त्याग, तप के द्वारा ही जीवन महान बनता है। आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज 26 तपस्वी की हो रही है 10 उपवास की तप आराधना
झालरापाटन।
तपोभूमि प्रणेता व पर्यावरण संरक्षक आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज ने कहा कि त्याग, तप के द्वारा ही जीवन महान बनता है। शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में शनिवार शाम को 10 लक्षण पर्व के तहत उपवास कर रहे 26 तपस्वीयों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सोने को तपाने से जेवर बनते हैं उसी प्रकार तप करने से आत्मा का कल्याण होता है।
बिना तप त्याग के लौकिक क्षेत्र में भी सफलता नहीं मिलती। जब लौकिक क्षेत्र में तप, त्याग का उतना महत्व है तो फिर मोक्ष मार्ग में बिना तप, त्याग के कैसे सफलता मिलेगी। इसलिए आज जीवन में यथाशक्ति तप, त्याग की साधना अवश्य करनी







चाहिए। उन्होंने कहा कि जिनके जीवन में तप, ज्ञान, विद्या और संयम नहीं है उसका जीवन पशु के समान है। हमारे जीवन में संस्कारों का बहुत महत्व है। जैसे हमारे संस्कार होते हैं वैसे ही हमारा जीवन बनता है। उन्होंने कहा कि संगति अच्छी करो तो गुण आते हैं और संगति गलत करो तो जीवन बिगड़ जाता है। इसलिए अपने जीवन मेंअच्छे लोगों की संगति करना चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने 10 लक्षण पर्व के दौरान 10 उपवास कर रही 26 तपस्विनियों व 16 उपवास कर रही तपस्विनी श्वेता कासलीवाल को जल पिलाया। कार्यक्रम का संचालन यशोवर्धन बाकलीवाल ने किया।
नलिन जैन लुहाड़िया से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
