समाधिस्थ अनशनश्री माताजी की विनयांजलि सभा का हुआ भव्य आयोजन : – गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी सानिध्य में हुआ समाधि का अर्थ है मृत्यु से लडकर जन्म – मरण में समता भावों को धारण कर मृत्यु महोत्सव मनाना। विज्ञाश्री माताजी
जयपुर
प. पू. भारत गौरव, गणिनी आर्यिका 105 गुरुमाँ विज्ञाश्री माताजी ससंघ सान्निध्य में समाधिस्थ क्षुल्लिका 105 अनशन श्री माताजी की विनयांजलि सभा का आयोजन पार्श्वनाथ कालोनी जयपुर में पार्श्वनाथ मंदिर प्रांगण में हुआ।
इस आयोजन की शुरुआत मंगलाचरण के साथ हुई। समाधिस्थ माताजी का जीवन परिचय पुखराज जैन पीसांगन वालों ने सम्पूर्ण जैन समाज को सुनाकर धर्म की प्रभावना में साधक बने।




श्रीमति मनोरमा देवी ने 94 साल की उम्र की जीवन काल में 4000 से भी अधिक उपवास व्रत कर तप साधना की। पं. विमल बनेठा ने भी अपनी विनयांजलि प्रस्तुत की। कासलीवाल परिवार ने भी माताजी के चरणों में विनयांजलि प्रस्तुत की। सभी साधर्मी बंधुओं द्वारा समाधिस्थ अनशन श्री माताजी की आत्मा की शांति हेतु हेतु दो मिनट का मौन रखा गया।
तत्पश्चात पूज्य गुरु माँ ने श्रद्धालुओं को संबोधन देते हुए कहा कि – मानव जीवन दो प्रकार से बीतता है। एक-मोमबत्ती और दूसरा- अगरबत्ती। जिसका जीवन अगरबत्ती रूप सुगंधी चारित्र की सुगंधी से बीत रहा है वह जीवन सार्थक है और मोमबत्ती रूप कषायों की कारोच रूप जीवन बीते तो अनर्थ है। समाधि का अर्थ है मृत्यु से लडकर जन्म – मरण में समता भावों को धारण कर मृत्यु महोत्सव मनाना। रे मानव! क्या लेकर आये थे, क्या लेकर जाओगे, मुट्ठी बांधकर आये थे, हाथ पसारे जाओगे। साथ में सिर्फ सत्कर्म ही लेकर जायेंगे। समाधि करने से यह जीव कम से कम 3-4 भव या अधिक से अधिक 7-8 भव में मोक्ष प्राप्त कर लेता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
