हिंसक बना अहिंसक निर्ग्रन्थ मुनि सुवन्द्यसागर जी की प्रेरणा मार्गदर्शन से 

धर्म

हिंसक बना अहिंसक निर्ग्रन्थ मुनि सुवन्द्यसागर जी की प्रेरणा मार्गदर्शन से

सुल्तानपुर

28 dec 23 को सुल्तान पूर में प्रवेश हुआ प्रवेश के दोरान सुल्तानपुर के श्रावक के अलावा दूसरी समाज के लोग भी थे जिसमें मुसलमान भी थे प्रवेश के बाद एक मुसलमान व्यक्ति महाराज के पास बैठा चर्चा करने लगा तब महाराज श्री ने उससे पूछा सबसे बड़ा धर्म कौनसा है तो उसने कहा सबसे *बड़ा धर्म इस्लाम हैं* इस पर महाराज ने कहा धर्म तो अनादि से है धर्म के नाम तो हम लोगों ने रख दिया हैं *सबका धर्म एक ही है* फिर महाराज ने कहा *सबसे बड़ा धर्म प्राणियों पर रहम करना है* और अल्लाह भी कहते है।

 

 

 

 

 

सब प्राणियों पर रहम करे यह बात उस मुसलमान व्यक्ति के समझ में आयी और उसने जीवन भर मांस खाने का त्याग है यह नियम किया* होनहार अच्छी हो तो अच्छी बात सही समय पर समझ आती हैं और जब संबोधन करने वाले निर्ग्रन्थ मुनि सुवन्द्यसागर जी हो तो बात ही अलग हैं


गुरु देव आपकी वाणी में इतनी गंभीरता है कि सुनने वाले गंभीरता से सुनते है और प्रभावित हो जाते है

 

 

गुरु कि वाणी तो पशु भी सुनते है और समझते हैं तो फिर ये तो मनुष्य हैं क्यों नहीं समझेंगे अवश्य समज में आएगा ऐसे प्राणी मात्र पर दया और उपकार करने वाले परम उपकारी हिंसक से अहिंसक बनाने वाले मुनिराज को नमोस्तु
संदीप कुमार जैन खमेंरा से प्राप्त जानकारी

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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