आचार्य श्री ने संघ का विस्तार कर गुरुकुल बनाने का कार्य किया है, और इसके माध्यम से जिन्हें शासन की धर्म प्रभावना दूर-दूर तक हुई है आगम सागर महाराज

आचार्य श्री विद्यासाग़र महाराज

आचार्य श्री ने संघ का विस्तार कर गुरुकुल बनाने का कार्य किया है, और इसके माध्यम से जिन्हें शासन की धर्म प्रभावना दूर-दूर तक हुई है आगम सागर महाराज
सागर
आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनि श्री 108 आगम सागर महाराज ने मनोरमा कॉलोनी में आचार्य श्री की महिमा करते मनोरमा कॉलोनी में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का गुणानुवाद करते हुए कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ऐसे साधु थे जिनका पुण्य इतना तीव्र था कि एक बार जो उनके दर्शन करता था वह उनका मुरीद हो जाता था।

 

उन्होंने अपनी मुनि और आचार्य पद काल में अपने द्वारा शुरू किए गए सभी प्रकल्पों में स्वार्थ से उठकर कार्य किया। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री ने संघ का विस्तार कर गुरुकुल बनाने का कार्य किया है, और इसके माध्यम से जिन शासन की धर्म प्रभावना दूर-दूर तक हुई है।

 

महाराज श्री ने आगे बोलते हुए क्रोध, माया, लोभ को कम करने की बात करते हुए कहा कि जीवन में माया लोभ क्रोध को कम करना चाहिए, जिससे कि आपको भी मोक्ष जाने का रास्ता मिल सके। मोक्ष जाने पर तन मन का रोग समाप्त हो जाता है।

उन्होंने कहा कि 6 मार्च से जेल में हो रहा महामंडल विधान आचार्य श्री के आशीर्वाद से ही हो रहा है। जिससे कैदियों को धर्म लाभ मिलेगा। आचार्य श्री की समाधि के समय की बात करते हुए महाराज श्री ने कहा कि बताया जाता है कि जब आचार्य श्री की समाधि हुई तब जेल के कैदियों ने उपवास किया था। यह उनके पुण्य के कारण है। सागर में बन रहे, सर्वोत्तोभद्र जिनालय के लिए आप सभी तन मन धन से सहयोग करें। सागर का
सर्वोतोभद्र जिनालय पूर्ण होने के बाद जब पंचकल्याणक होगा तो विश्व के मानचित्र पर एकमात्र जैन तीर्थ होगा जो चतुर्मुखी जिनालय के नाम से जाना जाएगा।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी मोबाइल 9929747312

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