शंका का कोई इलाज नहीं,चरित्र का कोई प्रमाण नहीं..मौन से अच्छा साधन नहीं,और शब्द से तीखा कोई बाण नहीं..!अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज
कुलचारम हैदराबाद
अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा की हशंका का कोई इलाज नहीं,चरित्र का कोई प्रमाण नहीं..मौन से अच्छा साधन नहीं,और शब्द से तीखा कोई बाण नहीं..!
उन्होंने कहा जो आदमी मंदिर में पूजा पाठ करता है और दुकान में धोखाधड़ी करता है, वह धर्मात्मा नहीं हो सकता। इंसानियत का सबसे बड़ा मंदिर तो मानव सेवा है।

काव्य रचना के द्वारा कहा की किसी को गिराकर नहीं, उठा कर जियो। किसी को झुका कर नहीं, स्वयं झुक कर जियो। किसी को दबाकर नहीं, औरों की दवा बनकर जियो।
मैं तो लोगों से यहाँ तक कहता हूँ कि अपने घर में एक ऐसा पेड़ जरूर लगाओ, जिसकी छाया और जिसकी सुगंध पड़ोसी के घर जाती हो।अपने घर के आंगन की दीवार को इतनी ऊंची मत बनाओ कि रास्ते से गुजरता हुआ आदमी ही दिखाई ना पड़े। अपना ही कोई दिखाई ना पड़े।छोटा है इंसान, वही दीवारें सम्बन्धों की हत्यारी है…!!!।
नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
