अन्तर्मना उवाच* (30 जून!)

धर्म

*अन्तर्मना उवाच* (30 जून!)

*कुछ तो है जो बदल गया है,*
*शाख के पत्तों का रंग उतर गया है..*
*एक वक्त था जब हर वक़्त साथ था वो मेरे,*
*शायद अब वक़्त बदल गया है..!*

 

 

 

*पहले लोग कभी-कभी बूढे़ हुआ करते थे, मगर आज कल लोग आए-दिनों बढे़ जाते हैं, समय से पूर्व ही बूढे़ हो जाते हैं।* ऐसा क्यो ? क्योंकि आदमी का खान-पान, रहन-सहन सब कुछ बदल गया है। पाश्चात्य जीवन शैली आ गई है। *पहले लोग कभी कभार बीमार होते थे और आज कल–? बस पूछो ही मत, कभी कभी स्वस्थ दिखते हैं।* बाकी तो बीमारियाँ बनी ही रहती है। बीमारियाँ क्या बढ़ी, डॉक्टरों की चांदी हो गई।

 

 

 

 

संसार में डॉक्टर एक ऐसा अद्भूत प्राणी है जो यह तो नहीं चाहता कि मरीज मरे, पर यह जरूर सोचता है कि आदमी सदा बीमार बना रहे। आदमी के बीमार रहने से ही डॉक्टर स्वस्थ है। वकील हमेशा यही सोचता है कि लोग खूब लडे़। लोग लड़ेंगे तो वकील की दुकान चलेगी।

 

 

*महावीर दुनिया के पहले महापुरुष हैं, जिन्होंने कहा कि दो ध्यान बुरे होते हैं और दो ध्यान अच्छे होते हैं –*🔸 आर्त ध्यान और रौद्र ध्यान बुरे हैं।
एल धर्म ध्यान और शुक्ल ध्यान अच्छे हैं…!!! नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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