क्रोध में उत्तर,खुशी में वचन और दुख में निर्णय न ले — आदित्य सागर जी महाराज
कोटा
श्रुतसंवेगी आदित्य सागर जी महाराज ससंघ व मुनि अप्रमित सागर के सानिध्य में विशुद्ध ज्ञान ग्रीष्मकालीन वाचन का आयोजन किया जा रहा है।


मंदिर अध्यक्ष अंकित जैन ने बताया कि श्रुतसंवेगी आदित्य सागर
जी महाराज ससंघ को सुनने सैकड़ों की संख्या में लोग एकत्रित हुए। बुधवार को आदित्य सागर महाराज ने ग्रीष्मकालीन वाचना में कहा कि जीवन में सुख आवश्यक है, सुविधा नहीं।

जीवन को अधिक सुविधापूर्ण व पैसा वाला न होकर खुशहाल व सुखी होना जरूरी है। उन्हें खुशहाल जीवन की सीख देते हुए कहा कि हमें जीवन में तीन मंत्रो को याद रखना है।
हमें प्रसन्नता व खुशी के माहौल में कभी कोई वचन नहीं देना है,दुख के समय हमें निर्णय करने से बचना है और जब हम क्रोधी हो तो उत्तर नहीं देना है।यदि हम यह करने में सक्षम हो सके तो हमारे व्यक्तित्व में निखार आएगा और जीवन में खुशहाली आएगी।


उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गाडी में पेट्रोल डलवाते समय लुब्रिकेंट आयल भी डलवाया जाता है

उसी प्रकार मन में लुब्रिकेंट होना चाहिए जो हमें दुख,कोध्र व प्रसन्नता की अवस्था में लचीला बना सके और हम तुरंत प्रतिक्रिया देने से बच जाए।
संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
