तीर्थंकर बालक जन्म से अनंत बल,ज्ञान अनेक गुणों के धारी होते हैंआचार्य श्री वर्धमान सागर जी
सलूंबर श्री आदिनाथ जिन बिंब पंच कल्याणक प्रतिष्ठा 21 जनवरी से पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में ध्वजारोहण, मंडप उद्घाटन चित्र अनावरण दीप प्रज्वलन से प्रारंभ हुई आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने मंगल देशना में बताया कि पंचकल्याणक का प्रथम दिवस है असम के राज्यपाल तथा सलूंबर ,उदयपुर के विधायक और राजनेता पधारे हैं। राज्यपाल कटारिया जी ने जिनकी जन्मभूमि राजस्थान है वह उसे भूले नहीं हैं। करने योग्य कार्य को कर्तव्य समझ कर करते हैं ।तीर्थंकर भी देश राज्य के राजा युवराज होते हैं संसार को असार जान कर संयम दीक्षा धारण कर सारे संसार को अपनी दिव्य देशना से सुख प्राप्त करने का मार्ग दिखाते हैं।


पंचकल्याणक की क्रिया जो देवता के रूप में आप करते हैं। तीर्थंकर के जन्म होने के पूर्व से गर्भ में होने के बाद गर्भ कल्याणकजन्म कल्याणक , तप कल्याणक ज्ञान कल्याणक और मोक्ष कल्याणक की क्रिया होती है तीर्थंकर भगवान का जन्म अंतिम जन्म होता है क्योंकि इसके बाद वह दोबारा गर्भ में नहीं आते हैं और संसार के जन्म मरण के बंधन आवागमन से छूट जाते हैं







तीर्थंकर जन्म से अनंत शक्ति के धारी होते हैं ।बालक प्रभु 1008 बड़े-बड़े कलश धड़ों से अभिषेक होता है अविचल रहते हैं।असम के राज्यपाल कटारिया जी राजस्थान जैसे शांत प्रदेश से असम जैसे अशांत प्रदेश में गए वहां उन्होंने धर्म को साथ रखकर अपनी योग्यता से सफलता प्राप्त की , उनके जीवन में धर्म का साथ बना रहे धर्म को श्रद्धा भक्ति से धारण कर जीवन में उन्नति को प्राप्त करे।

पाषाण और धातु की प्रतिमा को पंच कल्याणक में मंत्रोचार से प्रतिष्ठित कर आराध्य बनाया जाएगा ।हमें भी भगवान और गणधर स्वामी के द्वारा बताए गए मार्ग से यह अवसर मिले कि हम भी आप अरिहंत भगवान की भांति पापों कर्मों का प्रक्षालन कर सके जिस प्रकार भगवान ने कर्मों का नाश कर सिद्धालय में केवल ज्ञान प्राप्त कर विराजित हुए हैं भगवान के गुण की पूजा भजन और स्तुति की जाती है। आपको यह भावना करना चाहिए कि जैसे आपके कल्याणक हुए हैं वैसा मेरा भी कल्याण हो जाए। इसके लिए आपको अपनी शक्ति और सामर्थ को प्रकट कर पुरुषार्थ कर रत्न त्रय धर्म प्राप्त कर मानव जीवन को सफल बनाने का प्रयास करना चाहिए पंडाल के साथ ही भोजन शाला भी है आपका लक्ष्य भोजन नही होकर जिस समय साधु संतों के प्रवचन और धार्मिक क्रिया होती है उसको देखना चाहिए देखने से परिणाम में विशुद्धता आती है
राज नेता संतो के गुण रूपी चुंबक से खींचे चले आते हैंमहामहिम कटारिया जी आचार्य भगवान पत्थर धातु को मंत्रो के द्वारा भगवान बनाने का कार्य विधिपूर्वक करते हैं ।जैन संतों के सानिध्य में मुझे जैन धर्म और सिद्धांतों को समझने का अवसर मिलता है ।धन्य होती वह माता जो तीर्थंकर भगवान और संतों को जन्म देती है। राजनेता संतो के गुण रूपी चुंबक से खींचे चले आते हैं ।आचार्य ,मुनिराज कठोर तपस्या और साधना से जगत को ज्ञान देते हैं। सद कार्य पहले करते हैं फिर उपदेश देते हैंसभा को ताराचंद जैन विधायक उदयपुर एवम् अमृत लाल मीणा विधायक सलूंबर ने संबोधित किया। पंच कल्याणक कमेटी अध्यक्ष प्रभु लाल दोषी ने स्वागत भाषण दिया।सभी अतिथियों का शाल श्रीफल माला पगड़ी प्रतीक चिन्ह से स्वागत किया। प्रारंभ में महामहिम गुलाबचंद कटारिया ने गर्भ मंडप का उद्घाटन किया। सेठ लक्ष्मीलाल,सेठ ललित कुमार,शांति लाल गुणावत ने बताया कि इसके पूर्व प्रातः श्री जिन मंदिर में नांदी विधान की पूजन सोधर्म इंद्र सहित सभी इंद्र परिवार द्वारा की गई। इसके बाद एक वेशभूषा में महिलाओं का अनुशासित दल सिर पर शताधिक मंगल कलश लेकर चल रहा था। विशाल जलूस मार्ग पर सभी धर्मो के नागरिकों ने स्वागत द्वार लगाए। जगह जगह पुष्प वृष्टि की जा रही थी कलश यात्रा के पीछे पंच कल्याणक में पात्र माता पिता,सोधर्म इंद्र,चक्रवती राजा,कुबेर, ईशान, सानत, माहेंद, ब्रह्म, ब्रहोत्तर, लांतव ,शुक्र, महाशुक्र, शतार आदि हाथी तथा बग्गी में सवार होकर चल रहे थे। जुलूस में 5 अश्व , 5 गज, 4 बैंड , शामिल रहे।जुलूस का समापन वर्धमान सभागार में हुआ ।महावीर कुमार जसराज दोषीपरिवार द्वारा मंत्रोचार के बाद धवजारोहण किया गया। पंडाल का उद्घाटन कमलेश गणेश लाल मालवी परिवार द्वारा किया गया ।कुंभ कलश स्थापना मोहनलाल, भंवरलाल सेरावत परिवार द्वारा किया गया। मुख्य कार्यक्रम स्थल वर्धमान सभागार में आचार्य श्री संघ सहित विराजित हुए। प्रथमाचार्या चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर जी के चित्र का अनावरण महेंद्र ओकरलाल रायकिया एवम् दीप प्रवज्जलन दिनेश गणेश लाल मालवी द्वारा किया गया।महिला मंडल द्वारा मनमोहक नृत्य के माध्यम से मंगलाचरण प्रस्तुत किया। द्वारा सुंदर भजन का गायन किया दोपहर को सकलीकरण, इंद्र प्रतिष्ठा, मंडप प्रतिष्ठा, अंकुरारोपण, तथा जिनाभिषेषक किया गया। सभी इंद्र परिवार द्वारा याग मंडल की पूजन की गई। शाम को आरती तथा शास्त्र सभा हुई। रात्रि को गर्भ कल्याणक के नाटकीय उत्सव किया गया। राजेश पंचोलिया वात्सल्य भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
