अत्यंत चमत्कारिक अतिशय युक्त है ऋषभनगर अतिशय क्षेत्र मरसलगंज रामगंजमंडी भक्त गण दर्शन कर गदगद

धर्म

अत्यंत चमत्कारिक अतिशय युक्त है ऋषभनगर अतिशय क्षेत्र मरसलगंज रामगंजमंडी भक्त गण दर्शन कर गदगद
हम एक पावन क्षेत्र का वर्णन कर रहे है जिसकी दिव्यता रमणीक है और अतिशय क्षेत्र है ऐसा पावन क्षेत्र है जोई उत्तरप्रदेश के फिरोजाबाद जनपद मे है ऐसा पावन क्षेत्र है ऋषभनगर जो मरसलगंज मे है जिसके दर्शन कर रामगंजमंडी नगर के रमेश विनायका ललिता विनायका सुलोचना लुहाडिया अभिषेक लुहाडिया काफी गदगद हुए एवम ऊर्जा से भर गए

 

 

इस क्षेत्र के विषय मे यदि हम जाने |
ईसा क पन्द्रहवी सदी में दक्षिण दिशा वासी गौड प्रिय वर्ण इस भूमि पर शुभागमन हुआ। यह बाबाजी मात्र एक चद्दर व लंगोटी की परिग्रहके धारक थे। यहाँ की उत्तम मनोहारी भूमि को देखकर बाबाजी ने एकमन्दिर बनवाने का विचार लोगों के सामने रखा। उस समय मरसलगंज धन-धान्य से परिपूर्ण था। साथ ही व्यापार का केन्द्र भी था एवं जैनबन्धुओं के अनेकों घर थे जब मन्दिर बनवाना प्रारम्भ हुआ तो उस समय कोई चुगलखोर राजा के पास गया और बोला कि राजन! कोई जैन महात्मा मरसलगंज की जमीन अपने कब्जे में कर रहे हैं। जैसे ही राजा ने सुना, आग बबूला हो गया और अपने मंत्रियों को तुरन्त आदेश दिया कि लाग तुरन्त बन्द करवा दी जाये। मंत्रियों ने ऐसा ही किया आखिर काम बन्द हो गया।

लोग चिन्तित हुये बाबाजी ने कहा चिन्ता मत करो सब काम

होगा। जब रात्रि में राजा अपने किले में लेटा हुआ था उससमय उसे ऐसा प्रतीत हुआ कि मेरा पूरा किला घूम रहा है और मुझे कोईपीट रहा है मगर दिखाई नहीं दे रहा है। वह परेशान हो गया तो मंत्रियों नेकहा कि राजा साहब! कल जो आपने मरसलगंज के बाबा का कामबन्द करवा दिया था इसीलिये तो यह बाधा उत्पन्न नहीं हुई है। राजा कीसमझ में आ गई और वह नंगे पैर दण्डवत करता हुआ बाबाजी के पास मरसलगंज में आया और बाबाजी से क्षमा मांगी और अपने मंत्रियों कोआदेश दिया कि जितना रुपया लगे सब राज खजाने से आये औरमन्दिर बनना चाहिये। बाबाजी ने मन्दिर बनवाने के लिये चन्दा इकट्ठानहीं किया। कहा जाता है कि जब शाम को लेबर एवं अन्य सामान के लिये जितने रुपयों की आवश्यकता होती थी वह बाबाजी अपनी चटाई के नीचे से दे देते थे यह देखकर लोग आश्चर्य करते कि जितने रुपयोंकी जरूरत है उतने रुपया ही निकलते हैं। इस प्रकार बाबजी ने एकविशाल शिखरयुक्त जिनालय का निर्माण कराया और कहीं दूर देश सेलाकर एक मूर्ति श्री 1008 देवाधिदेव ऋषभदेव की पद्मासन प्रतिमाको मन्दिरजी में विराजमान किया।

चमत्कारिक कुआ
यह महा मनोहर मूर्ति 1 हजार वर्षतथा उससे पहले की प्रतिष्ठित है। मन्दिर की प्रतिष्ठा स्वयं बाबाजी नेकराई। बताया जाता है कि इस मेले में इतनी भीड़ हुई थी कि कुएं कापानी खत्म हो गया। लोग हाहाकार करने लगे। तब बाबाजी ने कुछकंकड़ पढ़कर कुंए में डाले तो फिर कुंए का पानी इतना हो गया किआज तक खत्म नहीं हुआ है और ज्यौनार (दावत) के समय जब आटा खत्म हो गया तो बाबाजी ने कहा बोरियाँ मत झाड़ो और एक चद्दरढकवा दी कि इसके नीचे से जितने आटे की आवश्यकता हो उतनी लेलो और खर्च करो। जब घी खत्म हो गया तो कुएं के पानी से ही घी कापूरा काम चलाया गया था। बाबाजी का तपोबल, चरित्र बल, विद्या विशिष्ट था कि आसपास का जैन अजैन समाज उनसे बहुत प्रभावित था। लोगबाबा ऋषभदास और भगवान ऋषभनाथ के अनन्य भक्त बन गए थे से दूर दूर से यात्री आते और उनकी शुद्ध ह्रदय से की गई कामनाओं की पूर्ति होती

तभी से यह क्षेत्र दिगम्बर जैनअतिशय तीर्थ क्षेत्र मरसलगंज के नाम से प्रसिद्ध हो गया। फिर वि.संवत 2001 में यहाँ पर विशाल पंचकल्याणक प्रतिष्ठान हुई जिसमे दो नई वेदियाँ बनी जिसमें बाई और 1008 भगवान शान्तिनाथजी की तथादाई और 1008 भगवान शान्तिनाथजी की तथा दांई और 1008भगवान नेमिनाथ जी की पद्मासन प्रतिमा विराजमान की गयीं और मेला भूमि की सीमाओं पर पांच विशाल गेट द्वार बनाए गए ऋषभ प्रवेश द्वार, श्री दौलत प्रवेश द्वार श्री मानिक प्रवेश द्वार, श्री अभय प्रवेश द्वार,श्री विजय प्रवेश द्वार एवम मेला भूमि के बीच मे अहिंसा स्तभ कलात्मक एवम सुदीर्घ बने हुए है यहाँ पर वि.संवत

 

2020माघ शुक्ला 5 बसन्त पंचमी को विशाल पंच कल्याणक प्रतिष्ठा हुई बाहर नये मन्दिरजी में भगवान आदिनाथ जी की नौ फुट ऊँची एववर्ण विशालकाय पद्मासन प्रतिमाजी जो कि सेठ चाँदमल पाण्डयागोहाटी (आसाम) वालों ने प्रतिष्ठित कराई इसमें भारत भर से श्रेष्ठी वर्गएवं पण्डित वर्ग पधारे थे तथा प्रतिमाजी को शूरमन्त्र सन्मार्ग दिवाकरआचार्य 108 विमलसागर जी ने दिया। मकराना पत्थर से निर्मित ऐसीप्रतिमाजी अन्यत्र नहीं है। भगवान शान्तिनाथ के दायें बायें श्री पदम(रामचन्द्रजी) श्री शैल (हनुमानजी) की 6 फुट खड़गासन प्रतिमायें तथानेमिनाथ की वेदी के दायें बायें भगवान बाहुवली स्वामी तथा धरणेन्द्रपद्मावती सहित पार्श्वनाथ की 4 फुट ऊँची खड़गासन प्रतिमायेंप्रतिष्ठित हुई भीतर वाले मन्दिरजी के भूभाग में बाबा ऋषभदास जीकी ध्यान गुफा है जिसमें बाबाजी की चरण पादुका हैं। जहाँ प्रत्येकव्यक्ति महान शान्ति का अनुभव करता है। भक्तों का मानना है किआज भी भगवान आदिनाथ के समक्ष की गई कामनाओं की पूर्ति होतीहै तथा बाबा ऋषभदास की चरण रज के लगाने से प्रेत बाधायें दूर होतीहैं सन् 1957 में चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शान्तिसागर जी महाराज(दक्षिण) की स्मृति में यहाँ शिखर युक्त स्मारक, सुन्दर तालाब, बगीचीआदि बनाई गई थी। जो दर्शनीय है। आचार्य शान्तिसागर जी महाराजदक्षिण), अठ्ठारह भाषा भाषी आचार्य महावीरकीर्ति जी महाराज,सन्मार्ग दिवाकर आचार्य विमलसागर जी महाराज, आचार्य।कल्याणसागर जी महाराज, आर्यिका रत्न विशुद्धमती माताजी,बालयोगी योगीन्द्रसागर जी महाराज, आर्यिका रत्न विजयमतीमाताजी, आचार्य सन्मतिसागरजी महाराज एवं अन्य साधू ससंघ इसक्षेत्र पर पधार चुके हैं और इस शान्ति निराकुल क्षेत्र को देखकर बहुतप्रभावित हुये हैं। इन साधु सन्तों ने इस तीर्थ को महान चमत्कारी एवं त्यागियों के ध्यान करने योग्य बताया है। क्षेत्र पर जीर्णोद्धार का काम बराबर चलता रहता है

विशेष चमत्कार
जून 97 में परमपूज्य मुनि श्री सौभाग्यसागर जी महाराज को यहीं बाबाजी की ध्यान गुफा में किचमत्कार हुआ है। उनका कहना था कि इस क्षेत्र पर जो व्यक्ति मंगलवार दर्शन करता है, तो उसे मनवांछित फल की प्राप्ति होती है इसी के साथश्री दिगम्बर जैन नवग्रह एवं विदेह क्षेत्र में विद्यमानतीर्थंकर के भव्य मन्दिर का निर्माण, अतिशय क्षेत्र की चारों दिशाओं की 200 किमी. की परिधि में ऐसा कोई मन्दिर नहीं है जिसकेस्थान पर ही खड़े होकर नौ वेदियों में चौबीस तीर्थंकर एवं विधमान तीर्थंकर के दर्शन एक साथ हो सकें। साथ ही चौबीस तीर्थंकर एवम नवगृह के नो भगवान के दर्शन उनके वास्तिवक रंग में होते हैं
संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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