःख के उन क्षणों में एक मात्र सहारा भगवान का ही होता है जो संकट की उस घड़ी में आपको सहन शक्ति प्रदान करता है।”
उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने मोहताभवन रैसकोर्स रोड़ पर व्यक्त किये।मुनि श्री ने कहा कि आचार्य मानतुंग भगवान की भक्ती में लीन है और कह रहे है रक्तेक्षणं,समद-कोकिल-कण्ठ-नीलम् क्रोधोद्धतं फणिन-मुत्फन-मापतन्तम्
अक्रमति क्रम-युगेण पितृ-शंख-
त्वन्नम-नागदमनी हृदय यस्य पुंस:”







मुनि श्री ने कहा भगवान आपके नाम स्मरण से भयंकर काले काले नाग भी अपने फन को समेट कर रास्ता प्रदान कर देते है।उन्होंने कहा कि सांप भी संगी पंचेन्द्रिय जीव है वह भी आपके हावभाव को समझता है, यदि आप उन पर हमला नहीं करोगे वह भी आप पर कभी हमला नहीं करेंगे, मुनि श्री ने अपने जीवन सत्य घटना सुनाते हुये कहा कि एक स्थान पर प्रातःकाल में खेत की पगडंडी से होकर शौच को जा रहा था देखा रास्ते में पांच फुट का काला सांप फन फैलाए क्रोधित मुद्रा में बैठा है लगभग 7-8 फिट की दूरी थी हमने उसको देखा उसने हमको देखा तब मेरे स्मरण में भक्तामर का यही श्लोक आया श्लोक पूरा हो उसके पहले ही सांप ने अपना फन समेंटा और एक तरफ निकल हमें रास्ता प्रदान कर दिया मुनि श्री ने कहा कि आपके अच्छे भावों को वह जीव भी समझते है कितना भी खतरनाक से खतरनाक प्राणी हों अपने विवेक को जाग्रत रखिये यदि उनकी जान का खतरा न हो तो वह कभी हमला नहीं करते।
ऐसे कही उदाहरण सामने आए है।दूसरी घटना उदयपुर राजस्थान के चातुर्मास की सुनाते हुये कहा शौच का जो स्थान था वहा दो दिन लगातार विराटसागर महाराज को काला नाग दिखा महाराज ने उससे अपनी ही भाषा में कहा कि है नागराज हमे यहा चौमासे में रोज रोज आना है,आपको भी कष्ट न हो और हमें भी कष्ट न हो आप अपना स्थान बदल लो… इतना कहना था कि वह सांप फिर पूरे चार माह तक हम लोगों को दिखाई नहीं दिया। मुनि श्री ने कहा कि सांप क्रोध लोभ और आसक्ती का प्रतीक है, भगवान को अपने हृदय में बसा लोगे तो आपके अंदर से क्रोध लोभ और आसक्ती घट जाएगी। उन्होंने कहा कि धन की आसक्ती के साथ यदि मरण होता है तो वह जीव सर्प की योनी में ही जन्म लेता है इसलिये धन के प्रति आसक्ती और लोभ कभी नहीं करना चाहिये कहते भी तो है कि वह तो नाक फुला कर बैठा है। उन्होंने भक्तामर की महिमा बताते हुये कहा कि जहा भगवान का साथ होता है वहा युद्ध में बलशाली राजा भी परास्त हो जाते है। महाभारत का उदाहरण आपके सामने है। कौरवों के साथ 11 अक्षुणी सेना थी तो वही दूसरी और पांडवों के पास श्री कृष्ण थे अर्थात पुण्य के प्रभाव और पराक्रम से वह 11अक्षुणी सेना हार गयी और पाडवों की जीत हुई थी मुनि श्री ने कहा कि जिसके हृदय में भगवान विराजमान हो जाते है उसके अंदर के विकार स्वतःनष्ट हो जाते है।
मुनि श्री ने कहा कि पहले के जमाने में देश विदेश में जाने के लिये बड़ेबड़े जलयान से लोग यात्रा करते थे और यात्रा करते समय भगवान का नाम लेकर ही जाते थे आजकल भी आप लोग जब भी घर से यात्रा पर निकलो तो भगवान का नाम जाप के साथ ही निकलना चाहिए तथा यात्रा के दौरान चारों प्रकार के आहार का त्याग रखना चाहिये।इससे यदि कभी संकट आ जाए तो आप दुर्घटना से बच जाएगे और यदि कभी दुर्घटना हो भी गयी तो दुर्गति से तो बच ही जाओगे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
