पुण्यहीन को गले लगा ले वो महाभाग्यशाली पुण्यवान होता है : निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज

धर्म

पुण्यहीन को गले लगा ले वो महाभाग्यशाली पुण्यवान होता है : निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज
सागर
भाग्योदय तीर्थ पर अपने मंगल प्रवचन देते हुए निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव 108 श्री सुधा सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन देते हुए कहा किऊँचा उठने के लिए ऊँचा देखना जरूरी नहीं है, ऊँचा उठने के लिए नीचे देखना जरूरी है। जो ऊँचे उठना चाहते हैं वह जितना नीचे देखकर चलेंगे, उतना ही ऊँचाइयों पर पहुँचने की गुंजाइश रहेगी। उन्होंने कहा नीच बनना नही है, नीचे देखना है। कीड़े मकोड़े बनना नहीं है, कीड़े मकोड़े को देखना है। महावीर के दर्शन से ज्यादा महत्वपूर्ण है तुच्छ, निकृष्ट जीवों को देखना। सर्वश्रेष्ट बनने के लिए यदि हम सर्वश्रेष्ठ को देखेंगे तो मात्र भक्त बन पायेंगे और सर्वश्रेष्ट बनने के लिए हम नीचे पुण्यहीन तुच्छ जीवों को देखेंगे तो भगवान बन जायेंगे।

 

जैनकुल में जन्म लेने वाला जिंदगी में हजारों बार अपने आप को भाग्यशाली मानता है, मैं कितना भाग्यशाली हूं कि मेरा जन्म भारत में हुआ, मनुष्य बना, उसमे भी जैन बना, ऐसे माता-पिता मिले, अच्छा कुल, आचार्य श्री जैसे गुरु मिले यह सब भाग्यशालियों की लिस्ट पड़ी है। इससे बड़ा भाग्यशाली कौन है वो व्यक्ति अपने को पुण्यवान माने और किसी नीच को पुण्यवान बनाने का भाव जाग जाए, वो उससे बड़ा भाग्यशाली है। सबसे बड़ा भाग्यशाली है कि पुण्यहीन को ठोंकर दुनिया मारती है, पुण्यहीन से घृणा दुनिया करती है, पुण्यहीन को गले लगा ले वो महाभाग्यशाली पुण्यवान होता है।

सारी दुनिया ने भक्ति का अंतिम लक्ष्य बनाया कि मुझे भगवान की, गुरु की सेवा करने का मौका मिलना चाहिए, बस इससे आगे कुछ नही। बस जैनदर्शन कहता है कि- नहीं, मुझे आप जैसा बनने का मौका मिलना चाहिए। महावीर स्वामी का विश्व में मात्र एक दर्शन है, जिस पद पर महावीर स्वामी बैठे हैं, जो व्यक्ति उनके पद का दावेदार है, वही महावीर की पार्टी का व्यक्ति है।

आजादी के बाद भारत में राजतंत्र नहीं प्रजातंत्र चाहा और प्रजातंत्र का मूल संस्थापक है जैनधर्म, किसी भी दर्शनकार में नहीं था कि प्रजातंत्र भी कोई चीज होती है, हर व्यक्ति एक ही बात कहता है राजतंत्र एक ही शक्ति है जो सर्वदृष्टा है, सर्वकर्ता है। विनाश करेगा तो वही विकास करेगा तो वही। हमारे भारत में दो जहरीले हवाएं चलती हैं- हमारे हाथ में कुछ नहीं है, हम मात्र उस शक्ति की कठपुतली है, वह जैसा नचाएगा तो हम नाचेंगे। जब सब उसी की मर्जी से होता है यह गलत कार्य किसकी मर्जी से होते है। यह कल्पना ना जाने किसने की है? भगवान की मर्जी कभी गलत नहीं होती, भगवान की कोई मर्जी होती ही नहीं है।

कौन कहता है कि जैन धर्म ऊंची जाति का या जाति विशेष का धर्म है, अनुष्ठान के लिए जाति विशेष चाहिए, अनुष्ठान के लिए आचरण उच्च चाहिए। कुल, जाति ये सब अनुष्ठान के लिए है। धर्म और धर्म के अनुष्ठानों में बहुत अंतर है, अनुष्ठान शुद्धि पूर्वक किया जाता है, अनुष्ठान में कुल और जाति, बल्दीयत देखी जाती है और धर्म में कोई बल्दीयत नहीं देखी जाती, चांडाल भी धर्मात्मा बन सकता है लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि वह अभिषेक कर सकता है, अभिषेक उच्च कुलीन, जन्म जन्म के पुण्यात्माओं का अनुष्ठान है। विकृत कुल वाला धर्म करने का अधिकारी है लेकिन विकृत कुल वाला आहार देने का अधिकारी नहीं है, ये अनुष्ठान है। वह भगवान की मूर्ति नहीं बिठाल सकता लेकिन भक्ति कर सकता है।

 

 

 

जब साक्षात तीर्थंकर का जन्म सकुल में होता है तो ये मूर्ति नही है, यह मंदिर में भी साक्षात भगवान है, जिनका जन्म दुष्कुल में नही, विकृत कुल में नहीं। ये मूर्ति विकृत कुल वाले नही बैठालेगे। भगवान बनना अलग चीज है और भगवान को नमस्कार करना अलग चीज है। नमस्कार करने वाले में रक्त का संबंध हो ऐसा कोई नियम नहीं है लेकिन भगवान बनने के लिए वंश का संबंध आता है।

विकृत और दुष्कल वाले धार्मिक दृष्टि से दो कार्य नहीं करना- तुम्हें दान देना है खूब दान दीजिए, भगवान की भक्ति कीजिए लेकिन भगवान का अभिषेक नहीं करना। भक्ति से कल्याण है और अभिषेक भक्ति नही, उच्चकुलीन भक्तों का अनुष्ठान है, दूसरा पंचकल्याणक के मुख्यपात्र नहीं बनना, कभी मूर्ति मत बैठालना, मूर्ति का दर्शन करना।

आहार देने के लिए मना किया है, संत शाला बना दो न आप। ये पाँच चीजें यदि तुमने बंदिश कर ली तो तुम्हे इतना पुण्य लगेगा कि जन्म जन्म तक तुम्हें कभी विकृत कुल और दुष्कुल में जन्म नहीं मिलेगा। बेटे का बाप एक होता है तो भगवान की मूर्ति का दातार भी एक होना चाहिए, एक वंश होना चाहिए!

 

यह रहे मोजूद
पूज्य गुरुदेव के मंगल प्रवचन मेंशांत जैन सनौधा. अंकुश जैन बहेरिया. मनीष जैन बरकोटी. राहुल जैन तौलिया. शुभम जैन
मीडिया के कार्यभार को प्रमुख रूप से: साहिल जैन डबडेरा,कपिल जैन लम्बरदार,विवेक जैन मिक्की, स्वपनिल जैन आदि ने सक्रियता के साथ संपन्न किया।
अजय जैन लांबरदार से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *