श्रीमद जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा प्राण महामहोत्सव: तप कल्याणक में बाल क्रीड़ा, राज्याभिषेक दीक्षा विधि संस्कार आचार्य श्री के प्रवचन

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श्रीमद जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा प्राण महामहोत्सव: तप कल्याणक में बाल क्रीड़ा, राज्याभिषेक दीक्षा विधि संस्कार आचार्य श्री के प्रवचन
पारसोला श्रीमद पार्श्वनाथ जिनेन्द्र पंचकल्याणक महामहोत्सव समवशरण के अवसर पर प्रातः श्री जी के अभिषेक नित्य नियम पूजन के बाद वात्सल्य वारिधि आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में बालक पार्श्वनाथ की बाल क्रीड़ा का उपस्थित 10000 से अधिक समाज ने हर्ष और आनद से अवलोकन किया दोपहर को आचार्य संघ सानिध्य में तीर्थंकर पार्श्वनाथ का राज्याभिषेक व दीक्षाविधि संस्कार जयकारों के बीच किया गया।पंचकल्याणक प्रतिष्ठा प्राण महामहोत्सव के तीसरे दिन मुकुट बध्य राजाओं की शोभा यात्रा गाजे-बाजे के साथ निकाली गई।बैड की मधुर ध्वनियों के बीच निकली यात्रा के दौरान जैन समाज के लोगों ने नृत्य करते हुए खुशियां मनाई। यात्रा का समापन वर्धमान सभागार हुआ । वात्सल्य वारिधि आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में जयकारों के बीच भगवान के माता-पिता ने संहितासूरि पंडित हंसमुख जैन धरियावद पंडित के मंत्रोच्चार के बीच तीर्थंकर बालक का राज्याभिषेक करवाया गया। बाद में वैराग्य दर्शन व तीर्थंकर महाराज का गृह त्याग का मंचन किया गया। आचार्य श्री के सान्निध्य में दीक्षा विधि संस्कार, तपकल्याणक पूजा व हवन का आयोजन किया गया। श्रीमद जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा प्राण महामहोत्सव के तहत वर्धमान सभागार में आयोजित प्रवचन सभा में आचार्य श्रीवर्धमान सागर जी ने कहा आज आज आपने तीर्थंकर बालक की देव बालकों के साथ क्रीड़ा देखीहै ,आज तप कल्याणक पंच कल्याणक का तीसरा दिन है दोपहर को वैराग्य के दृश्य आप देखेंगे ।भगवान पार्श्वनाथ की करुणा देखी,जिन्होंने तपस्यारत साधु द्वारा जलाई अग्नि में दो जलते हुए मरणासन्न सर्प युगल की रक्षा कर उन्हें णमोकार मंत्र सुनाया आपके संबोधन से वह मरकर देव गति में धरनेंद र्और पद्मावती देव देवी बने ।व्यक्ति अभिमान में यह जानने का प्रयास नहीं करता कि उसके किसी कार्य से किसी का धात होता है ।संसारी प्राणी का जीवन भी भगवान की भांति करुणामय होना चाहिए जो भी कार्य करें वह विवेक पूर्वक करें ।आचार्य श्री ने भगवान पारसनाथ के पूर्व भवो का वर्णन कर बताया कि मरुभूति के जीव से इंद्र बने ,मनुष्य बन कर यहां तक की हाथी की पर्याय भी उन्होंने प्राप्त की संसार के सब प्राणियों के भलाई की भावना करने से तीर्थंकर नामकरण प्रकृति का बंध किया है । यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने तप कल्याणक के अवसर पर धर्म सभा में प्रकट की ब्रह्मचारी गज्जू भैय्या राजेश पंचौलिया ,विनोद अनुसार आचार्य श्री ने बताया कि आज दिनेश जी के नेतृत्व में 72 समाज के हजारों लोग बागड़ में आचार्य संघ के आगमन हेतु निवेदन करने पधारे हैं । उसके लिए धैर्य बहुत जरूरी है सभी बागड़ और मेवाड़ की जैन समाज को पारसोला से सीख लेना चाहिए कि उन्होंने 17 वर्षों तक आचार्य संघ की प्रतीक्षा की कि हम पंचकल्याणक प्रतिष्ठा आचार्य वर्धमान सागर संघ से ही करवाएंगे। भक्ति और भावना से हर कार्य सिद्ध होते हैं इस अवसर पर आचार्य श्री ने बागड़ के हुलास चंद सबलावत को स्मरण किया ।सबलावत जी ने दो बार श्रवण बेलगोला की संघपति बनकर यात्रा कराई ।उनकी यह भावना थी कि आचार्य संघ का पदार्पण बागड़ प्रांत में हो ,यद्यपि वह अब दिवंगत हो गए हैं किंतु उनकी भक्ति और भावना के अनुरूप संघ बागड़ में आया है भावना करने से सफलता मिलती है क्योंकि भावना भवनाशिनी होती है । धर्म भावना और गुरु भक्ति से मनुष्य जीवन सार्थक करें और पुरुषार्थ कर रत्नत्रय धर्म को धारण कर मोक्ष फल प्राप्त करने का प्रयास करें। इसके पूर्व आर्यिका श्री देशना मति ने प्रवचन में संस्कार का महत्व बताया। 18000 दशा हुमड समाज के अध्यक्ष दिनेश खोड़निया सागवाड़ा के नेतृत्व में हजारों गुरु भक्तों ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के दर्शन कर संपूर्ण 72 गांव में पधारने हेतु निवेदन किया इस अवसर पर दिनेश ने कहा कि 72 नगरों में चातुर्मास करें ऐसी भावना हम करते हैं ।कल श्रवण बेलगोला में भगवान बाहुबली के चरणों अभिषेक के लिए जब मैं गया था वहां पर पारसोला पंचकल्याण की चर्चा हुई कि आप बागड़ मेवाड़ से आए और वहां पर तो आचार्य श्री वर्धमान सागर जी द्वारा पंचकल्याणक हो रहा है। वर्तमान में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज न केवल भारत देश के वर्णन विश्व के सबसे बड़े आचार्य संत हैं ।हम आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज में भगवान महावीर की छवि देखतेहै। प्राण प्रतिष्ठा महा महोत्सव के तीसरे दिन को विभिन्न कार्यक्रम हुए। तप कल्याणक के तहत प्रतिष्ठाचार्य संहितासूरि हंसमुख जैन के निर्देशन में प्रातः जिनाभिषेक एवं नित्यार्जन और बाल क्रीडा का आयोजन किया गया। वर्धमान सभागार में वात्सल्य वारिधि आचार्य वर्धमान सागर को शास्त्र भेंट करने सौभाग्य धर्मेंद्र सुमति लाल मैदावत परिवार पारसोला को मिला वही पाद प्रशालन करने का सौभाग्य नरेश सरिया सपरिवार को मिला ।दोपहर को स्थानीय महिलाओ द्वारा आचार्य वर्धमान सागर गौरव गाथा सुंदर नाटिका मंचन को देखने के लिए जैन समाज के लोगों का सैलाब उमड़ा। आज तप कल्याणक दिवस पर राजस्थान शासन के केबिनेट मंत्री बाबूलाल कराड़ी,विधायक अमृत लाल मीणा एवम अन्य राजनीतिक प्रतिनिधि ने आचार्य श्री से आशीर्वाद लिया।आज पारसोला समाज ने वर्ष 2024 के वर्षायोग एवम् प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव पारसोला में मनाने की स्वीकृति हेतु निवेदन किया।राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312।

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