हमें कुसंगति से बचना चाहिए अनंत सागर महाराज
रहली
परम पूज्य आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज के परम शिष्य मुनि श्री 108 अनंत सागर महाराज ने धर्म सभा में कुसंगति से बचने की सीख देते हुए कहा कि यह गुरुदेव की कृपा है, जो सब कार्य हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि संगति से सब कुछ अच्छा होता है।
जड़ संस्कृति एवं जड़ साधन मानव को विकृत करने वाले होते हैं। हमे कुसंगति से बचना चाहिए। कुसंगति के कारण अच्छे-अच्छे लोग, इज्जतदार परिवारों के बच्चे पतित हो जाते हैं। उनका मान सम्मान परिवार नष्ट हो जाता है। एक उदाहरण के माध्यम से कहा कि कहते हैं कि गले में तो चैन है, पर जीवन सदैव बेचैन रहता है। क्योंकि चैन तो ध्यान से मिलती है। धन से नहीं।





मोबाइल के विषय में कहा कि पाश्चात्य साधन मोबाइल जैसे यंत्रों से देखे जाने वाले अश्लील साहित्य और चित्रों के कारण युवा पीढ़ी गलत दिशा में जा रही है। हमें विज्ञान के साधनों मोबाइल की जरूरत तो है पर इसका उपयोग होना चाहिए, लेकिन दुरुपयोग हो रहा है इसे रोकने की आवश्यकता है।
पूज्य महाराज श्री ने आचार्य श्री कुंदकुंद स्वामी द्वारा रचित प्रवचनसार ग्रंथ का उदाहरण देते हुए बताया कि धर्म, साधना, त्याग, दान आदि को संसारी व्यक्तियों का सबसे श्रेष्ठ कर्म बताया है। जो भी धर्म और साधुओं की संगत में समय बिताते हैं, स्वाध्याय करते हैं, वह हमेशा ऊंचाइयों को प्राप्त करते हैं, नीचे नहीं गिरते।
आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज के विषय में बोलते हुए कहा कि अतिशय क्षेत्र पटना गंज जहां गुरुदेव को स्वास्थ्य मिला उन्होंने ऐसे स्थान को आध्यात्मिक साधना का बहुत बड़ा केंद्र बताया। इसीलिए उन्होंने कहा कि क्षेत्र के संरक्षण सुधार और विकास में समाज को तन,मन,धन का समर्पण देना चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
