स्वस्ति भूषण माताजी के सानिध्य में वयोवृद्ध लेखक प्रकाशक श्री राजेंद्र जैन हुए सम्मानित
स्वस्तिधाम जहाजपुर
भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माताजी के सानिध्य में जैन तीर्थ वंदना एवं दर्शनीय स्थल पॉकेट बुक एवं जैन संतों पर आधारित पुस्तक के लेखक श्री राजेंद्र जैन कोटा का स्वस्ति धाम जहाजपुर में सम्मानित किया गया उन्हें यह सम्मान उनकी सेवा निष्ठा उनके लेखन के लिए जो समाज के लिए अनुकरणीय कार्य किए हैं उसके लिए उन्हें सम्मान दिया गया।
इस बेला में क्षेत्र कमेटी के साथ श्रीमान राजेंद्र कुमार महावीर सनावद, राजमल पाटोदी कोटा , अनिल जैन ठोरा कोटा, शीतल प्रसाद जैन दिल्ली एवं विमल खटोड़ उपस्थित रहे।
श्री जैन के कार्य पर यदि नजर डाली जाए तो उन्होंने जैन समाज के लिए बहुत ही उपयोगी पुस्तक लिखी है।जो आज सभी के लिए उपयोगी साबित हो रही है। उन्हें माला पहनाकर उन्हें अभिनंदन पत्र प्रदान किया गया। अभिनंदन पत्र का वाचन वरिष्ठ पत्रकार श्रीमान राजेंद्र कुमार जैन सनावद ने किया। अभिनंदन पत्र वाचन करते हुए हुए श्री राजेंद्र जैन महावीर ने कहा ।।चिकित्सक के रूप में श्रेष्ठ विशेषज्ञ की सेवाएं प्रदान करने वाले,देशाटन प्रेम के कारण संपूर्ण देश-विदेश में भ्रमण करने वाले,कोटा जैन समाज के रत्न, जैन तीर्थ वंदना एवं दर्शनीय स्थल के लेखक-संपादकतीर्थ वंदनाडॉ. आर. के. जैन सा.के कर कमलों में सादर समर्पित

वंदनीय अभिनंदन-पत्र
समाज श्रेष्ठी श्री हजारीलालजी चंद्रवती जैन के घर आंगन में 08 अगस्त 1943 को जन्में डॉ. आर. के. जैन कोटा नगर की प्रेरणादायी शख्सियत के रूप में पहचान रखते है।8 अगस्त
1943 को जन्में आपको सामाजिक-धार्मिक परोपकारिता के संस्कार परिवार से परंपरागत रूप से प्राप्त हुए अनेक गुणों के धनी डॉ. आर. के. जैन साहब को हमअनेक गुणों के पुंज के रूप में जानते है।है समाजसेवी चिकित्सक33 वर्षों तक राजस्थान राजकीय सेवा (1969 से 2001) में रहे डॉक्टर साहब ने सेवा के अनेक प्रतिमान स्थापित किये। सामाजिक सेवाओं में बाधा देखते हुए आपने वीआरएस लिया और बधेरवाल जैन समाज कोटा के अध्यक्ष सहित अनेक संस्थाओं को समुन्नत बनाने का कार्य किया। देशभर की अनेक संस्थाओं में आपके कार्यों को यश प्रदान करते हुए सम्मानित किया है। विगत 45 वर्षों से समाज को अपनी निशुल्क चिकित्सीय सेवाएं प्रदान कर रहे वरिष्ठ
समाजसेवी का अभिनंदन कर हम सब गौरव काअनुभव करते हैं।हे कुशल लेखनी के धनीदेशाटन व तीर्थाटन आपके जीवन में प्रमुख शौक रहे, आपने इन शौक को अपने तक सीमित नहीं




रखा, आपने यात्रा के अनुभवों, वहां की परेशानियों, उपलब्धियों कोसकारात्मक अमलीजामा पहनाया, आपने अपने अनुभव का खजाना खोला जिससे जैन तीर्थ वंदना एवं दर्शनीय स्थल रूपी रत्न निकला जो 2012 में प्रकाशित हुआ औरजैन जगत के जन-जन के लिए बोलती गाईड बन गया। 2024 तक सप्तम संस्करण प्रकाशित होकर 25 हजार परिवारों में यह पुस्तक पहुंच चुकी है जो इसकी लोकप्रियताकी परिचायक है।
डॉ. आर. के. जैन साहब ने तीर्थयात्रा करने वाले यात्रियों के लिए ऐसी टेबलेट बनाई है जो साथ हो तो यात्रा के दौरान साइड इफैक्ट (यात्रा की परेशानियां) नहीं होती है।आपने जैन दिगम्बराचार्य प्रेरक संत एवं सद्विचार भी प्रकाशित की।
दिगम्बरत्व के प्रति समर्पित 1625 संत, 113 आचार्य की जानकारी उनके परिचय प्रदान कर आपनेमहत्वपूर्ण शोध पुस्तक का लेखन कर समाज के समक्ष एक अद्भुत जानकारी प्रस्तुत की है। आपकी पुस्तकें समाजोपयोगी होकर लोक कल्याण की भावना से लिखी गई है.जो आपकी मानवीय चेतना के प्रति संवेदनशीलता को प्रदर्शित करती है। हम आपके कुशल लेखकीय कौशल को नमन करते हुए कामना करते है कि आप लेखकीय कौशलका टॉनिक समाज को पिलाते रहे।

हे संवेदनशील व्यक्तित्व आपने मनुष्य के शरीर रचना विज्ञान को भली भांति समझकर इस मनुष्य देह को समझा है। आपने एमबीबीएस, डीटीसीडी की उपाधि प्राप्त कर शारीरिक व्याधियों से ग्रस्त मानव समाज को व्याधि मुक्त किया है। आप वर्तमान में अपने जीवन के उत्तरार्ध में निरंतर सजग व सक्रिय है। विद्वानों का स्वागत, सम्मान, मुनिराजों के प्रति भक्तिआपको हर जगह उपस्थित कराती रहती है। इन सब कार्यों में आपकी सहधर्मिणी सौभाग्यशाली श्रीमती शबनम जैन का सहयोग, समर्पण, सेवा भावना आपकोनिरंतर गति प्रदान करती है। आपकी उदात्त भावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए आपको तीर्थ सेवा भक्त की उपाधि से सम्मानित कर गौरव का अनुभव करते है। दसलक्षण धर्म महापर्व 2024 की पूर्व बेला में सैकड़ों प्रशिक्षणार्थियों की पावन उपस्थिति में संकट मोचक 1008 श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान के अतिशय से आच्छादित पावन तीर्थ स्वस्तिधाम की पावन प्रेरिका गणिनी आर्यिका रत्न 105 स्वस्ति भूषण माताजी ससंघ केआशीर्वाद रूपी पावन सान्निध्य में यह वंदनीय अभिनंदन पत्र भेंट कर गौरव का अनुभव करते है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
