संतो के सानिध्य प्राप्त होने को ही सत्संग कहते है आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज
बाँसवाड़ा। 
परम पूज्य आचार्य श्री वर्धमान सागर बाँसवाड़ा की बाहुबली कालोनी के 1008 श्री मुनि सुब्रत नाथ जिनालय मे विराजमान है ।
शांति विधान में आचार्य श्री शांति सागर जी का गुणानुवाद मंडल विधान के माध्यम किया गया अध्र्य का वाचन आचार्य श्री वर्धमान सागर जी मुनि श्री हितेंद्र सागर जी अन्य साधुओं ने किया आचार्य श्री शांति सागर जी का गुणानुवाद आचार्य श्री ने किया

जहा गुरुवर संघ सानिध्य मे धर्म की अलोकिक प्रभावना हो रही है रविवार की बेला मे गुरुदेव ने अपने प्रवचन मे कहा बाहुबली कॉलोनी वालो का बाँसवाड़ा वालो का बड़ा सोभाग्य है जो संघ का सानिध्य आपको प्राप्त हो रहा है महाराज श्री ने कहा संतो का समागम एवम सत्संग का बड़ा महत्व है संतो के सानिध्य को प्राप्त होने को ही सत्संग कहते है आप लोगो को हर्षित होंना चाहिए की आपको गुरु का सानिध्य प्राप्त हो रहा है संत साम्य भाव रखते है उन्होने कहा मनुष्य मजबूर होकर कहता है महाराज आप व्रतो की बात करते है निर्वाह करना कठिन है आपके पास सब कुछ फिर भी आप व्रत को धारण करने से घबराते क्यों है उसका कारण बताते हुए कहा जिसकी संगति अभी हमे प्राप्त है वो संगति हमे आगे बढने से रोकती है जिन्होने सत्संगति प्राप्त कर ली वे आगे बढ़ गए अभी आपके पास इच्छाओं और कामनाओ की संगति है इच्छाओ की पूर्ति कभी होती नहीं ,इच्छाओ का कोई अंत नहीं है इन्द्रिया आपको विषयों मे ले जाती है इस कारण से आप सुख का अनुभव नहीं करते और दुखी होते है ।गंगा की सत्संगति से नाली का गंदा जल पावन बन गया लेकिन उसी गंगा ने समुन्द्र की संगती की तो उसका पानी खारा बन गया संगति का जीवन पर बहुत बड़ा असर होता मानव जीवन छोटा मोटा जीवन नहीं है उन्होने कहा जो साधन आपको मिले है। निचोड़ कर रहे है इससे सुख संपदा नहीं मिलने वाली कामनाओ और इच्छाओ से घिरा व्यक्ति ध्यान तो देता नहीं है और अपने जीवन को व्यर्थ गवा रहे है यह जीवन कल्पवृक्ष के समान चिंतामणि रत्न के समान जो मनुष्य जीवन हमे प्राप्त हुआ है अपने जीवन मे धर्म के महत्व को समझकर के संयम धारण करने का भाव करना चाहिए राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी 9929747312
