जिसके जीवन में व्रत नहीं उसका जीवन शून्य के समान होता है विमल सागर महाराज पूज्य मुनि संघ सानिध्य में धर्मनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक महोत्सव मनाया गया

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जिसके जीवन में व्रत नहीं उसका जीवन शून्य के समान होता है विमल सागर महाराज पूज्य मुनि संघ सानिध्य में धर्मनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक महोत्सव मनाया गया
देवरी कला

आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज के परम शिष्य मुनि श्री 108 विमल सागर महाराज, अनंत सागर महाराज, धर्मासागर महाराज, भावसागर महाराज सानिध्य में ब्रह्मचारी रजनीश भैया रहली के निर्देशन में बच्चों का अष्ट मूल गुण संस्कार महोत्सव आयोजित हुआ। श्री जी के अभिषेक के बाद बच्चों के मस्तक पर पूज्य मुनिसंघ सानिध्य में संस्कार प्रदान किए गए। इस अवसर पर बच्चों ने अपने गुल्लक की राशि भी प्रदान की।

 

 

 

इस बेला में पूज्य मुनिश्री 108 विमल सागर महाराज ने कहा कि मूल गुण संस्कार की क्रिया से जिनके संस्कार होते हैं, वह योग्य बनते हैं, जिसके जीवन में व्रत नहीं होते है, उसका जीवन शून्य के समान होता है। स्कूल में पढ़ाई तो होती है, लेकिन संस्कार नहीं मिल पाते हैं। बालिका दोनों कुलो को संस्कारित करती है, संस्कारों का अर्थ होता है चमकाना, जैसे बर्तन धोने से चमकते हैं। पहले को कुसंस्कारों का त्याग करना चाहिए, नशीले पदार्थों का त्याग करना है, यह जीवन में अमंगल करते है। फास्ट फूड का त्याग करना है, एवं कहा कि आत्महत्या नहीं करेंगे यह नियम ले। हिंसक वीडियो गेम, पब जी, फ्रीवायर आदि का त्याग करना चाहिए।

 

 

 

 

 

महाराज श्री ने कहा कि भोजन करते समय टीवी, मोबाइल नहीं देखना चाहिए। संस्कारों का प्रभाव पड़ता है। यह विशेष बालक है जो अपने आप में शूरवीर बालक हैं, अपने बालों का समर्पण कर देना शूरवीर का कार्य होता है। इन्होंने बहुत बड़ा कार्य किया है। खोटी संपत्ति से बचना है, अच्छी संगति चंदन जैसी होती है, इन बच्चों पर थोड़ा सा भी खर्च करेंगे तो असंख्यात गुना पुण्य का अर्जन होगा। प्रभु के लिए जो धन संपत्ति दे दी जाती है फिर इस पर अपना अधिकार नहीं रखना चाहिए। दान देने के बाद हर्ष मनाना चाहिए। दान बोलकर नहीं देना यह घाटे का सौदा है। वह आगे दरिद्र बनता है।

 

 

इस बेला में अनंत सागर महाराज ने कहा कि इस पर्याय में पुण्य की कार्य करना चाहिए। स्कूलों में पढ़ाई तो होती है, लेकिन संस्कार नहीं मिल पाते हैं। पांच प्रतिभास्थली में बालिकाओं के लिए शिक्षा के साथ संस्कार दिए जाते हैं। यह हर्ष का विषय है की बच्चों ने नियम लिए हैं। नियम अपना होता है। कोई देखे या ना देखें अपने जीवन को नियमों से जोड़ना चाहिए। आगामी जीवन बिना नियम के सुंदर बनने वाला नहीं है अच्छी संगति करें।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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