अपनों के लिए उदार,अनजानों पर दया और दुर्जन के सख्त बने — श्री 108 आदित्य सागर जी महाराज आर के पुरम जैन मंदिर मैं संतो के हो रहे हैं ग्रीष्मकालीन प्रवचन
कोटा
आर के पुरम त्रिकाल चौबीस दिगम्बर जैन मंदिर समिति की ओर से आयोजित विशुद्ध ज्ञान ग्रीष्मकालीन वाचन किया जा रहा है। मंदिर समिति के अध्यक्ष अंकित जैन ने बताया कि श्रुतसंवेगी आदित्य सागर जी महाराज ससंघ ने श्रद्धालुओं को जिनवाणी का श्रवण करवाया। उन्होने जिनवाणी से जीवन जीने की कला सिखाई। आर के पुरम मंदिर द्वारा 17 मार्च से 25 मार्च तक सिद्ध महामण्डल विधान का आयोजन किया जाएगा।
इस अवसर पर महामंत्री अनुज जैन, ,दर्पण जैन ज्ञानचंद जैन खजूरी, मुकेश पपड़ीवाल , अशोक पाटनी , प्रकाश चंद सेठिया सैकड़ों की संख्या में शांत भाव से प्रवचनों से ज्ञान प्राप्त किया।

जीवन जीने की कला। 
चर्या शिरोमणि आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य परम पूज्य श्री 108 आदित्य सागर जी महाराज ससंघ ने जीवन जीने कला बताते हुए कहा कि मनुष्य को अपने परिजन,सगी—सम्बंधी व जानकारों के लिए उदारभाव रखना चाहिए






,यदि हम उदार रहेंगे तो हमारी ख्याति भगवान के समान होगी। उन्होंने जीवन का दूसरा भाव समझाते हुए कहा कि हमें अनजानों के लिए भी दया भाव रखना चाहिए।

अनजानो को यदि मदद की जरूरत हो तो हमें निःसंकोच भाव से यथाशक्ति मदद करनी चाहिए परन्तु दया व दान भाव का आडम्बर व प्रचार नहीं करना चाहिए। आदित्य सागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि दुर्जनों से सावधान व सख्त रहना चाहिए। दुर्जन घाव के समान होता है,दर्द होने पर डॉक्टर जिस प्रकार घाव से मवाद को दूर करते है वैसे ही दुर्जन के प्रति सख्त रहे। जिद्दी दागों को स्वच्छ करने के लिए भी कपड़ों को सख्ती से धोना पढ़ता ही है। उन्होंने श्रावकों को समझाया कि सख्ती का आश्रय कभी भी हिंसा से नहीं है हमें अहिंसक होकर सख्त बनाना होगा।
प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट9929747312
