सुख तुम्हारे भीतर भरा है उसका संधान करे पूर्णमति माताजी
ग्वालियर
परमपूजनीय आर्यिका 105 पूर्णमति माताजी ने अपने मंगल प्रवचन में सुख दुख को मानव की कल्पना मात्र बताते हुए कहा कि सुख दुख मानव मन की कल्पना मात्र है,
यह हमारी ही भीतर की चेतना का परिणाम है, उन्होंने कहा कि सुख तो हमारे भीतर भरा है, उसका संधान करे, क्यों उसे बाहर
खोजते हो, स्वयं के भीतर ही सुख को तलाशे। जरा सी स्वार्थ लिप्सा के चलते अपने दुख के लिए दूसरों को दोषी मानने लगते हो।
उन्होंने जोर देते हुए कहा की यहां तक की भगवान और गुरु को

भी अपनी चपेट में ले लेते हैं। पूज्य माताजी ने मंगल प्रवचन देते हुए शनिवार को साक्षी एनक्लेव यह बात कही।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
