स्वस्तिभूषण माताजी के सानिध्य हुआ विमोचन-2500 वर्षो में पहली बार होगा महामस्तकाभिषेक
कोटा,
18अप्रेल । लगभग 12 वर्षो बाद भारत गौरव स्वस्ति धाम प्रणेता गणिनी आर्यिका 105 श्री स्वस्तिभूषण माताजी का हाड़ौती में पुनः आगमन हुआ है ।
पूज्य माताजी लगभग चालीस हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा कर चुकी जैन साध्वी के इतने लम्बे अंतराल के बाद पुनः कोटा आने पर श्रावकों में हर्ष की लहर है, प्रतिदिन पूजन विधान आयोजित हो रहे है । इसी क्रम में गुरुवार को नई धानमण्डी स्थित श्री शांतिनाथ जैन मन्दिर में श्री शान्तिनाथ विधान का आयोजन हुआ । इस अवसर पर पूज्य गुरुमां ने अपने उद्बोधन में कहा कि पुण्य ओर पाप दोनों को करने के लिए पुरुषार्थ करना पड़ता है, न पुण्य स्वयं से उपस्थित होता है न पाप इसलिए यह हम पर निर्भर करता है कि हम पुरुषार्थ किसके लिए करें । शुभ के लिए या अशुभ के लिए । धर्म करने से पुण्य बढ़ता है और पुण्य से ही वैभव और सुख की प्राप्ति होती है ।

इस अवसर पर केशोरायपाटन अतिशय क्षेत्र के अध्यक्ष गुलाबचन्द जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि इस बार केशोराय पाटन के मुनिसुव्रतनाथ भगवान ने ही गुरुमां की डोर खिंची है और उनका इस ओर आगमन हुआ है। आगामी 2-5 मई तक गुरुमां के सानिध्य में ही अतिशय क्षेत्र पर भगवान मुनिसुव्रतनाथ का जन्म एवं तप कल्याणक बड़ी धूमधाम से मनाया जायेगा। 2500 वर्ष के इतिहास में यह पहला अवसर होगा जब अतिशयकारी भगवान पर।




महामस्तकाभिषेक होने जा रहा है । मंच संचालन करते हुए प्रतिष्ठाचार्य कपिल जैन ‘सार्थक’ ने कहा कि 4 मई को नदी के किनारे शनिग्रहारिष्ट निवारक श्री मुनिसुव्रतनाथ विधान आयोजित होगा जिसमें पूरे हाड़ोती के हजारों दम्पति शामिल होंगे । 
कलश आवंटन समिति के संयोजक अनिल ठौरा ने बताया कि इस आयोजन के कूपन का विमोचन सभी पदाधिकारियों की उपस्थिति में आज माताजी के सानिध्य में किया गया । 
राकेश जैन ‘चपलमन’प्रवक्ता- श्री मुनिसुव्रतनाथ जन्मकल्याण महोत्सव आयोजन समिति से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
