भक्ति पूर्वक हुआ “गणधर वलय विधान” एवं भक्तामर दीप अर्चना

धर्म

भक्ति पूर्वक हुआ “गणधर वलय विधान” एवं भक्तामर दीप अर्चना
एटा
पुरानी बस्ती स्थित श्री दिगंबर जैन बड़े मंदिर जी में 9 अगस्त शुक्रवार को प्रातः गणधर वलय विधान का आयोजन श्रीमती आशा जैन मौसम अंजलि जैन, अंकित जैन शुभि जैन ,एवं दिशा जैन पुण्यार्जक परिवार द्वारा किया गया, चित्र अनावरण श्री मौसम अंकित जैन सरस्वती ज्वैलर्स एवं दीप प्रज्वलन ,सुधाकर जैन, अमित जैन, शैली जैन, नरेंद्र जैन एवं गजेंद्र जैन ने किया माता जी का पाद प्रक्षालन श्री विशुद्ध भक्त परिवार द्वारा किया गया, शास्त्र भेंट श्री नरेंद्र जिरसमी, योगेश जैन ने किया गया!

 

 

शांति धारा नित्य नियम पूजन नव देवता पूजन के पश्चात गणधर वलय विधान के दौरान सर्वाधिक दीक्षाप्रदात्री सम्यकज्ञान शिरोमणि गणिनी आर्यिका 105 श्री विशुद्धमति माताजी ने श्रावकों को मंगल उद्बोधन के माध्यम से बताया की गणधर वलय विधान में 1452 गणधर परमेष्ठी की आराधना की गई है जो संसारी भव्य आत्मा तीर्थंकर प्रभु के पाद मूल में जैनेश्वरी दीक्षा को अंगीकार करता है उनका शिष्यत्व स्वीकार करता है, उसके उपरांत वह चार ज्ञान धारी होकर तीन देवों , चक्रवर्ती द्वारा पूजित 64 ऋद्धियों के अधिपति हो जाते हैं और गणधर बनकर तीर्थंकर प्रभु की दिव्य वाणी को ग्रहण कर द्वादश अंगों में सूत्रबद्ध करते हैं यह अकाट्य सिद्ध है कि एक तीर्थंकर से दीक्षित शिष्य अन्य तीर्थंकर के गणधर नहीं हो सकते हैं, अपितु जिस तीर्थंकर का गणधर बनना है उनसे ही दीक्षित होना अनिवार्य है, भगवान महावीर के समवशरण में पार्श्व प्रभु से दीक्षित मुनि श्री विराजमान थे परन्तु वे गणधर नहीं बन सके! धर्म के सहारे बैठे रहेंगे तो बचे रहेंगे, इस गणधर वलय स्तोत्र की आराधना हमारी बुद्धि ,विद्या ,ज्ञान, प्रज्ञा की तीव्र गति से विकास में सहकारी है, ज्ञानी अज्ञानी सभी पढ़कर अपने-अपने समस्त क्रूर ग्रहों को आर्थिक, पारिवारिक, धार्मिक, राजनीतिक, शारीरिक ,मानसिक समस्त विघ्नों को दूर कर सुख समृद्धता के धनी बन सकते हैं, विधान की पुनरावृत्ति होती रहनी चाहिए, कम से कम साल में दो बार इस विधान को अवश्य ही करें, 6 माह तक प्रतिदिन विशुद्ध मन से इस महा स्त्रोत को पढ़ने एवं रिद्धि मंत्र का जाप करने से पाप कर्म की निर्जरा होती है और पुण्य का आश्रव होता है!

प्रज्ञा पद्मिनी पट्ट गणिनी आर्यिका 105श्री विज्ञमति माताजी ने अपनी मधुर वाणी से अर्घ एवं मंत्र पढ़े वहीं पं०विपिन जैन स्वामी के कुशल निर्देशन में मांडना पर श्री फल समर्पित किये गए! , श्रीमती सुनीता-नवीन जैन, समीक्षा जैन को विशुद्ध भक्त परिवार द्वारा सम्मानित किया गया! इस अवसर पर श्री वीर कांत जैन, कुलदीप जैन, अनिल जैन, संजू जैन, विक्रांत विक्की, विवेक जैन, राहुल जैन, गौरव बड़ागाँव, झम्मन जैन, सुरेन्द्र जैन, प्रतीक जैन, सोना शास्त्री, विज्जीजैन, आदेश जैन, तरूण जैन, श्रीमती जिनेन्द्र प्रभा जैन, नीतू जैन, बबिता जैन, वीनेशजैन, स्नेह लता जैन,शताक्षी जैन,रुबी जैन, सरिता जैन, रजनी जैन, चिंकी जैन,मंजू जैन एवं नीरेश जैन आदि ने विधान में उपस्थित रहकर पुण्यार्जन किया!शाम को बड़े मंदिर जी में 48 दीपकों से भक्तामर दीप अर्चना का सुंदर कार्यक्रम, आरती,गुरु भक्ति भोपाल की केशव एंड पार्टी के सुमधुर संगीत के साथ संपन्न हुआ!

मीडिया प्रभारी सुनील जैन बांदा ने बताया कि 10 अगस्त दिन शनिवार श्रावण शुक्ला षष्ठी को जैन धर्म के 22 वें तीर्थंकर श्री नेमिनाथ भगवान का जन्मकल्याणक महोत्सव ठंडी सड़क स्थित श्री नेमिनाथ जिनालय में प्रातः 6 बजे श्री जी का अभिषेक, शांति धारा पूजन आदि के पश्चात् दोपहर 2 बजे से नेमिनाथ जिनालय में ही श्री नेमिनाथ महिला मंडल द्वारा

 

 

 

 


भगवान के गीत, बधाई पालना झुलाने का सुन्दर कार्यक्रम का कार्यक्रम रखा गया है सभी लोग समय से मंदिर जी पहुँच कर पुण्यार्जन करें!

 

 


श्रावण शुक्ला सप्तमी 11 अगस्त दिन रविवार को बड़े जैन मंदिर पुरानी बस्ती में जैन धर्म के तेइसवें तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ भगवान का निर्वाणोत्सव गणिनी आर्यिका श्री विशुद्ध मती माता जी के सानिध्य में मनाया जाएगा जिसमें प्रातः 6.30 पर अभिषेक, शांति धारा, पूजन आदि के मध्य निर्वाणलाडू चढ़ाया जायेगा यह जानकारी मीडिया प्रभारी सुनील जैन बांदा ने‌ दी है!

 

बबीता जैन एटा से प्राप्त जानकारी केसाथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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