राजा की तरह जिन्दगी जीने के लिए..गुलाम की तरह मेहनत करनी पड़ती है..!* अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज

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राजा की तरह जिन्दगी जीने के लिए..गुलाम की तरह मेहनत करनी पड़ती है..!* अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज

कुलचाराम हैदराबाद
अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा की राजा की तरह जिन्दगी जीने के लिए.गुलाम की तरह मेहनत करनी पड़ती है..!

 

एक युवक से पूछा –?* सवेरा कब होता है –? *उसने हँसते हुये कहा* – रोज 8 बजे और रविवार को 11 के बाद। हमने कहा* – मैं समझा नहीं? युवक ने कहा* – रविवार को छुट्टी रहती है तो 11 के बाद सो कर उठता हूँ। और बाकी के दिनों काम पर जाता हूँ तो 8 बजे उठता हूँ।

उसका कहना था मैं जब उठता हूँ तब सुबह होती है। हमने कहा ठीक है – जब जागो तब सवेरा।

 

दरअसल रात कभी होती ही नहीं है। और अगर होती है, तो हमारी वजह से ही होती है।*रात तभी तक है, जब तक की आँखें बंद है। एक व्यक्ति दिन के 12:00 बजे भी सो रहा है। उसके लिए वह दिन भी रात जैसा है। और दूसरा व्यक्ति जो नाइट ड्यूटी पर है, रात्रि जागरण कर पहरा दे रहा है, उसके लिए वह रात भी प्रभात जैसी है।

 

महाराज श्री ने कहा भगवान महावीर ने दिन के 12:00 बजे गृह त्याग किया, तो महात्मा बुद्ध ने रात्रि के 12:00 बजे घर छोड़कर सन्यास लिया। बुद्ध के लिए रात्रि के 12:00 बजे, दिन के 12:00 बजे जैसे बन गए। सुबह हर पल है। जिस किसी ने भी जब आँखें खोली, तो पाया कि सुबह हो गई है। रात है, इसलिए हम सो रहे हैं। ऐसा नहीं है। हम सो रहे हैं, इसलिए रात है।

इसका आशय है रात ओर प्रभात दोनों हमारी वजह से है। जागरण और मरण का कोई मुहूर्त नहीं होता है। जब जागे तभी सवेरा,, जब सोए तभी अंधेरा…!!!। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमंडी 9929747312

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