श्री आदिनाथ जिनालय में श्री आदिनाथ भगवान सहित अनेक भगवान विराजित।आचार्य श्री धर्म सागर जी का 111 अवतरण वर्ष मनाया।

धर्म

श्री आदिनाथ जिनालय में श्री आदिनाथ भगवान सहित अनेक भगवान विराजित।आचार्य श्री धर्म सागर जी का 111 अवतरण वर्ष मनाया।सलूंबर  श्रद्धा,आस्था,विश्वास,विनय और भक्ति से मोक्ष की राह प्रशस्त होती हैं श्री आदिनाथ भगवान के मोक्ष गमन कर सिद्धालय विराजित होते ही पंचकल्याणक पूर्ण हो गया।  पंचकल्याणक पाषाण और धातु की प्रतिमा को भगवान बनाने की प्रक्रिया है ,भगवान बनाने के लिए विशेष आयोजन होता है जैसे पूर्व में सौधर्म इंद्र, कुबेर आदि साक्षात तीर्थंकर बालक का पंच कल्याणक करते थे उसी प्रकार नाटक रूप में आप लोग इंद्र बनकर पंचकल्याणक की क्रियाएं करते हैं।         पंचकल्याणक प्रतिष्ठा के बाद भगवान पूज्य हो गए हैं यह मंगल देशना श्री आदिनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रकट की गजू भैय्या,राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने बताया कि इस प्रतिष्ठा कार्यक्रम में सलूंबर के साथ सुदूर अनेक नगरों से आप लोगों ने भाग लिया जिनका सौभाग्य और पुण्य होता है, जिनकी भगवान के प्रति श्रद्धा आस्था और विश्वास होता है उन्हीं को यह अवसर मिलता है। श्रद्धा, आस्था, विश्वास , विनय और भक्ति से जीवन में पाप का प्रक्षालन होता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि दर्शन करने से, भक्ति करने से भगवान भी बन सकते हैं ।भगवान की भक्ति अंतरंग से श्रद्धा और विनय के साथ करना चाहिए आज 450 वर्ष प्राचीन मंदिर को नवीन रूप देने के बाद प्रतिष्ठा का कार्य पूर्ण हुआ नागपुर मुंबई और अहमदाबाद अनेक नगरों से आए भक्त तथा सलूंबर के भक्त जिनकी भगवान के प्रति आस्था , श्रद्धा , और भक्ति थी ,उनका जीवन मंगलमय होगा ।      प्रतिष्ठाचार्य हसमुख जी ने भी अपने टीम के साथ काफी परिश्रम कर समय में कार्य को पूर्ण कराया ।आप समाज जनों ने संग्रहित संचय किये धन को दान देकर उपयोग किया इस दान का उदारता पूर्वक उपयोग धार्मिक कार्य में किया है जिनालय में आराध्य की आराधना का पूजा अभिषेक का फल सभी को मिलता है भगवान के जिन बिंब प्रतिमा के दर्शन से सम्यक दर्शन प्राप्त होता है सम्यक दर्शन के अभाव में प्राणी संसार में परिभ्रमण कई भव से कर रहे हैं। इसलिए श्रद्धा भक्ति से जीवन में निर्वाण प्राप्त करने का पुरुषार्थ कर मनुष्य जीवन को सार्थक करने का प्रयास करे।भगवान के प्रतिदिन दर्शन अभिषेक पूजन करने से मोक्ष मार्ग की राह प्रशस्त होती है मनुष्य जीवन की सार्थकता जिन बम के दर्शन अभिषेक पूजन स्वाध्याय से है जन्म को सार्थक कर, मरण को दीक्षा रुपी लक्ष्मी से से वरण करने का कार्य सौभाग्य शाली जीव कर जीवन को सार्थक करते हैं। जैन धर्म की महिमा बहुत है भगवान की आत्मा भी हमारी आत्मा जैसी है उन्होंने भी संसार में परिभ्रमण किया। संसार परिभ्रमण में मिथ्यात्व को नष्ट कर सम्यक दर्शन प्राप्त किया । सम्यक दर्शन से केवल ज्ञान प्राप्त कर जितनी आयु शेष थी, तब तक भगवान भी संसारी रहे। अब मोक्ष कल्याणक के दिन कर्म बंधन से मुक्त होकर भगवान की आत्मा परमात्मा हो गई है।