कुलाचार का पालन नहीं होने से आजकल की बेटियों को जब शुद्ध भोजन बनाना ही नहीं आएगा तो साधुओं को आहार कैसे बनाएगी? प्रमाण सागर महाराज

धर्म

कुलाचार का पालन नहीं होने से आजकल की बेटियों को जब शुद्ध भोजन बनाना ही नहीं आएगा तो साधुओं को आहार कैसे बनाएगी?
प्रमाण सागर महाराज
विदिशा
कुलाचार का पालन नहीं होंने से आजकल की बेटियों को जब शुद्ध भोजन बनाना ही नहीं आएगा” तो साधुओं का आहार कैसे बनाएगी? आहार दान की महिमा का उल्लेख करते हुये मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ने श्री धर्मनाथ दि. जैन मंदिर जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के पांचवें दिवस ज्ञान कल्याणक दिवस पर प्रातःकाल की प्रवचन सभा में व्यक्त किये। मुनि श्री ने

 

 

 

कहा कि आजकल की बहुऐं और बेटियाँ रोटियां बनाना नहीं जानती तो इसमें दोष किसका? उन्होंने कहा कि जब मां ही भक्ष्य अभक्ष्य का ख्याल नहीं रखे होटल और रेस्टोरेंट से भोजन हायर करे तो फिर शादी होंने के बाद सास बहु में पटेगी कैसे? उन्होंने सभी माताओं तथा बेटियों को संबोधित करते हुये कहा कि आप खूब पढ़ो और माताओ आप अपनी बेटियों को खूब पढ़ाईये, उच्च शिक्षा दिलाइये लेकिन रसोई बनाने में भी दक्षता आना चाहिये, जिस घर में सास और बहु मिलकर भोजन बनाती है,तथा मुनिराज को पड़गाहन कर आहार दान देती है,उस घर में प्रेम बरसता है तथा चौके में पवित्रता रहती है, दान एवं श्रावक धर्म का पालन होता है।

 

मुनि श्री ने कहा कि जब तक दान की परंपरा चलती रहेगी तभी तक इस धरती पर धर्म टिका रहेगा, और जब तक धर्म है, तभी तक अग्नि है, जब तक अग्नि है,तभी तक पृथ्वी है, अग्नि समाप्त हुई की समझो पंचमकाल का अंत आ गया, उन्होंने कहा कि अक्सर यह कहा जाता है की महिलाऐं जांब करती है इतना समय ही नहीं मिलता कि रसोई बना सकें उन्होंने कहा कि में आपकी विदिशा में ही ऐसी कही महिलाओँ को जानता हूं जो जाब भी कर रही है, और घर को भी संभाल रही है उन्होंने कहा मोक्षमार्ग में लगे साधुओं की आहार चर्या का ख्याल रखना आपका दायित्व है, साधू और श्रावक दोनों मिलकर के ही मोक्षमार्ग की परंपरा को आगे बढ़ा रहे है,श्रावकों का कर्तव्य है कि साधुओं की आहार चर्या की पूर्ण व्यवस्था को बनाये जिससे उनके रत्नात्रय का पालन हो।

 

 

प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया ज्ञानकल्याणक के दिन मुनि आदिसागर जी महाराज की आहार चर्या संपन्न हुई बाल ब्र. अशोक भैयाजी ने मुनिराज आदिसागर के रुप प्रतिमा को मस्तक पर धारण करके निकले उधर बाल ब्र अभय भैयाजी मुनिराज का पड़गाहन कर आहार व्यवस्था को संभाला। राजा श्रैयांस के रूप में श्री मति सुशीला शैलेंद्र चौधरी बड़ू परिवार को तथा राजा सोम के रूप में प्रेम चंद्र प्रदीप जैन एल आई सी परिवार को आहार दैनै का सौभाग्य मिला।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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