आचार्य श्री ने आगे बताया आप आकुलता में रहते हैं इसलिए दुखी हैं । भगवान ने आकुलता से निराकुलता,अशांति से शान्ति, के लिए श्रद्धा गुण प्रगट किया । आचार्य श्री ने बताया कि मन की चंचलता से वाणी में चंचलता आती है ,और वाणी की चंचलता से , काय की चंचलता आती है । मन , वाणी, और काय की चंचलता से कर्मों का आश्रव होता है ।हम आप सभी संसारी है । तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्म सागर जी का 111 वा वर्षवर्धन वर्ष मनायादीक्षा गुरु आचार्य तृतीय पट्टाचार्य आचार्य श्री धर्म सागर जी के 111 वे जन्म अवतरण वर्ष पर आचार्य श्री ने उनका गुणानुवाद किया । गुरु के हम पर बहुत कृपा है,गुरु आचार्य श्री धर्म सागर जी ने मुनि दीक्षा हमें दी। सभी गुरुओं के आशीर्वाद से हम आचार्य श्री शांति सागर जी की परंपरा को चला रहे हैं। आचार्य श्री ने महत्वपूर्ण सूत्र में बताया कि जन्म को सार्थक कर, मरण को दीक्षा रुपी लक्ष्मी से से वरण करने का कार्य सौभाग्य शाली जीव कर जीवन को सार्थक करते हैं। मुनि श्री हितेंद्र सागर जी एवम शिष्या आर्यिका श्री शुभ मति माताजी ने आचार्य श्री धर्म सागर जी का गुणानुवाद किया।श्रीमद जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा प्राण महामहोत्सव का समापनःपंच कल्याणक महोत्सव समिति के प्रभुलाल दोषी ,मनोहर लाल ,शांतिलाल , सेठ लक्ष्मीलाल, सेठ ललित कुमार अनुसार आचार्यश्री वर्धमान सागर ससंघ सान्निध्य में हुए कार्यक्रम मंदिरों में प्रतिमा विराजमान के साथ शिखरों पर कलशरोहण ध्वजारोहणकेवल ज्ञान संस्कार क्रिया संहिता सूरी पंडित हँसमुख शास्त्री प्रतिष्ठाचार्य के कुशल निर्देशन में संपन्न हुई ।वहीं गुरुवार को अग्निदेव द्वारा सत्कार विधि व मोक्ष कल्याणक पूजा का आयोजन किया गया। विसर्जन कार्यक्रम के साथ ही महामहोत्सव का समापन हुआ।वात्सल्य वारिधि आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में महामहोत्सव का विसर्जन श्रीमद जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा प्राण महामहोत्सव के अंतिम दिन गुरुवार को ध्यान व आशीर्वाद सभा, श्री जिनाभिषेक एवं नित्यार्चन, मोक्षकल्याणक दृश्य का आयोजन किया गया। वात्सल्य वारिधि आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में अग्निदेव द्वारा संस्कार विधि, मोक्ष कल्याणक पूजा, हवन, पूर्णाहुति की गई।इसके पूर्व आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज के सान्निध्य में दीप प्रज्वलन व चित्र अनावरण पुण्यार्जक परिवार द्वारा किया गया। वहीं श्रीजी को रथयात्रा के माध्यम से श्री आदिनाथ जिनालय बीसा नागदा दिगम्बर जैन मंदिर लाया गया। संघ सानिध्य में श्री नूतन बेदीयो पर पुण्यार्जक परिवारों द्वारा श्री आदिनाथ भगवान सहित अनेक प्रतिमाएं विराजित कर सौभाग्य शाली परिवार द्वारा अभिषेक किया गया।                 

नूतन शिखरों पर पुण्यार्जक परिवारों द्वारा कलशारोहण एवम नूतन जैन ध्वजा लगाई गई दिनांक 25.1.,2024 रूप गिरी सलूंबर में वात्सल्य वारिधि श्री108 श्री वर्धमान सागर जी महाराज के सानिध्य मे ध्वज दंड एव’कलश आरोहण प्रातः 8:15 से किया गया । दोपहर को विसर्जन के साथ महोत्सव का समापन हुआ। श्री पदाधिकारियों ने महामहोत्सव के दौरान आवास, भोजन, यातायात, जुलूस व्यवस्था, प्रशासनिक व्यवस्था, पूजन विधान व कलश वितरण, मंच व्यवस्था आदि समितियों के सराहनीय सहयोग का आभार जताया। राजेशपंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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